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विचाराधीन कैदियों को तोहफा, मिली जेल से घर कॉल करने की सुविधा

महाराष्ट्र जेल प्रशासन ने विचाराधीन कैदियों को बड़ा तोहफा दिया है। फैसला किया गया है कि इस तरह के आरोपी अब जेल में लगे पीसीओ से परिजनों को फोन कर सकेंगे।

नवभारत टाइम्स 14 Oct 2016, 10:50 am

सुनील मेहरोत्रा, मुंबई

नवभारतटाइम्स.कॉम subjudice prisoners can now make a call to their home from jail
विचाराधीन कैदियों को तोहफा, मिली जेल से घर कॉल करने की सुविधा


महाराष्ट्र जेल प्रशासन ने विचाराधीन कैदियों को बड़ा तोहफा दिया है। फैसला किया गया है कि इस तरह के आरोपी अब जेल में लगे पीसीओ से परिजनों को फोन कर सकेंगे। अडिशनल डीजी (जेल) डॉक्टर भूषण उपाध्याय ने गुरुवार को एनबीटी को यह जानकारी दी। उपाध्याय के अनुसार, सतारा में हमने यह सुविधा शुरू भी कर दी है। राज्य की दूसरी जेलों से भी कुछ दिनों में फोन कॉल्स किए जा सकेंगे।

महाराष्ट्र में अभी तक सिर्फ कनविक्टेड कैदियों को ही घर वालों से बात की छूट थी, वह भी महीने में सिर्फ दो बार। पर विचाराधीन (अंडरट्रायल) कैदी परिवार वालों से बात करने के लिए तड़पते ही रहते थे। पर अब से वे भी महीने में चार बार अपने घर फोन कर सकेंगे। अडिशनल डीजी के अनुसार, हर कैदी को एक बार में अधिकतम दस मिनट तक बात करने की छूट होगी।

विचाराधीन कैदियों को जेल प्रशासन को दो नंबर देने पड़ेंगे। जेल कर्मी फिर पुलिस से इन नंबरों का वेरिफिकेशन करवाएंगे, उसी के बाद विचाराधीन कैदी को जेल का पीसीओ इस्तेमाल करने के लिए दिया जाएगा। हर विचाराधीन कैदी को प्रति कॉल का पेमेंट जेल में जमा करना पड़ेगा। कॉल करते वक्त उनके पास कोई न कोई जेल कर्मी भी रहेगा, ताकि आरोपी जेल से किस अन्य अपराध की साजिश की वार्तालाप न कर सके।

उपाध्याय कहते हैं कि हर विचाराधीन व कनविक्टेड आरोपी को घर से प्रतिमाह 2500 रुपये तक मंगाने की छूट है। आरोपी इन्हीं रुपयों से जेल के पीसीओ का बिल भर सकते हैं। अडिशनल डीजी ने स्पष्ट कर दिया कि अंडरवर्ल्ड और टेरर से जुड़े आरोपियों को जेल से किसी भी कीमत पर फोन नहीं करने दिया जाएगा।

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