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कोर्ट में बंदियों की निगरानी करेगा विशेष दस्ता

-पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आने के बाद गठित की गई टीमएनबीटी संवाददाता, लखनऊ : जिला जेल से पेशी पर आने वाले बंदियों को मौज करवाना अब ...

Navbharat Times 16 Mar 2018, 9:00 am

-पुलिसकर्मियों की लापरवाही सामने आने के बाद गठित की गई टीम

एनबीटी संवाददाता, लखनऊ : जिला जेल से पेशी पर आने वाले बंदियों को मौज करवाना अब पुलिसकर्मियों को महंगा पड़ेगा। एसएसपी ने बंदियों और उनकी अभिरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों की निगरानी के लिए एक विशेष दस्ता गठित किया है। इस दस्ते के पुलिसकर्मी कोर्ट परिसर व उसके आसपास सादे कपड़ों में तैनात रहकर बंदियों की निगरानी करेंगे और उसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को देंगे।

कोर्ट में पेशी पर आने के दौरान सुविधा शुल्क के चक्कर में छह पुलिसकर्मी हाल ही में निलंबित किए गए। इन पर बंदियों को पेशी पर लाने के बाद सुविधाएं देने का आरोप है। बंदी की अभिरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों की इस हरकत से जहां बंदियों को आपराधिक गतिविधियों की साजिश रचने का मौका मिल जाता है, वहीं वह मौका पाते ही फुर्र हो जाते हैं। ऐसे पुलिसकर्मियों पर नजर रखने के लिए एसएसपी दीपक कुमार ने एएसपी पश्चिमी विकास चंद्र त्रिपाठी के नेतृत्व में एक टीम गठित कर दी है। टीम में छह पुलिसकर्मियों को रखा गया है। पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में कोर्ट परिसर और उसके आसपास बंदियों व उन पुलिसकर्मियों पर नजर रखेंगे, जिनकी अभिरक्षा में बंदी को भेजा जाएगा।

बर्खास्त होंगे दोषी पुलिसकर्मी

बंदियों को पेशी पर लाने के दौरान सुविधाएं मुहैया करवाने और ड्यूटी में लापरवाही साबित होने पर पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी भी हो सकती है। पकड़े जाते ही उनको सस्पेंड किया जाएगा। उसके बाद एएसपी व एसएसपी की रिपोर्ट पर आईजी रेंज दोषी पुलिसकर्मी की बर्खास्तगी की प्रक्रिया भी शुरू करवाएंगे। एसएसपी ने जिला जेल के अधिकारियों को भी बंदियों को पेशी पर भेजने के दौरान सतर्कता बरतने के लिए पत्र भेज दिया है।

ये है पेशी करवाने का नियम

जिला जेल में बंद बंदियों को पेशी पर ले जाने के लिए पुलिस लाइंस से पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है। सामान्य बंदियों को एक पुलिसकर्मी जेल से लेकर कोर्ट पहुंचता है। उसे सेशन लॉकअप या लोअर लॉकअप में दाखिल करता है। वहां से संबंधित कोर्ट में पेशी करवाकर उसे वापस लॉकअप में भेज दिया जाता है। जेल की गाड़ी रवाना होते समय गिनती के बाद बंदी को वाहन से जेल रवाना किया जाता है। शातिर बंदियों को पेशी करवाने के लिए एक से अधिक कांस्टेबल या एक एसआई व कांस्टेबल की निगरानी में भेजा जाता है।

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