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कैग रिपोर्ट में बिजली प्रणाली पर बड़े सवाल, पावर कॉर्पोरेशन का 18 करोड़ से ज्यादा का नुकसान

रिपोर्ट में बिलिंग एजेंसियों को टेंडर दिए जाने की प्रक्रिया से लेकर कंसल्टेंट की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। ये टेंडर 2015 में किए गए थे। दोनों बिलिंग प्रणालियों में उपभोक्ताओं को गलत श्रेणी में रखने के कारण पावर कॉरपोरेशन का भारी नुकसान हुआ है

नवभारत टाइम्स 18 Dec 2021, 1:09 pm
लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम pjimage (7)
प्रतीकात्मक तस्वीर

ग्रामीण और शहरी इलाकों में चल रही पुरानी बिजली बिलिंग प्रणाली पर सीएजी रिपोर्ट में सवाल खड़े किए गए हैं। रिपोर्ट में बिलिंग एजेंसियों को टेंडर दिए जाने की प्रक्रिया से लेकर कंसल्टेंट की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। ये टेंडर 2015 में किए गए थे। दोनों बिलिंग प्रणालियों में उपभोक्ताओं को गलत श्रेणी में रखने के कारण पावर कॉरपोरेशन को 18 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक शहरी क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को गलत श्रेणी में डालने की वजह से 16.60 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में 1.41 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। पूरे प्रदेश में ऐसे 3,569 मामले सीएजी को मिले हैं।

एजेंसियों को कर दिया ज्यादा भुगतान
सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक बिजली कंपनियों ने बिलिंग एजेंसियों को 2.15 करोड़ रुपये का अधिक भुगतान कर दिया। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ने 99.24 लाख रुपये, मध्यांचल ने 40 लाख, दक्षिणांचल ने 52 लाख और पश्चिमांचल ने 23 लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। सीएजी ने बिलिंग एजेंसियों की सिक्यॉरिटी पर भी सवाल खड़े किए हैं। कई इंजिनियरों के रिटायर होने या उनकी मृत्यु के बाद भी उनके लॉग-इन का इस्तेमाल होता रहा।

गठन से पहले ही दे दिया कनेक्शन

सीएजी रिपोर्ट में पावर कॉरपोरेशन की कार्य प्रणाली पर बड़ा सवाल उठाया गया है। कहा गया है कि बिलिंग में 244 ऐसे प्रकरण थे, जिनमें संयोजन की तिथियां भविष्य की थीं। इसके अलावा पावर कॉरपोरेशन के रेकॉर्ड में करीब 8.57 लाख ऐसे कनेक्शन भी हैं, जो उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड की स्थापना से पहले ही दे किए गए थे। ऐसा बिलिंग में गलत एंट्री के कारण हुआ।

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