ऐपशहर

महिला व दलित उत्पीड़न की सुनवाई के लिए बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट

योगी सरकार महिला उत्पीड़न और दलित उत्पीड़न के मामलों में जल्द फैसले के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाएगी...

दीप सिंह | नवभारत टाइम्स 16 Apr 2017, 4:07 am
लखनऊ
नवभारतटाइम्स.कॉम fast track courts for hearing of women and dalit harassment
महिला व दलित उत्पीड़न की सुनवाई के लिए बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट

योगी सरकार महिला उत्पीड़न और दलित उत्पीड़न के मामलों में जल्द फैसले के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाएगी। महिला उत्पीड़न की सुनवाई के लिए 100 और दलित उत्पीड़न की सुनवाई के लिए 25 फास्ट ट्रैक कोर्ट खोले जाएंगे। विधि एवं न्याय मंत्री ब्रजेश पाठक ने बताया कि इन कोर्ट में जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) स्तर के जजों की तैनाती की जाएगी। खासतौर से महिला उत्पीड़न के मामले में जल्द जांच पूरी करने के लिए 1000 महिला अफसरों की भी तैनाती की जाएगी।

पाठक ने बताया कि मुकदमों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण न्यायालयों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस वजह से महिला उत्पीड़न और दलित उत्पीड़न के मामलों में भी 10-10 साल तक मुकदमे चलते हैं। देर से न्याय मिलना भी अन्याय के बराबर होता है। उन्होंने कहा, 'इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी पार्टी ने विधानसभा चुनाव से पहले अपने लोक कल्याण संकल्प पत्र में महिलाओं और दलितों को जल्द न्याय दिलाने के लिए यह वादा किया था। सरकार ने उसे पूरा करने के प्लान तैयार कर लिया है। इसका प्रस्ताव बनाकर वित्त विभाग को भेज दिया गया है।'

पाठक ने बताया कि प्रस्ताव में जजों, जांच अधिकारियों के अलावा अन्य स्टाफ की भर्तियों और अन्य जरूरी संसाधनों का पूरा ब्योरा भेजा गया है। सभी संसाधनों पर आने वाले खर्च का भी आकलन किया गया है। खर्च पर वित्त विभाग की मंजूरी मिलते ही आगे की कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी।

प्रदेश में 100 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित जाएंगे तथा इनमें 100 एडीजे स्तर के जज तैनात किए जाएंगे। साथ ही इनमें 1000 महिला जांच अधिकारियों के अलावा 1100 अन्य स्टाफ की भर्ती की जाएगी। इन कोर्ट्स को बनाने में 400 करोड़ का खर्च आएगा। वहीं अगर बात करें दलित फास्ट ट्रैक कोर्ट्स की तो प्रदेश में दलितों के लिए कुल 25 फास्ट ट्रैक कोर्ट्स स्थापित किए जाएंगे। इन कोर्ट्स में 25 जजों के साथ-साथ 275 अन्य पदों पर भर्तियां की जाएंगी। दलित फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनाने में 100 करोड़ का खर्च आएगा।

70 साल की उम्र में निधन पर भी सहायता
ब्रजेश पाठक ने बताया कि वकीलों के कल्याण के लिए भी हमारी सरकार काम कर रही है। किसी वकील का निधन होने पर उसके परिवारीजनों को पांच लाख रुपये दिए जाते हैं। अभी तक 60 साल तक की उम्र में निधन होने पर ही यह सहायता राशि दी जाती है। अब यह राशि 70 वर्ष की उम्र तक निधन पर भी उनके परिवार को दी जा सकेगी। अधिवक्ता कल्याण निधि की अधिकतम सीमा डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख करने का भी प्लान है।
लेखक के बारे में
दीप सिंह

अगला लेख

Metroकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर