ऐपशहर

महिलाओं को भी मिले तलाक बोलने का हक

- शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने पेश किया मॉडर्न निकाहनामा, अब AIMPLB के फैसले का इंतजार एनबीटी, लखनऊ : तीन तलाक को लेकर देश में छिड़ी बहस के बीच आल ...

नवभारतटाइम्स.कॉम 10 Sep 2016, 6:30 am

- शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने पेश किया मॉडर्न निकाहनामा, अब AIMPLB के फैसले का इंतजार

एनबीटी, लखनऊ : तीन तलाक को लेकर देश में छिड़ी बहस के बीच आल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने शुक्रवार को मॉडर्न निकाहनामा पेश किया। इसमें महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार दिए जाने और पत्नी को भी तलाक देने का हक देने की शर्त रखी गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि शादी के लिए गवाह की जरूरत नहीं होगी, लेकिन तलाक के लिए गवाहों का होना बेहद जरूरी है।

शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने शुक्रवार को यूनिटी कॉलेज में एक कार्यक्रम के दौरान मॉडर्न निकाहनामा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष डॉ. कल्बे सादिक को सौंपा। डॉ. सादिक ने इसे मंजूरी देते हुए बोर्ड के अन्य सदस्यों से बातचीत कर लागू करवाने का भरोसा दिया है। इस पर अंतिम फैसला बोर्ड की आने वाली बैठक के बाद लिया जाएगा।

होगी चर्चा : मौलाना कल्बे सादिक ने निकाहनामे के बिंदुओं पर सहमित जताते हुए इस पर चर्चा करवाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि तीन तलाक पर सवाल उठते रहे हैं। वह पहले ही बोर्ड बैठक में अपनी राय रख चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह हिंदुओं में अलग-अलग वर्ग हैं, उसी तरह मुसलमानों में भी हैं। सभी वर्ग को आजादी है कि वे अपने-अपने नियमानुसार चलें, जिस पर दूसरे को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि सुन्नियों में तीन तलाक का रिवाज है, लेकिन शियों में तीन तलाक जैसी कोई प्रथा नहीं है। जब तक महिला तलाक पर राजी नहीं होगी तो तलाक मान्य नहीं होगा।

शिया पर्सनल लॉ बोर्ड का दावा

- महिलाएं दे सकती हैं तलाक : मौलाना यासूब अब्बास के अनुसार, मॉडर्न निकाहनामे में शर्त रखी गई है कि अगर पत्नी चाहे तो वह भी पति को तलाक दे सकती है। यह शर्त निकाह के समय दोनों पक्षों को साफ-साफ बताई जाएगी।

- दो साल तक रिश्ता पूरा न करने पर तलाक : ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें निकाह के बाद लड़का विदेश चला गया या दूसरी वजहों से उसने लड़की की खैरखबर नहीं ली। नए निकाहनामे में लड़कियों को यह हक दिया गया है कि अगर इस तरह से दो साल बीत जाएं तो वे सीधे हाकिम-ए-शरा (मौलाना) के जरिए तलाक ले सकती हैं। अभी यह व्यवस्था नहीं है।

- बराबर हक : मॉर्डन निकाहनामे के अनुसार, केवल पुरुष का तीन बार तलाक कहना ही काफी नहीं होगा। जब तक महिला इसे स्वीकार नहीं करती, तीन तलाक को मान्यता नहीं मिलेगी। यही शर्त तब भी लागू होगी जब पत्नी, पति को तलाक देना चाहे।

- दहेज की मांग पर रोक : मौलाना अब्बास के अनुसार, निकाह के बाद लड़का या उसका परिवार, लड़की या उसके परिवार से कोई मांग नहीं करेगा, यह बात अभी लिखा-पढ़ी में नहीं लाई जाती। इस निकाहनामे में इसकी लिखापढ़ी की शर्त रखी गई है।

- धर्मगुरु आयतुल्लाह अली सिस्तानी ने दी मंजूरी : बताया गया है कि धर्मगुरु आयतुल्लाह अली सिस्तानी ने इस निकाहनामे को 2007 में ही मंजूरी दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने के बाद इसे फिर सामने लाया गया है।

अगला लेख

Metroकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर