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कानपुर शूटआउट: राजभवन के प्रमुख सचिव की ऐंबेस्डर से रौब गांठता था गैंगस्टर विकास दुबे

कानपुर में हुए पुलिस पर हमले के मामले को लेकर पुलिस ने विकास दुबे का लखनऊ स्थिति घर दो बार खंगाला है। उसके घर से राजभवन के प्रमुख सचिव के नाम से पंजीकृत एक ऐंबेस्डर कार भी मिली है।

नवभारत टाइम्स 5 Jul 2020, 10:28 am
लखनऊ/कानपुर
नवभारतटाइम्स.कॉम विकास दुबे
विकास दुबे

कानपुर में पुलिस पर हुए हमले के मामले में विकास दुबे पर शिकंजा कसता जा रहा है। पुलिस की टीम ने शनिवार को दोबारा लखनऊ के कृष्णानगर की इंद्रलोक कॉलोनी में विकास दुबे और उसके भाई दीप प्रकाश के घर की तलाशी ली। पुलिस टीमें सुबह 11 बजे दोनों के घर पहुंचीं। पुलिस ने दीप प्रकाश के घर पर मौजूद परिजनों से लंबी पूछताछ की। विकास की मां सरला देवी से भी दोबारा पूछताछ की गई। वहीं, पुलिस ने दीप प्रकाश की पत्नी अंजली और एक अन्य युवती को लंबी पूछताछ के बाद छोड़ दिया।

सरला देवी ने मीडिया से कहा कि राजनीति में पड़कर विकास बर्बाद हो गया। मीडिया से बात करते हुए वह फफक भी पड़ीं। विकास और दीप के परिवारीजनों बिना पुलिस को सूचना दिए कही न जाने की हिदायत दी गई। मोहल्ले में कुछ लोगों का कहना कि उन्होंने विकास को आखिरी बार करवाचौथ पर देखा था तो कुछ का कहना है कि वह लॉकडाउन से पहले दिखा था।

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वहीं, एलडीए की टीम ने भी शनिवार को विकास और उसके भाई दीप प्रकाश के घर की पैमाइश की। इसके पहले नगर निगम की मदद से विकास के घर में पले दो डॉगी भी पकड़े गए। इनके कारण पुलिस को काम करने में काफी दिक्कत आ रही थी।

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सरकारी गाड़ी नीलाम करने के बाद नीलामी कमिटी उसके कागज गाड़ी खरीदने वाले को सौंप देती है। खरीदार की जिम्मेदारी है कि वह आरटीओ में टैक्स जमा करके गाड़ी अपने नाम ट्रांसफर करवा ले। जब तक गाड़ी के ट्रांसफर का फॉर्म नहीं भरा जाएगा तब तक परिवहन विभाग उस नंबर की गाड़ी में अपनी तरफ से कुछ नहीं कर सकता है। दस्तावेज ट्रांस्फर न करवाने पर रजिस्ट्रेशन के साथ जुर्माने का प्रावधान है।
अनिल कुमार मिश्र, उप परिवहन आयुक्त, लखनऊ परिक्षेत्र

ऐंबेस्डर से रौब गांठने का खेल

पुलिस को दीप प्रकाश के घर से दो ऐंबेस्डर कार जिनके नंबर यूपी 32 बीजी 0156 और यूपी 35 डी 1339 व यूपी 78 एडी 1521 नंबर की बुलेट खड़ी मिली है। परिवारीजनों के पास पेपर न होने के कारण तीनों को सीज कर दिया गया है। आरटीओ से प्राप्त जानकारी के मुताबिक यूपी 32 बीजी 0156 सरकारी ऐंबेस्डर का रजिस्ट्रेशन प्रमुख सचिव, राज्यपाल के नाम पर है। जबकि यूपी 35 डी 1339 ऐंबेस्डर कृष्ण गोपाल दीक्षित के व बुलेट आशुतोष त्रिपाठी के नाम रजिस्टर्ड है। यह रजिस्ट्रेशन नंबर कानपुर से दिखा रहा है।

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यूपी 32 बीजी-0156 नंबर की ऐंबेस्डर 10 मई 2004 को एंबेसडर गाड़ी यूपी 32 बीजी-0156 पंजीकृत करवाई गई थी। 10 साल बाद राजभवन की ओर से यह गाड़ी नीलाम कर दी गई। अफसरों की मानें तो यह गाड़ी विकास दुबे मे भाई ने नीलामी में खरीदी थी। लेकिन 2014 के लेकर आज तक उसने गाड़ी अपने नाम ट्रांसफर नहीं कराई। इसका रजिस्ट्रेशन भी नौ मई 2019 को खत्म हो गया। विकास इसी एंबेसडर कार से नेताओं व अफसरों से मिलने जाता था। जिससे लगता था कि उसे सरकार ने यह गाड़ी दे रखी है।

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