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रिक्शेवाले को अखिलेश से मिला दिवाली गिफ्ट, सीईओ को पहुंचाया था सीएम आवास

रिक्शाचालक मणिराम के लिए गुरुवार का दिन ही दिवाली बनकर आया जब मणिराम अपने रिक्शे से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी आवास 5 कालीदास मार्ग पहुंचे। मणिराम के रिक्शे पर बैठे थे सीईओ विजय शेखर शर्मा जिन्हें यश भारती सम्मान से नवाजा गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया 28 Oct 2016, 9:02 am
स्वाति माथुर, लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम rikshawpuller gets diwali gift from akhilesh drove ceo to cm residence
रिक्शेवाले को अखिलेश से मिला दिवाली गिफ्ट, सीईओ को पहुंचाया था सीएम आवास


दिवाली आने में भले ही अभी दो दिन बाकी हो लेकिन रिक्शाचालक मणिराम के लिए गुरुवार का दिन ही दिवाली बनकर आया जब मणिराम अपने रिक्शे से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी आवास 5 कालीदास मार्ग पहुंचे।

मणिराम के रिक्शे पर बैठी सवारी कोई और नहीं बल्कि paytm के सीईओ विजय शेखर शर्मा थे जिन्हें कुछ देर पहले ही यश भारती सम्मान से नवाजा गया था। विजय शेखर, सीएम अखिलेश यादव से मिलने जा रहे थे लेकिन उनकी कार जबरदस्त ट्रैफिक जाम में फंस गई। ऐसे में सीएम से मिलने के लिए समय पर पहुंचने का उनके पास सिर्फ एक ही रास्ता था- रिक्शा। विजय शेखर, मणिराम के रिक्शे में बैठकर सीएम आवास पहुंचे।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने ट्विटर अकाउंट पर भी इस घटना का जिक्र करते हुए यह तस्वीर शेयर की और लिखा कि ट्रैफिक जाम की वजह से पेटीएम के सीईओ के रिक्शे से सीएम आवास तक आना पड़ा। लखनऊ मेट्रो के शुरू होते ही शहर की ट्रैफिक समस्या हल हो जाएगी।

A traffic jam forced Paytm CEO Vijay Shekhar Sharma to visit us in a cycle rickshaw. Lucknow Metro will help solve the traffic jams in city. pic.twitter.com/SDzZy0mjMX — Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 27, 2016

रायबरेली के तिलोई का रहने वाला मणिराम जब सीएम आवास पहुंचा तो उससे काफी पूछताछ की गई। उसके घर-परिवार और बच्चों के बारे में, वह एक दिन में कितने पैसे कमाता है और लखनऊ में कहां रहता है। 2 घंटे बाद जब मणिराम सीएम आवास से निकला तो वह पहले से ज्यादा अमीर हो चुका था। उसे 6 हजार रुपए नकद मिले, एक नया रिक्शा जो सीएम के निर्देश पर उसे मिला था, उसकी पत्नी के लिए समाजवादी पेंशन, एक ई-रिक्शा और लखनऊ में आवासीय क्वॉर्टर भी।

मणिराम ने बताया, 'मैं कालीदास मार्ग के पास बैठकर ध्रूमपान कर रहा था जब किसी सवारी ने मुझे दूर से आवाज लगाई। मुझे नहीं पता कि वह कौन था। मैंने सोचा था कि मैं उन्हें मुख्यमंत्री आवास के बाहर छोड़ दूंगा लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उन्हें बंगले के अंदर लेकर चलूं। वहीं पर मैंने मुख्यमंत्री अखिलेश भईया को देखा और उन्हें सारी बात बता दी।'

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