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Black fugus: लखनऊ में ब्लैक फंगस के केस पहुंचे 321, सहमे लोग बिना वजह करा रहे जांच, डॉक्टरों ने दी यह सलाह

लखनऊ के पीजीआई, केजीएमयू और लोहिया संस्थान के बाद अब सिविल अस्पताल में भी ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज हो सकेगा। अस्पताल प्रशासन ने इसका पूरा खाका तैयार उत्तर प्रदेश शासन को रिपोर्ट भेजी है।

नवभारत टाइम्स 30 May 2021, 11:13 am
लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम Ajmer: Doctors perform surgery on a patient infected with Black and White Fungus...
फाइल फोटो

लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती ब्लैक फंगस के मरीजों का आंकड़ा शनिवार को 200 पार हो गया। शहर में शनिवार को ब्लैक फंगस के 18 नए मरीज मिले। इनमें 13 मरीज केजीएमयू में तो चार पीजीआई और एक मरीज लोहिया संस्थान में भर्ती किया गया है। इस तरह केजीएमयू में भर्ती मरीजों की संख्या 207 हो गई।

शहर के अस्पतालों में अब तक ब्लैक फंगस के 321 मरीज भर्ती हुए हैं। इलाज के दौरान इनमें 32 की मौत हो चुकी है। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि यहां पिछले 24 घंटों में डॉक्टरों ने टीम ने 14 मरीजों के ऑपरेशन किए।

पीजीआई में अब तक 42 मरीज आए
पीजीआई में दो मरीजों का ऑपरेशन हुआ और तबीयत में सुधार के बाद एक मरीज को डिस्चार्ज किया गया। यहां कुल 42 मरीज भर्ती किए जा चुके हैं। इसी तरह लोहिया संस्थान में एक मरीज भर्ती किया गया तो दो मरीज डिस्चार्ज किए गए। प्रवक्ता डॉ. श्रीकेश सिंह ने बताया कि यहां अब तक 27 मरीज भर्ती कराए जा चुके हैं।

सिविल में भी ब्लैक फंगस का इलाज
पीजीआई, केजीएमयू और लोहिया संस्थान के बाद अब सिविल अस्पताल में भी ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज हो सकेगा। अस्पताल प्रशासन ने इसका पूरा खाका तैयार शासन को रिपोर्ट भेजी है। शासन से मंजूरी मिलते ही यहां मरीज भर्ती किए जाने लगेंगे। फिलहाल ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए अस्पताल में ईएनटी और नेत्र रोग विभाग की ओटी रिजर्व कर ली गई है। अस्पताल के निदेशक डॉ. सुभाष ने बताया कि मरीजों की स्क्रीनिंग के साथ यहां सर्जरी भी की जाएगी। इसके लिए ईएनटी और नेत्र रोग विशेषज्ञों की ड्यूटी भी तय कर दी गई है।

आशंका पर जांच करवा रहे लोग
शहर में बहुतेरे लोग ऐसे हैं, जो ब्लैक फंगस की आशंका पर तरह-तरह की जांचें करवा रहे हैं। असल में सिर्फ कंट्रास्ट एमआरआई, मुंह के स्वैब की कल्चर रिपोर्ट या इंडोस्कोपी से ही इसका पता चल सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर मरीज कोरोना संक्रमित है तो एमआरआई और स्वैब कल्चर करवाया जाता है।

डॉक्टर की सलाह पर ही करवाएं जांच
पीजीआई के डॉ. अमित केसरी ने बताया कि इनमें कोई भी जांच डॉक्टरी सलाह के बिना नहीं करवाई जा सकती। हो सकता है, लोगों को जो लक्षण ब्लैक फंगस के लग रहे हों, वे सामान्य बीमारी के हों। ऐसे में लक्षण देखने के बाद ही डॉक्टर लिखेगा कि जांच करवानी है या नहीं।

इन जांचों से पकड़ में आता है ब्लैक फंगस
रेडियॉलजिकल जांच: इसमें कंट्रास्ट एमआरआई करवाई जाती है। यह सामान्य एमआरआई से अलग है। इसमें शरीर की ब्लड सप्लाई दिख जाती है। जहां ब्लड सप्लाई नहीं होती, वहां एमआरआई में डार्क हो जाता है। इससे डॉक्टर अंदाजा लगा लेते हैं कि यहां फंगस है।
माइक्रोबायॉलजिकल जांच: यह ज्यादा कारगर है। इसमें मुंह के स्वैब की लैब कल्चर रिपोर्ट से फंगस का पता किया जाता है।
क्लीनिकल जांच: इसमें डॉक्टर मरीज की इंडोस्कोपी कर फंगस का पता लगाते हैं।

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