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यूपी सरकार की तरफ से म‍िल्‍क पार्लर के ल‍िए 50 हजार रुपये की म‍िलेगी मदद

दुग्ध उत्पादन और इससे जुड़े उत्पादों के विक्रय, भंडारण सहित दूसरे व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए योगी सरकार सुविधाओं का दायरा बढ़ाएगी। सरकार की नजर इसके जरिए स्वरोजगार और किसानों की आय दोनों बढ़ाने पर है।

प्रेम शंकर मिश्रा | नवभारत टाइम्स 25 Jun 2018, 8:57 am
लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम सांकेत‍िक तस्‍वीर
सांकेत‍िक तस्‍वीर

दुग्ध उत्पादन और इससे जुड़े उत्पादों के विक्रय, भंडारण सहित दूसरे व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए योगी सरकार सुविधाओं का दायरा बढ़ाएगी। सरकार की नजर इसके जरिए स्वरोजगार और किसानों की आय दोनों बढ़ाने पर है। नई दुग्ध नियमावली में युवाओं को मिल्क पार्लर खोलने के लिए 50 हजार रुपये तक की सहायता देने का प्रस्ताव किया गया है।

मई के आखिर में मुख्यमंत्री योगी के समक्ष दुग्ध विकास विभाग ने यूपी दुग्ध नियमावली में प्रस्तावित संशोधनों पर प्रेजेंटेशन दिया था। इसमें दुग्ध उत्पादकों से लेकर वितरकों तक के लिए कई सहूलियत का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री की सैद्धांतिक सहमति के बाद इसे अमलीजामा पहनाने पर काम शुरू कर दिया गया है।

कलेक्शन सेंटर पर भी मिलेगी मदद

प्रस्तावित नियमावली में संशोधन के जरिए राज्य दुग्ध परिषद को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से सक्षम बनाने की तैयारी है। दुग्ध उत्पादकों के लिए मिल्क कलेक्शन सेंटर बनाने में भी सरकार आर्थिक मदद करेगी। वहीं, सभी नगर निगमों और पांच लाख से अधिक आबादी वाली नगर पालिकाओं में मिल्क पॉर्लर खोलने को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। मल्टी ब्रैंड दूध और दूध उत्पादों को बेचने के लिए अगर कोई मिल्क पॉर्लर खोलता है तो उसे कुल लागत का 25% या अधिकतम 50 हजार रुपये तक की सहायता दी जाएगी। वहीं, मिलावट रोकने और गुणवत्ता बेहतर करने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम भी दुरुस्त किया जाएगा। इसके तहत विभाग के क्षेत्रस्तरीय दुग्ध निरीक्षकों को बाइक खरीदने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।

दुग्ध उत्पादकों का होगा दुर्घटना बीमा
सरकार की मंशा दुग्ध उत्पादकों को दुर्घटना बीमा उपलब्ध करवाने की भी है। अगर लाभार्थी सरकार की किसी अन्य योजना में बीमित नहीं है तो उसे पांच लाख रुपये का दुर्घटना बीमा का लाभ दिया जाएगा। दैवीय आपदाओं के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। दुग्ध उद्योग को सुव्यवस्थित करने के लिए सहकारी दुग्ध उत्पादक समितियों का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। दुग्ध प्रस्संकरण से जुड़ी इकाईयों को भी इसकी परिभाषा में शामिल किया गया है। मिल्क कलेक्शन सेंटर, दुग्ध व्यवसायी जैसे टर्म भी बेहतर ढंग से परिभाषित किए जाएंगे, जिससे आसानी से उन्हें योजनाओं के दायरे में लाया जा सके।

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