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महाराष्ट्र की जेलें पहले से ही हैं कैशलेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार कैशलेस ट्रांजैक्शन की बात दोहरा रहे हैं, पर महाराष्ट्र की जेलें पहले से ही...

नवभारत टाइम्स 3 Dec 2016, 8:30 am

सुनील मेहरोत्रा, मुंबई

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महाराष्ट्र की जेलें पहले से ही हैं कैशलेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार कैशलेस ट्रांजैक्शन की बात दोहरा रहे हैं, पर महाराष्ट्र की जेलें पहले से ही कैशलेस हैं। जेल के अडिशनल डीजी डॉक्टर भूषण उपाध्याय ने एनबीटी को बताया कि महराष्ट्र में 59 जेले हैं। इनमें करीब 30 हजार कैदी हैं। इन कैदियों में दोषी अभियुक्तों और विचाराधीन आरोपियों को हर महीने घर से ढाई हजार रुपये मंगाने की छूट है। यह रुपया मनीआर्डर से मंगवाया जाता है।

दोषी करार दिए जा चुके अभियुक्तों के नाम के अकाउंट खोल दिए गए हैं। मनीऑर्डर से आई रकम उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है। जो विचाराधीन (जिन पर मुकदमा खत्म नहीं हुआ होता है) आरोपी हैं, उनकी मनीऑर्डर से आई रकम जेल के डीडीओ अकाउंट में जमा होती है। विचाराधीन आरोपी के नाम से बैंक अकाउंट नहीं खुलता, क्योंकि उसे कभी भी जमानत पर जेल से छोड़ा जा सकता है।

हर कैदी या विचाराधीन आरोपी को जेल की कैंटीन से कुछ खाने या खरीदने की छूट होती है। कैदियों को इसे खरीदने के लिए नोट नहीं दिए जाते, बल्कि सामान की कीमत के कूपन दिए जाते हैं। इन कूपन का हर महीने हिसाब किया जाता है और कैदी के वास्तविक खातों या विचाराधीन आरोपी के डीडीओ अकाउंट्स से उतना रुपया काट लिया जाता है। बाद में जब कनविक्ट कैदी या विचाराधीन आरोपी जेल से छूटता है, तो उसे उसका बकाया रुपया वापस कर दिया जाता है।

डॉक्टर भूषण उपाध्याय के अनुसार, 8 नवंबर के बाद से जो भी मनीऑर्डर आ रहे हैं, वह नई करंसी में हैं। 8 नवंबर से पहले जो हजार या पांच सौ के पुराने नोट जेल में कैदियों के लिए आए थे, उन्हें बैंकों की मदद से नई करेंसी में एक्सचेंज कर दिया गया है।

कनविक्ट कैदियों को अपने घर से रकम मंगाने के अलावा जेल से भी उनके काम के बदले में पेमेंट होता है। यह पेमेंट उन्हें अलग-अलग दिए गए काम की श्रेणी के हिसाब से 45रुपये से 55 रुपये के हिसाब से रोज मिलता है। मसलन, जब संजय दत्त जेल में बंद थे, तो उन्हें कैरी बैग बनाने का काम दिया गया था। बदले में उन्हें रोज 50 रुपये के हिसाब से पेमेंट किया जाता था, पर यह पेमेंट भी कनविक्ट को सीधे नहीं दिया जाता, उसके अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया जाता है। सजा पूरी करने पर यदि कनविक्ट के अकाउंट में कुछ रुपया बचता था, तो बैंक से निकालकर उसे दे दिया जाता है।

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