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नागरिकता कानून के खिलाफ कार्यक्रम में आदित्य ठाकरे शामिल होंगे या नहीं, शिवसेना ने दिया जवाब

आदित्य ठाकरे नागरिकता कानून विरोधी कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे या नहीं, इस बात की अबतक उनकी ओर से कोई भी पुष्टि नहीं की गई है। यह जानकारी शिवसेना की ओर से दी गई है।

एएनआई 5 Jan 2020, 10:17 am
मुंबई
नवभारतटाइम्स.कॉम शिवसेना ने दिया जवाब
शिवसेना ने दिया जवाब

नागरिकता कानून (सीएए) और नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों में शिवसेना नेता और मंत्री आदित्य ठाकरे शामिल होंगे या नहीं, इस बात की पुष्टि अभी उनकी ओर से नहीं की गई है। इसकी जानकारी पार्टी की ओर शनिवार को दी गई। शिवसेना के कम्युनिकेशन विंग ने ट्वीट किया कि सीएए, एनआरसी विरोधी छात्र परिषद् द्वारा आयोजित कार्यक्रम में वह जाएंगे या नहीं, इस बारे में आदित्य ठाकरे की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है।

इसके साथ ही कहा गया है कि उनके (आदित्य) शेड्यूल या किसी कार्यक्रम में मौजूदगी को लेकर शिवसेना की ऑफिशल कम्युनिकेशन टीम से संपर्क किया जाना चाहिए। बता दें कि यह बयान तब आया है जब एक निमंत्रण पत्र की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि वह कार्यक्रम में उपस्थित होंगे। निमंत्रण पत्र के मुताबिक, आदित्य जाने-माने लेखक जावेद अख्तर, ऐक्टिविस्ट उमर खालिद, रामा नागा, रोहित पवार और अन्य के साथ मुंबई में एक कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे।

क्या है CAA 2019?
नागरिकता संशोधन कानून 2019 में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया है। पहले किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य था। इस नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर 6 साल किया गया है यानी इन तीनों देशों के ऊपर उल्लिखित छह धर्मों के बीते एक से छह सालों में भारत आकर बसे लोगों को नागरिकता मिल सकेगी। आसान शब्दों में कहा जाए तो भारत के तीन मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के नियम को आसान बनाया गया है।

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