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मुंबईकरों का दूर, बीएमसी कर्मियों का भी ध्यान नहीं

बीएमसी में तृतीय वर्ग कर्मचारी सोहम (बदला हुआ नाम) के बेटे को मलेरिया हो गया।

विजय पांडे | नवभारत टाइम्स 11 Aug 2017, 2:21 am
मुंबई
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मुंबईकरों का दूर, बीएमसी कर्मियों का भी ध्यान नहीं

बीएमसी में तृतीय वर्ग कर्मचारी सोहम (बदला हुआ नाम) के बेटे को मलेरिया हो गया। इलाज के दौरान जब इस मध्यमवर्गीय परिवार चलाने वाले बीएमसी कर्मी ने स्वास्थ्य बीमा की याद करते हुए कैशलेस स्कीम का उपयोग करने की कोशिश की तो पता चला कि 31 जुलाई के बाद से इसका नवीनीकरण ही नहीं हो पाया है। जिसके बाद उन्हें पूरा पैसा भर इलाज कराना पड़ा। पेड़, सड़क हादसे में कमियों के उजागर होने के बाद बीएमसी अपने कर्मचारियों के बीमा के मुद्दे पर भी ढुलमुल रवैया अपना रही है।

क्या है दिक्कत
बीएमसी ने अपने कर्मचारियों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य बीमा स्कीम शुरू की थी। जिसमें अप्रैल, 2011 के बाद रिटायर हो चुके और वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों को इसके तहत 5 लाख की बीमा सुविधा उपलब्ध कराई गई थी। 1 अगस्त, 2016 से 31 जुलाई, 2017 तक इसके प्रीमियम के तौर पर 96 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया था। इसके एवज में कर्मचारियों को मेडिकल सुविधाओं के लिए मिलने वाले भत्ते को बंद कर दिया गया था।

बीएमसी के एक अधिकारी ने बताया कि साल के अंत में हमें पता चला कि 100 करोड़ से ज्यादा का दावा हो चुका है जो कि हमारी कल्पना के विपरीत था। इसके पिछली साल भी इसी तरह का मामला हुआ है। ऐसे में हम इस सुविधा पर ही पुनर्विचार कर रहे हैं। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक अन्य अधिकारी ने कहा कि हमारी शर्तें काफी कमजोर थी, जिसका फायदा उठाया गया। कई ने अस्पताल के आरामदायक रूम का लाभ उठाया। आखिर हम जनता के पैसे को इस तरह बर्बाद नहीं कर सकते।
लेखक के बारे में
विजय पांडे
समाज की मूल समस्याओं को सामने लाने के उद्देश्य से मैकेनिकल इंजिनियरिंग की पढ़ाई के बाद विजय पांडेय ने पत्रकारिता में कदम रखा। नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत बतौर रिपोर्टर की। शुरुआत में बिजनेस, इन्फ्रास्ट्रक्चर, हाउसिंग की बीट पर रिपोर्टिंग की। फिर लोकल कॉर्पोरेशन बीएमसी की खबरों को कवर किया। विजय फिलहाल इनपुट इंचार्ज के तौर पर खबरों के समन्वय का काम कर रहे हैं। विषय की गहराई को समझ कर उसकी रिपोर्टिंग करने का विजय को शौक है।... और पढ़ें

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