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मुंबई में 8 साल के रोहित को मिला नया जीवन, तीन साल बाद पैरों पर खड़ा हुआ

एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुए और बीते 3 वर्षों से अपंगता का दंश झेल रहे 8 वर्षीय रोहित गहलोत को नवी मुंबई में नया जीवन मिला है। सेल आधारित तकनीक से तीन वर्षों बाद वह दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं।

नवभारत टाइम्स 25 May 2018, 9:25 am
मुंबई
नवभारतटाइम्स.कॉम फाइल फोटो: रोह‍ित
फाइल फोटो: रोह‍ित

एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुए और बीते 3 वर्षों से अपंगता का दंश झेल रहे 8 वर्षीय रोहित गहलोत को नवी मुंबई में नया जीवन मिला है। सेल आधारित तकनीक से सफल उपचार के बाद अब रोहित गहलोत तीन वर्षों बाद दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं।

राजस्थान के जयपुर निवासी रोहित गहलोत और उनका परिवार मई 2015 में कार द्वारा विवाह समारोह में जाते समय एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे। उस दुर्घटना में रोहित के बड़े भाई और दो अन्य रिश्तेदारों की मौत हो गई थी। हादसे में रोहित व उनके माता-पिता बच गए थे, लेकिन रोहित की रीढ़ में गहरी चोट लग गई थी। रोहित को उस समय तत्काल अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था।

डॉक्टरों ने कर दिए थे हाथ खड़े

करीब डेढ़ महीने तक रोहित का बुनियादी इलाज किया गया, बावजूद इसके रोहित अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सके। अथक प्रयास के बाद अंततः डॉक्टरों ने रोहित के परिवार वालों से कह दिया कि अब वह कभी भी बैठने, खड़े होने या चलने में सक्षम नहीं हो पाएंगे।

डॉक्‍टरों ने क‍िया था असफल प्रयास
रोहित अपने कूल्हों और पैरों की संवेदना खो चुके थे। फलस्वरूप रोहित का शौच व मूत्र नियंत्रण भी समाप्त हो चुका था। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद रोहित बिना किसी उपचार के बिस्तर पर ही रहे। रोहित के शरीर के अन्य घाव ठीक तो हो गए थे पर उनका चलना-फिरना बंद हो गया था। जयपुर के डॉक्टरों ने अथक प्रयास किया पर वे रोहित को उनके पैरों पर खड़ा नहीं कर सके।

अब स्कूल जा सकेगा रोहित
बेटे के ठीक होने से बेहद खुश मां पूजा गहलोत ने कहा कि दुर्घटना के बाद में हताश हो गई थी क्योंकि मैंने अपना बड़ा बेटा खोया था व मेरे पति व छोटा बेटा रोहित घायल हो गए थे। रोहित के अपंग हो जाने से मैं बहुत निराश व टूटी हुई थी। पर आखिरकार डॉक्टर प्रदीप महाजन व उनकी टीम के उपचार से मेरा बेटा अब सामान्य जीवन जी सकेगा। अब वह चल भी सकेगा व स्कूल भी जा सकेगा।

हुआ क्रांत‍िकारी सुधार
रोहित के संबंध में डॉक्टर प्रदीप महाजन ने बताया कि बीते डेढ़ महीने के दौरान देखा गया कि मरीज के आंतरिक कूल्हों में संवेदना लौटने लगी है। शुरू में रोहित से पीठ, कूल्हों व पैरों के लिए बुनियादी खिंचाव वाले व्यायाम कराए गए। उसके बाद उसे कैलिपर और वाकर की सहायता से खड़े होने के लिए प्रशिक्षित किया गया। अब मरीज अपनी पीठ को बिना कोई सहारा दिए बैठ सकता है। अब वह कैलिपर का इस्तेमाल कर वॉकर की सहायता से कदम उठा सकता है। अब रोहित स्नायुओं की संवेदना भी महसूस करने लगा है। रोहित के स्वास्थ्य में हो रहे सुधार से उसके परिजन बहुत खुश हैं।

स्टेम सेल उपचार
इस बीच रोहित के परिवार वालों को कहीं से सेल आधारित उपचार के बारे में पता चला और वे रोहित को लेकर नवी मुंबई आ गए। यहां आने के बाद वे डॉक्टर प्रदीप महाजन (रीजनरेटिव मेडिसिन रिसर्चर, अडिगोस स्टेम सेल्स) से मिले तो उन्होंने रोहित के परिजनों को न्यूरो-रिहैबिलिटेशन के साथ सेल आधारित उपचार के तीन सत्र का सुझाव दिया। रीढ़ में स्नायुओं व मांसपेशियों को पहुंचे नुकसान को ठीक करने के लिए रोहित का सेल आधारित उपचार किया गया जो सफल रहा।

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