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अब महाराष्ट्र में उड़ेंगे सी-प्लेन, मिली उड्डयन मंत्रालय की मंजूरी

केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में जलीय हवाई अड्डा यानी वॉटर एयरोड्रम की योजना को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने ट्वीट कर जानकारी दी कि देश के विभिन्न राज्यों में सी-प्लेन के अड्डे बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है।

नवभारत टाइम्स 7 Oct 2018, 10:22 am
मुंबई
नवभारतटाइम्स.कॉम सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र में जलीय हवाई अड्डा यानी वॉटर एयरोड्रम की योजना को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने ट्वीट कर जानकारी दी कि देश के विभिन्न राज्यों में सी-प्लेन के अड्डे बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है। प्रभु का कहना है कि इससे देश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। शुरुआती चरण में देश के 5 राज्यों का चयन सी-प्लेन के लिए किया गया है। ये राज्य हैं- महाराष्ट्र, आेडिशा, गुजरात, आंध्र प्रदेश और असम।

दरअसल, पिछले दिनों भारतीय विमान प्राधिकरण (एएआई) ने राज्य के जल संसाधन विभाग को पत्र लिख कर देश में वॉटर एयरोड्रम बनाने के लिए जगहों की पहचान करने के लिए कहा था। फिलहाल सिर्फ महाराष्ट्र के जल संसाधन विभाग ने भारतीय विमान प्राधिकरण (एएआई) को 3,300 जलाशयों की सूची सौंपी थी।

केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय ने अगस्त में पांच राज्यों में वॉटर एयरोड्रम बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। देश में स्थित विभिन्न जलाशयों की सतह पर सी प्लेन और एंफीबियस विमानों की उड़ान के लिए वॉटर एयरोड्रम बनाए जाएंगे। इसमें महाराष्ट्र, आेडिशा, गुजरात, आंध्र प्रदेश और असम शामिल हैं।

तैयारी में बड़ी कंपनियां
सी-प्लेन क्षेत्र में देश की जानी-मानी कंपनियों- स्पाइसजेट, पवनहंस, महिंद्रा एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड ने रुचि दिखाई है। वहीं, महिंद्रा एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड और वीकिंग एयर लिमिडेट साथ मिलकर टर्बोप्रॉप बना रहे हैं, जिसमें सी-प्लेन भी शामिल हैं। टर्बोप्रॉप पानी में भी चल सकता है, जिसमें 19 यात्रियों को लेकर जाने की क्षमता होती है।

दुर्गम क्षेत्रों में स्पाइजेट अपनी सर्विस शुरू करने वाला है, यह सर्विस 10-14 सीटर एयरक्राफ्ट वाली होगी, जिसमें सी-प्लेन भी शामिल होंगे। ये कंपनियां बड़े पैमाने पर पानी और हवा में उड़नेवाले विमान खरीदने वाली हैं। एंफीबियस विमान का उपयोग आदमी को गंतव्य तक पहुंचाने के अलावा समुद्र में बचाव कार्य, जंगल में लगी आग बुझाने और समुद्र की निगरानी में किया जाता है।

महाराष्ट्र में 60-60 किलोमीटर लंबे बैकवाटर हैं, इसलिए यहां वॉटर्स एयरोड्रम के लिए बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं। विदर्भ, मराठवाडा, कोकण सहित राज्य के करीब 3300 जलाशयों की एक लंबी सूची एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को सौंपी गई थी।

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