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UP Cabinet Expansion 2021: चुनाव से पहले योगी का कैबिनेट विस्‍तार, यूपी में बीजेपी का 'कास्‍ट गेम' समझ‍िए

Uttar Pradesh Cabinet Expansion Latest News: अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्‍यनाथ सरकार कैबिनेट का विस्‍तार करने जा रही है। इस मंडिमंडल विस्‍तार में यूपी के जातीय समीकरणों को साधने की पूरी कोशिश होगी।

Curated byदीपक वर्मा | नवभारतटाइम्स.कॉम 26 Sep 2021, 3:45 pm

हाइलाइट्स

  • उत्‍तर प्रदेश कैबिनेट का आज शाम होना है विस्‍तार
  • लखनऊ में हलचल तेज, राज्‍यपाल ने बुलाई मीटिंग
  • कौन-कौन ले सकते हैं शपथ? सात नाम हैं चर्चा में
  • यूपी में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का दांव
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नवभारतटाइम्स.कॉम Yogi-Cabinet
चुनाव से पहले योगी का कैबिनेट विस्‍तार (फाइल फोटो)
लखनऊ
मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ रविवार शाम अपनी कैबिनेट का विस्‍तार करेंगे। राज्‍यपाल आनंदी बेन पटेल को इसकी सूचना दे दी गई है। 2022 विधानसभा चुनाव से पहले कैबिनेट का आकार बढ़ाने को रणनीतिक कदम की तरह देखा जा रहा है। बीजेपी की कोशिश यूपी के जातिगत समीकरणों को बैलेंस करने की होगी। जिन चेहरों के मंत्री बनने की चर्चा है, उनकी जातियां उत्‍तर प्रदेश की राजनीति में अहम जगह रखती हैं। कैबिनेट विस्‍तार के जरिए एक उद्देश्‍य यह भी होगा कि जाति के आधार पर बनी पार्टियों के प्रभाव को कम किया जाए।
किनके मंत्री बनने की है चर्चा?
सूत्रों के अनुसार, राजभवन भेजी गई सूची में जितिन प्रसाद, संगीता बलवंत बिंद, छत्रपाल गंगवार, संजय गोंड, पलटू राम, धर्मवीर प्रजापति, दिनेश खटिक के नाम हैं।

संभावित नाम जाति (जाति समूह)यूपी के मतदाओं में हिस्‍सेदारी
जितिन प्रसादब्राह्मण11%
संगीता बलवंत बिंदओबीसी42-45%
छत्रपाल गंगवारकुर्मी5%
संजय गोंडदलित20-22%
पलटू रामदलित20%
धर्मवीर प्रजापतिओबीसी42-45%
दिनेश खटिकदल‍ित20-22%
एक-एक वोट के लिए जंग क्‍यों है?
यूपी में बड़ी पार्टियों से इतर कम से कम दर्जन भर छोटी पार्टियां भी नतीजों में बड़ा खेल कर सकती हैं। किसी एक जाति में गहरा प्रभाव रखने वाली इन जातियों को बड़ी पार्टियों ने साथ लेना शुरू कर दिया है। पिछले चुनावों के अनुभव बताते हैं कि बेहद कम अंतर से परिणाम बदल जाते हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में कम से कम 8 विजेताओं की जीत का अंतर 1,000 वोट से कम रहा था।

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बीजेपी से ज्‍यादा सपा+बसपा को मिले थे वोट
पिछले चुनाव में सपा को 21.81 प्रतिशत और बसपा को 22.23 प्रतिशत वोट मिले थे। दोनों को मिला दें तो उनका वोट शेयर बीजेपी (39.67 प्रतिशत) से ज्‍यादा था। इसके बावजूद बीजेपी कुल 403 में से 312 सीटें जीतने में कामयाब रही। कांग्रेस के साथ गठबंधन कर उतरी सपा को सिर्फ 47 सीटें मिलीं। बसपा को सिर्फ 19 सीटें। कांग्रेस ने 105 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ सात जीत सकी।

यूपी में सबको चाहिए ब्राह्मणों का साथ
यूपी में ब्राह्मण वोट बैंक पर इस बार हर पार्टी की नजर है। जुलाई में बहुजन समाज पार्टी ने अयोध्‍या में ब्राह्मणों का एक सम्‍मेलन किया था। अगस्‍त में समाजवादी पार्टी ने जिला स्‍तर पर ब्राह्मण सम्‍मेलन करने शुरू किए। जितिन प्रसाद जिस तरह कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए, उसे भी ब्राहाणवाद की राजनीति से जोड़कर देखा गया। हर पार्टी ब्राह्मणों को क्‍यों लुभाना चाहती है, उसकी वजह है। बीजेपी को परंपरागत रूप से अगड़ी जातियों की पार्टी माना जाता रहा है। 2017 के चुनाव में अपने दम पर बहुमत की सरकार बनाने वाली बीजेपी यह ताकत गंवाना नहीं चाहती। पिछले तीन चुनाव में बीजेपी को ब्राह्मणों के समर्थन से 40 प्रतिशत से ज्‍यादा वोट हासिल हुए। जाहिर है बाकी पार्टियां चाहेंगी क‍ि बीजेपी को चौथी बार चुनावी रेस में आगे निकलने से रोका जाए।
लेखक के बारे में
दीपक वर्मा
दीपक वर्मा हिंदी बेल्‍ट में पले-बढ़े पत्रकार हैं। वह फिलहाल नवभारत टाइम्‍स ऑनलाइन में प्रिंसिपल डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। प्रिंट मीडिया में आई नेक्‍स्‍ट-दैनिक जागरण से शुरुआत की। फिर डिजिटल जर्नलिज्म में आए। दीपक मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल, विज्ञान, अपराध समेत तमाम रोचक विषयों पर लिखते हैं।... और पढ़ें

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