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मुंबई की तरह ही सिंचाई के लिए भूमिगत पाइप लाइन

राज्य कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में नई जल आपूर्ति नीति के मसौदे को मंजूरी दे दी गई। खेती...

नवभारत टाइम्स 18 May 2016, 3:03 am

मुंबई

नवभारतटाइम्स.कॉम maharashtra cabinet approves underground pipeline for irrigation project
मुंबई की तरह ही सिंचाई के लिए भूमिगत पाइप लाइन

राज्य कैबिनेट की मंगलवार को हुई बैठक में नई जल आपूर्ति नीति के मसौदे को मंजूरी दे दी गई। खेती के लिए पानी की सप्लाई भूमिगत पाइप लाइन से की जाएगी। वर्तमान में बांध से पानी नहर के मार्फत किसानों के खेत तक पानी पहुंचाया जाता है। जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि भूमिगत पाइप लाइन से भूमि अधिग्रहण करने में कोई खर्च नहीं होगा।

पूर्व में भूमि मालिकों को अधिक मुआवजा देने के कारण परियोजना लागतें बढ़ जाती थी। अब ऐसा नहीं होगा। उन्होंने बताया कि पंरपरागत प्रणाली के तहत नहर बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण करना पड़ता है। मुंबई महानगरपालिका महानगर में भूमिगत पाइप लाइन के माध्यम से कई किलोमीटर दूर से पानी लाती है। ऐसे ही किसानों के खेतों में पानी पहुंचाने की योजना सरकार ने बनाई है।

पाइप लाइन डालने से पानी की बरबादी नहीं होगी, पानी का रिसाव नहीं होगा, पानी की चोरी नहीं होगी, पानी का वाष्पीकरण नहीं होगा और महत्वपूर्ण बात यह है कि पानी सीधे खेतों तक पहुंचेगा। राज्य जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नहरों से पानी सप्लाई करने से करीब 50 प्रतिशत पानी बर्बाद चला जाता है।

जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन के अनुसार, महाराष्ट्र में 225 लाख हेक्टेयर में बुआई की जाती है, जिसमें करीब 85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई बांध, नहर, तालाब इत्यादि के माध्यम से की जाती है, जबकि 41 लाख हेक्टेयर की सिंचाई भूगर्भ के पानी से होती है। बाकी बची भूमि की सिंचाई नहीं हो पाती। ऐसे भूभाग की सिंचाई के लिए पानी की पाइप लाइन डालने की योजना है।

जल संपदा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि पाइप लाइन से सिंचाई करने से कई समस्याएं खुद-ब-खुद सुलझ जाएंगी।

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