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Eknath Shinde: खाने की थाली से रोज दो निवाले निकालते हैं शिंदे...महाराष्ट्र के नए सीएम की ये बातें जानते हैं आप?

Maharashtra CM Eknath Shinde एमएमआर यानी मुंबई महानगर क्षेत्र में एकनाथ शिंदे का मजबूत प्रभाव है। इस एमएमआर क्षेत्र में बीजेपी के पास नेता तो हैं, लेकिन शिंदे के तोड़ का कोई नहीं है। एमएमआर में सात बड़ी महानगर पालिकाएं, 60 विधानसभा सीटें और 10 लोकसभा सीटें हैं।

Authored byअभिमन्यु शितोले | Edited byअविनाश पाण्डेय | नवभारत टाइम्स 1 Jul 2022, 12:13 pm

हाइलाइट्स

  • सीएम ही नहीं एक भावुक पिता हैं भी एकनाथ शिंदे
  • अपने दो बच्चों की याद में अब भी दो निवाले निकालते हैं
  • 22 साल पहले बेटे दीपेश और बेटी शुभदा नदी में डूब गए थे
  • महाबलेश्वर से 70 किलोमीटर दूर है शिंदे का गांव दरे
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मुंबई: महाराष्ट्र के नए मुखिया बने एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) अतीत में इतने बड़े सदमे से गुजरे हैं कि आज भी उस दिन को याद कर उनकी आंखें भर आती हैं। लगभग बाइस साल पुरानी घटना है, जब उनकी आंखों के सामने बेटा दीपेश (11) और बेटी शुभदा (7) की एक नदी में डूब कर मौत हो गई थी। इन दोनों बच्चों की याद में वह आज भी भोजन करते समय अपनी थाली से दो निवाले निकालना नहीं भूलते। यह घटना उस वक्त की है, जब शिंदे ने खुद को शिवसेना (Shivsena) की राजनीति में स्थापित कर लिया था। वह परिवार के साथ अपने गांव गए थे। वह नदी पार कर रहे थे कि अचानक नाव पलट गई। देखते ही देखते बेटा दीपेश और बेटी शुभदा इस गहरी नदी में डूब गए।
सियासत से मोहभंद, दिघे की सीख से फिर लौटे
इस हादसे के बाद वह अवसाद में चले गए और उन्होंने राजनीति से दूर होने का फैसला कर लिया। उन्हें इस मनोदशा से उबारने के लिए परिवार, पार्टी और मित्रों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। महीनों तक वह सार्वजनिक जीवन से दूर रहे। लेकिन राजनीति में उनके गुरु और शिवसेना के तत्कालीन ठाणे जिला प्रमुख आनंद दिघे को उन्हें अवसाद से उबारने में कामयाबी मिल गई और धीरे-धीरे वह राजनीति में सक्रिय होने लगे।

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कोयना नदी के तट पर है शिंदे का गांव
शिंदे का पैतृक गांव का नाम है दरे। यह गांव महाराष्ट्र के खूबसूरत हिल स्टेशन महाबलेश्वर से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। दरे गांव कोयना नदी के तट पर बसा है। गांव के लोगों को हाट-बाजार के लिए सड़क मार्ग से 50 किलोमीटर और नाव से 10 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।

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कभी चलाते थे वागले इस्टेट में रिक्शा
शिंदे के उत्थान की कहानी एक मेहनतकश इंसान की कहानी है। उनके पैतृक गांव में पढ़ाई-लिखाई की कोई व्यवस्था नहीं थी, इसलिए वह वहां से ठाणे आ गए थे। ठाणे के मंगला स्कूल में पढ़ाई की। फिर वह ठाणे के वागले इस्टेट इलाके में रिक्शा चलाने लगे। तब उनकी उम्र 18-19 बरस की रही होगी।

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आनंद दिघे लाए थे राजनीति में
उस समय ठाणे में आनंद दिघे का दबदबा था। ठाणे के अधिकांश निम्न और मध्य वर्ग के युवाओं पर उनका अच्छा खासा प्रभाव था। वह ठाणे में शिवसेना के संगठन को मजबूत करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे थे। उन्हें अपने साथ काम करने के लिए साहसी युवाओं की जरूरत थी। इसी दौर में एकनाथ शिंदे उनके संपर्क में आए और शिवसेना से जुड़ गए। इसके साथ ही उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई।

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