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'लोकभाषाओं के बिना हिंदी की समृद्धि अधूरी'

भारतीय भाषा मंच नई दिल्ली की विचार गोष्ठी में बोले वक्ताएनबीटी, लखनऊ : सभी क्षेत्रीय भाषाओं विकास आवश्यक है। ये भाषाएं हिंदी की सहोदर हैं। लोक ...

नवभारत टाइम्स 24 Apr 2017, 5:33 am

लखनऊ

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'लोकभाषाओं के बिना हिंदी की समृद्धि अधूरी'

सभी क्षेत्रीय भाषाओं विकास आवश्यक है। ये भाषाएं हिंदी की सहोदर हैं। लोक भाषाओं से ही हिंदी को बढ़ावा और समृद्धि मिलेगी। यह बात छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक ने हिंदी संस्थान में रविवार को कहीं।

भारतीय भाषा मंच नई दिल्ली की 'हिंदी का वैश्विक संदर्भ समस्याएं और समाधान' पर आयोजित विचार गोष्ठी में डॉ. विनय बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थे। वहीं, राज्यपाल के विधि सलाहकार श्याम शंकर उपाध्याय ने कहा कि रोजगार से जोड़े बिना हिंदी का विकास अधूरा है। विदेशों में हिंदी का प्रयोग धड़ल्ले से होता है, जबकि भारत में हिंदी की उतनी कद्र नहीं। इस मौके पर बतौर विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. सुरजीत सिंह डंग और भारतीय भाषा संस्थान नई दिल्ली के राष्ट्रीय संयोजक प्रो. वृषभ प्रसाद जैन समेत कई साहित्यकार भी मौजूद रहे।

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