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बिना जरूरत खरीद लिए 10 माइक्रोस्कोप, अब धूल फांक रहे

केजीएमयू के डॉक्टरों ने एक भी माइक्रोस्कोप की जरूरत नहीं बताई। इसके बावजूद अधिकारियों ने करोड़ों रुपये के 10 माइक्रोस्कोप खरीद लिए गए। विभागीय जांच में पता चला कि कमिशनखोरी के लिए अधिकारियों ने ये मशीनें खरीदी थीं। तब से ये मशीनें धूल फांक रही थीं। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद इन मशीनों को जबरन किसी न किसी विभाग में भेजा जा रहा है।

नवभारत टाइम्स 29 Jul 2017, 3:32 am
सारिका जायसवाल, लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम kgmu
किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ

केजीएमयू के डॉक्टरों ने एक भी माइक्रोस्कोप की जरूरत नहीं बताई। इसके बावजूद अधिकारियों ने करोड़ों रुपये के 10 माइक्रोस्कोप खरीद लिए गए। विभागीय जांच में पता चला कि कमिशनखोरी के लिए अधिकारियों ने ये मशीनें खरीदी थीं। तब से ये मशीनें धूल फांक रही थीं। अब जांच रिपोर्ट आने के बाद इन मशीनों को जबरन किसी न किसी विभाग में भेजा जा रहा है।

केजीएमयू में पिछले साल खरीदे गए उपकरणों की फाइलें खुलने लगी है। इसमें पता चला कि पिछले साल तत्कालीन कुलपति प्रफेसर रविकांत ने इंस्टिट्यूट ऑफ स्किल डिवेलपमेंट प्रोग्राम के लिए 10 करोड़ रुपये के 10 माइक्रोस्कोप खरीदे थे। उस समय भी इतनी बड़ी संख्या में खरीदे जा रहे उपकरणों पर सवाल उठे थे, लेकिन मामले को दबा दिया गया। इस बीच नए कुलपति ने बीते सालों में हुई सभी संदिग्ध खरीद-फरोख्त की जांच के आदेश दे दिए। जांच रिपोर्ट आ गई है। इसकी भनक लगते ही संस्थान के डॉक्टरों और पिछले कुलपति के करीबी अधिकारियों में खलबली मच गई है। सूत्रों ने बताया कि कुलपति एम.एल.बी. भट्ट ने प्रशासनिक अधिकारियों समेत ट्रेनिंग प्रोग्राम के हेड डॉ. विनोद जैन के साथ बैठक की। इसके बाद हुई विभागीय जांच में सामने आया कि ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए बने प्रस्ताव में एक भी माइक्रोस्कोप की मांग नहीं की गई थी। इसके बावजूद माइक्रोस्कोप मंगवा लिए गए।

दवाओं के बजट से खरीदे माइक्रोस्कोप
केजीएमयू में वर्ष 2016-17 के लिए 254 करोड़ का बजट दवा, सर्जिकल आइटम, बिजली का बिल और उपकरण खरीदने के लिए आया था। जांच में पता चला कि दवाओं के बजट से माइक्रोस्कोप की रकम का भुगतान किया गया है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में निर्णय लिया गया है कि ट्रेनिंग प्रोग्राम में दो माइक्रोस्कोप दिए जाएंगे, बाकि माइक्रोस्कोप को दूसरे विभागों में दे दिया जाएगा। इसके बाद इन माइक्रोस्कोप की गुणवत्ता को जांचने का कार्य शुरू हो गया है।

अब भी दवाओं की कमी
पिछले साल से केजीएमयू में दवाओं और सर्जिकल आइटम की कमी बनी हुई है। इसकी शिकायत तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव से भी की गई थी। कई दिन तक मरीजों को जरूरत की दवाएं तक नहीं मिल सकी थीं। बाद में दबाव बढ़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने उधार पर दवाएं मंगवाई थी। यही हालात अब भी हैं। मरीजों के लिए जीवनरक्षक दवाएं और सर्जिकल आइटम खरीदने के लिए बजट नहीं है। ऐसे में तीमारदार बाहर से दवाएं खरीदकर ला रहे हैं।

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