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UP: निजी कंपनियों के पास बंधक है 41 हजार एकड़ जमीन

यूपी में पिछली सरकारों ने हाइटेक और इंटीग्रेटेड टाउनशिप के नाम पर जिन निजी कंपनियों को लाइसेंस दिया, उन्होंने करीब 10 साल बाद भी काम पूरा नहीं करवाया है। यही नहीं प्रदेश भर में कई निजी कंपनियों के पास करीब 41 हजार एकड़ जमीन विकास की आस में बंधक पड़ी है।

रणविजय सिंह | नवभारत टाइम्स 30 Jan 2018, 1:22 am
लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम सांकेतिक तस्‍वीर
सांकेतिक तस्वीर

यूपी में पिछली सरकारों ने हाइटेक और इंटीग्रेटेड टाउनशिप के नाम पर जिन निजी कंपनियों को लाइसेंस दिया, उन्होंने करीब 10 साल बाद भी काम पूरा नहीं करवाया है। यही नहीं प्रदेश भर में कई निजी कंपनियों के पास करीब 41 हजार एकड़ जमीन विकास की आस में बंधक पड़ी है। इस बीच एलडीए के वसंत कुंज और मोहान रोड योजना का काम निजी हाथों में देने के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं।

एलडीए कर्मचारी संघ के अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह के मुताबिक निजी कंपनियों को विकास कार्य का जिम्मा दिया जाना किसी भी कीमत पर फायदे का सौदा नहीं होगा। आवास बंधु की तरफ से शासन को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक लखनऊ के करीब सात हजार किसानों की हजारों एकड़ जमीन निजी डिवेलपरों के पास बंधक हैं।

अधिकारियों के मुताबिक टाउनशिप का लाइसेंस पाने के बाद कुछ कंपनियों ने एक इंच जमीन भी नहीं खरीदी, जबकि उन्हें 1784 एकड़ जमीन का लाइसेंस मिला था। शहीद पथ के पास हजारों एकड़ जमीन लेने वाले निजी डिवेलपरों ने गरीब और मध्यम वर्ग को सस्ते मकान मुहैया कराने के नाम पर जमीन दी गई।

हालांकि आंकड़ों के मुताबिक लक्ष्य के 10 फीसदी भी ईडब्लूएस और एलआईजी मकान नहीं बने। किसान नेता हरनाम सिंह वर्मा ने निजी डिवेलपरों को फायदा पहुंचाने वाली नीतियां बनाने का आरोप लगाते हुए विरोध की चेतावनी दी है।

लाइसेंस लेकर बैठ गए बिल्डर
लखनऊ की तरह प्रदेश के आठ शहरों में हाइटेक टाउनशिप के नाम पर 35 हजार 487 एकड़ और इंटीग्रेटेड टाउनशिप के नाम पर 5 हजार 488 एकड़ जमीन डिवेलपरों को आवंटित की गईं। आवासीय योजना लाने का लाइसेंस पाने के बाद डिवेलपर अब तक नौ हजार एकड़ जमीन ही खरीद सके हैं। हाइटेक टाउनशिप के लिए खरीदी गई जमीनों का शासन को भेजा गया ब्योरा खुद इसकी पुष्टि करता है।
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रणविजय सिंह

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