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महाराष्ट्र में दो कोरोना मरीजों की मौत ने बयां की सरकारी अस्पताल की हकीकत

महाराष्ट्र (Coronavirus in Maharashtra) के जलगांव सिविल अस्पताल (Jalgaon Civil Hospital) में बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां कोरोना पॉजिटिव 80 साल की महिला की लाश अस्पताल के बाथरूम में मिली है, जो कि 2 जून से लापता थी।

भाषा 12 Jun 2020, 6:30 am

हाइलाइट्स

  • महाराष्ट्र में बीते दिनों हुई दो कोरोना मरीजों की मौते ने सरकार अस्पताल की पोल खोलकर रख दी है
  • बुधवार सुबह अस्पताल के बाथरूम में ही पड़ी मिली लापता महिला की लाश
  • वहीं दूसरी मौत वृद्ध महिला की बहु की हुई, जिन्हें आईसीयू में बेड तक नहीं नसीब हुआ
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नवभारतटाइम्स.कॉम प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
मुंबई
महाराष्ट्र के जलगांव जिले में कोरोना वायरस से संक्रमित एक परिवार की दो महिला मरीजों की मौत होने की घटना ने सरकारी अस्पतालों के खराब हालत को उजागर कर दिया है, जो महामारी से निपटने के लिए जूझ रहे हैं। मृतकों में से एक 82 वर्षीय महिला थी जिसका मामला बुधवार को तब सामने आया जब उसके लापता होने की खबर आयी और फिर उसका शव आठ दिनों बाद शौचालय के अंदर पाया गया।
दरअसल बृहस्पतिवार जलगांव शहर की पुलिस ने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ ‘लापरवाही के कारण मौत होने’ का मामला दर्ज किया। 31 मई को अस्पताल में आईसीयू में बिस्तर के इंतजार में दूसरी मरीज, महिला की बहू की मौत हो गई थी। जिलाधिकारी अविनाश धाकने ने बताया कि जलगांव सिविल अस्पताल में कोरोना वायरस कम से कम तीन अन्य रोगियों की मौत हुई थी, जो खराब हालत में टॉयलेट जाते समय बेहोश होकर गिर गए थे, जिसके बाद उनकी मौत हो गई थी।

अस्पताल के कर्मचारियों ने नहीं की मदद
यहां तक कि उस 82 वर्षीय महिला के शरीर में केवल 76 प्रतिशत ऑक्सीजन पाया गया था। उसे या तो बिस्तर पर सुविधा दी जाना चाहिए थी या अस्पताल के कर्मचारियों को शौचालय तक पहुंचने में उसकी मदद करनी चाहिए थी। महिला का पोता पुणे में एक निजी कंपनी में काम करता है। उसके पिता नासिक के एक निजी अस्पताल में भर्ती है और कोरोना वायरस से उबर रहे हैं।

बेड के लिए 6 घंटे करना पड़ा इंतजार
भुसावल के रहने वाले युवक के माता-पिता और उसकी दादी को मई के अंतिम सप्ताह में वायरस से संक्रमित पाया गया था। वह खुद उनसे मिलने नहीं जा सके क्योंकि उनकी पत्नी नौ महीने की गर्भवती है। 31 मई को सांस फूलने की शिकायत के बाद युवक की मां को जलगांव सिविल अस्पताल ले जाया गया था। उसके अनुसार, उसे अस्पताल के प्रवेश क्षेत्र में छह घंटे तक इंतजार करना पड़ा क्योंकि आईसीयू में कोई भी बिस्तर उपलब्ध नहीं था।

वृद्ध महिला की मौत ने खोली कलई
वृद्ध महिला का मामला अधिक चौंकाने वाला था क्योंकि अस्पताल के कर्मचारियों को पता ही नहीं चला कि वह 10 जून तक शौचालय में मृत पड़ी हुई थी। सिविल अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पैरामेडिकल कर्मी कोरोना रोगियों को छुने से डरते हैं। उन्होंने बताया कि इसको लेकर मेडिकल कर्मियों से बहस भी हो चुकी है क्योंकि वे कोरोना रोगियों की सेवा करने के इच्छुक नहीं हैं।

8 दिनों तक सड़ती रही लाश
जिलाधिकारी धाकने ने कहा कि उस मंजिल पर केवल पाँच शौचालय हैं। इसका मतलब है कि अस्पताल से कोई भी कर्मी आठ दिनों तक शौचालय को साफ करने के लिए नहीं गया। एक शौचालय के अंदर से दुर्गंध आने के कारण अन्य रोगियों ने अधिकारियों को इसके बारे में बताया। अस्पताल के डीन डॉ बी एस खैरे को बुधवार देर रात निलंबित कर दिया गया। एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना को लेकर मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।

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