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FAQ on Plasma Donation: एक शख्स कितनी बार कर सकता है प्लाज्मा डोनेट? यहां पढ़िए सारे सवालों के जवाब

प्लाज्मा डोनेशन समय की जरूरत है। कोविड से ठीक हो चुके लोग अगर प्लाज्मा देने योग्य हैं तो वह डोनेशन के लिए आगे आएं। अगर उनके मन में प्लाज्मा दान से जुड़े कोई सवाल हैं यह स्टोरी है आपके लिए-

Written byशेफाली श्रीवास्तव | नवभारतटाइम्स.कॉम 12 May 2021, 3:54 pm
लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम Image representative
सांकेतिक तस्वीर

कोरोना संकट के इस दौर में ऑक्सिजन और बेड के साथ-साथ प्लाज्मा की भी किल्लत देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर आए दिन तमाम ऐसे पोस्ट देखने को मिलते हैं जहां लोग अपनों या अंजान के लिए प्लाज्मा की मदद मांग कर रहे हैं। डॉक्टर भी प्लाज्मा डोनेशन के लिए अपील कर रहे हैं। हालांक कुछ के मन में प्लाज्मा डोनेशन को लेकर डर और सवाल भी हैं जिनके जवाब दिए लखनऊ स्थित केजीएमयू के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन डिपार्टमेंट की हेड डॉ. तूलिका चंद्रा ने। डॉ. तूलिका ने बताया कि कोविड से ठीक हो चुके केवल 50 फीसदी लोगों में ही इसके अगेंस्ट ऐंटीबॉडीज मौजूद होती हैं, ऐसे में काफी ज्यादा लोगों को प्लाज्मा दान के लिए आगे आना चाहिए।
  1. कोविड प्लाज्मा क्या होता है और इस वक्त इसे जरूरी क्यों बताया जा रहा है?
    जब कोई व्यक्ति कोविड से संक्रमित होने के बाद ठीक हो जाता है तो उसके शरीर में कोविड के अगेंस्ट ऐंटीबॉडीज बनती हैं जो उसको थोड़े समय के लिए प्रतिरोधक क्षमता देती है। ये कोविड की ऐंटीबॉडी ही जो प्लाज्मा में होती है, इसे कोविड प्लाज्मा कहते हैं। ये ऐंटीबॉटीज वायरस को खत्म करने में सक्षम होती हैं इसलिए अगर यह प्लाज्मा किसी दूसरे कोविड मरीज को दिया जाता तो वह उसके लिए जीवनदायी हो जाता है।
  2. प्लाज्मा किसे दिया जा सकता है, प्राप्तकर्ता के लिए क्या मापदंड है?
    प्लाज्मा उस मरीज को देते हैं जो कोरोना से संक्रमित हो और आरटी पीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव हो। वायरस एक ऐंटीजन होता है जो शरीर को अंदर से डैमेज करता है। 95 फीसदी मरीज कोविड से अपने आप ठीक हो जाते हैं लेकिन किसी-किसी में यह वायरस सक्रिय बना रहता है। तब हमें ऐंटीबॉडीज युक्त प्लाज्मा की जरूरत होती है। ये ऐंटीबॉडीज उस ऐंटीजन (कोविड वायरस) से लड़ाई करके उसे खत्म कर देता है और वायरस को आगे बढ़ने से रोकता है। इसके अलावा जिनमें कोरोना संक्रमण हल्का- मध्यम या मध्यम-गंभीर स्टेज में होता है उन्हें ही प्लाज्मा की जरूरत होती है। रिकवरी स्टेज में प्लाज्मा नहीं दिया जाता है।
  3. क्या प्लाज्मा थेरपी से कोरोना के गंभीर मरीजों की भी मदद हो सकती है ?
    यह एक ऑफ लेवल थैरपी है यानी कि एक्सपेरिमेंटल थेरपी। 100 फीसदी तो नहीं कह सकते हैं लेकिन बहुत सारे कोरोना के गंभीर मरीज जिन्हें प्लाज्मा थेरपी दी गई, वो उनसे रिकवर हुए हैं और उनकी जान बच गई है।
  4. कौन प्लाज्मा डोनेट कर सकता है और कौन नहीं करता है?
    प्लाज्मा वही डोनेट कर सकता है जिसकी उम्र 18 से 60 के बीच हो और वजन 50 किलो से ज्यादा हो। उसे कोई गंभीर रोग जैसे थाइरॉइड, एपिलेप्सी, अस्थमा वगैरह न हो। ब्लड प्रेशर के मरीज हैं तो वह कंट्रोल मे हो। और 3 महीने से उसने कोई दवा न बदली हो। अगर डायबिटीज के मरीज हैं और दवाई के जरिए इलाज ले रहे हैं तो उनकी उस दिन की ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन रिपोर्ट से शुगर लेवल देखा जाएगा। अगर रिपोर्ट ठीक है तो प्लाज्मा दे सकते हैं। अगर डायबिटिक मरीज इंसुलिन लेते हैं तो प्लाज्मा डोनेट नहीं दे सकते। जो महिलाएं कभी मां बनी हैं वह प्लाज्मा नहीं दे सकती हैं। प्लाज्मा डोनेशन के लिए सबसे बड़ा मापदंड है कि डोनर कोरोना से ठीक हो चुका हो। इसके अलावा कोरोना संक्रमित होने के दिन से लेकर 28 दिन बाद और चार महीने के अंदर प्लाज्मा डोनेट किया जा सकता है।
  5. एक डोनर कितनी बार प्लाज्मा डोनेट कर जा सकता है और कितनी मात्रा में?
    प्लाज्मा डोनेशन प्लाज्मा फेरसिस की विधि से होता है जिसमें एक मशीन में 1500 लीटर ब्लड सर्कुलेट करता है। यह एक-डेढ़ घंटे की प्रक्रिया होती है। एक हाथ से ब्लड निकलता है, मशीन में जाता है जिसमें से ऐंटीबॉडी युक्त प्लाज्मा निकाल लिया जाता है और बाकी ब्लड उसके शरीर में वापस चला जाता है। 200 से 400 मिली के आसपास प्लाज्मा निकाला जाता है। यह पूरी तरह से सुरक्षित विधि होती है, किसी तरह के संक्रमण की संभावना नहीं होती है।
  6. प्लाज्मा डोनेट करने से पहले क्या चीजें ध्यान में रखी चाहिए?
    खाली पेट न जाएं, कुछ खाकर जाए। साथ में अपनी आरटीपीसीआर रिपोर्ट लेकर जाएं। सारी बातें सत्यता के साथ बताए। जहां उनके ब्लड में ऐंटीबॉडी टेस्ट की जाएंगी। सारे टेस्ट होंगे, जब आप पूरी तरह से फिट होंगे और प्लाज्मा में ऐंटीबॉटीज मौजूद होंगी तभी आपका प्लाज्मा लिया जाएगा। प्राइवेट लैब में जाकर अपनी ऐंटीबॉडी चेक न कराएं, क्योंकि रक्त में अलग-अलग तरह की ऐंटीबॉडीज होती हैं जो केवल ब्लड बैंक में चेक किया जा सकता है क्योंकि उसे प्लाज्मा निकालकर किसी मरीज को देना है। इसलिए प्लाज्मा की गुणवत्ता देखना ब्लड बैंक की कानूनी जिम्मेदारी है और यह जांच पूरी तरह से मुफ्त होती है।
  7. प्लाज्मा डोनेशन के लिए क्या प्रक्रिया होती है? कितना समय लगता है?
    ये ब्लड डोनेशन से अलग होता है। रक्त दान चार-पांच मिनट में हो जाता है लेकिन इसके लिए समय लेकर आइए। एक- डेढ़ घंटे में तो केवल प्रक्रिया होती है, उससे पहले स्क्रीनिंग भी होती है। जब भी जाइए तो डेढ़ दो घंटे का समय लेकर जरूर जाइए।
  8. प्लाज्मा डोनेशन के बाद क्या सावधानी रखनी चाहिए? कितने दिन में इसकी भरपाई होती है?
    प्लाज्मा डोनेशन के बाद आपको रिफ्रेशमेंट मिलते हैं, जिससे 15-20 मिनट के लिए वहां रुके रहते हैं। घर जाकर पानी पीजिए। तीन चार घंटे लिक्विड डाइट पर रहिए। स्मोकिंग बिल्कुल न करें। अगर आज प्लाज्मा डोनेट करते हैं तो 14 दिन बाद दोबारा प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं। 14 दिन में प्लाज्मा की भरपाई हो जाती है।
  9. क्या प्लाज्मा डोनेशन के दौरान कोविड संक्रमित होने का खतरा होता है?
    ब्लड बैंक में केवल हेल्दी लोग आते हैं, बीमारी से पीड़ित लोग नहीं इसलिए संक्रमण का कोई खतरा नहीं होता है। यहां सारे कोविड गाइडलाइन का पालन कराया जाता है। कुछ लोग इस डर से भी आगे नहीं आ रहे हैं कि प्लाज्मा डोनेट करने से उनके शरीर की ऐंटीबॉडी खत्म हो जाएंगी। ये बहुत बड़ा भ्रम है क्योंकि तीन-चार महीने बाद स्वत: ऐंटीबॉडी खत्म हो जाती हैं। इसके अलावा 95 फीसदी लोग जो कोविड से ठीक हो रहे हैं उनमें से केवल 50 फीसदी लोगों में ही ऐंटीबॉडीज मिलती हैं। इसलिए बहुत सारे लोगों के आने की जरूरत है।
  10. पीरियड्स के दौरान या वैक्सिनेशन के बाद प्लाज्मा दान किया जा सकता है?
    पीरियड्स में भी प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं, बशर्ते आपका हीमोग्लोबिन 12.5 ग्राम फीसदी से ज्यादा हो और इसकी जांच भी ब्लड बैंक में ही होगी। वैक्सिनेशन के 28 दिन बाद प्लाज्मा डोनेट किया जा सकता है लेकिन शर्त वही है कि डोनर कोरोना से उबर चुका हो। हमें वायरस के अगेंस्ट बनी ऐंटीबॉडीज की जरूरत है न कि वैक्सिनेशन वाली ऐंटीबॉडीज की। ब्लड बैंक में इसकी भी जांच होती है।
लेखक के बारे में
शेफाली श्रीवास्तव
शेफाली श्रीवास्तव सीनियर डिजिटल कॉन्टेट प्रोड्यूसर हैं। दैनिक भास्कर, नवभारत टाइम्स, गांव कनेक्शन और एनबीटी डिजिटल के साथ पत्रकारिता में 9 साल का अनुभव। पॉलिटिक्स से लेकर, स्पोर्ट्स, हेल्थ, वुमन, वाइल्डलाइफ और एंटरटेनमेंट में रुचि। पत्रकारिता में नए प्रयोगों के साथ सीखने की ललक।... और पढ़ें

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