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Modi Cabinet Expansion: राणे का मंत्री बनना मतलब उद्धव के जख्मों पर नमक डालना, शिवसेना-बीजेपी के रिश्तों पर क्या होगा असर?

नारायण राणे को मंत्री बनाने का सबसे बड़ा नुकसान बीजेपी को यह भी होगा कि भविष्य में शिवसेना-बीजेपी शायद कभी एक साथ ना आएं। ऐसे में बीजेपी का सरकार बनाने का सपना टूट सकता है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 15 Jun 2021, 3:27 pm

हाइलाइट्स

  • नारायण राणे को मंत्री बनाये जाने से महाराष्ट्र की सियासत होगी प्रभावित
  • इसका सीधा असर शिवसेना और बीजेपी के रिश्तों पर पड़ेगा
  • शिवसेना को फूटी आंख भी नहीं सुहाते नारायण राणे
  • शिवसेना के खिलाफ आक्रामक तेवर के लिए मशहूर हैं राणे
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मुंबई
मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा काफी जोर-शोर से सियासी गलियारों में चल रही है। बीते सप्ताह से ही दिल्ली में बीजेपी के दरबार में नेताओं की बैठक और लॉबिंग शुरू है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र के कद्दावर नेता और बीजेपी सांसद नारायण राणे को भी केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा सुर्खियां बटोर रही है। इसके लिए नारायण राणे के दिल्ली में होने की भी खबर सामने आ रही है।
हालांकि, अगर हकीकत में नारायण राणे को मंत्री बनाया गया तो इसका सबसे बड़ा असर महाराष्ट्र की सियासत में होगा। इस फैसले का सीधा असर शिवसेना और बीजेपी के रिश्तो पर पड़ेगा। इसके पीछे भी कुछ अहम कारण हैं।

1) राणे मतलब शिवसेना के लिए नासूर
महाराष्ट्र में बाला साहेब ठाकरे ने नारायण राणे को मुख्यमंत्री बनाया था। हालांकि उद्धव ठाकरे से तालमेल ना बैठने की वजह से राणे ने शिवसेना को नमस्कार कह दिया था। किसी भी पार्टी में नेताओं का आना और जाना लगा रहता है। राणे ने भी ऐसा किया होता तो यह आम बात होती लेकिन उन्होंने शिवसेना छोड़ने के बाद लगातार ठाकरे परिवार पर निशाना साधा और टिप्पड़ियां कीं। राणे ने बाल ठाकरे का हमेशा सम्मान किया लेकिन उद्धव और आदित्य ठाकरे को निशाना बनाते रहे। आज भी राणे उद्धव और आदित्य पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं। खास बात यह भी है कि राणे, टिप्पड़ी के दौरान शब्दों की मर्यादा भी भूल जाते हैं। इसलिए राणे को शिवसेना के लिए नासूर समझा जाता है।

2) शिवसेना के जख्म पर नमक
मोदी कैबिनेट में अगर नारायण राणे को मंत्री बनाया गया तो यह शिवसेना के जख्मों पर नमक डालने जैसा होगा। यह भी कहा जाता है कि जब शिवसेना और बीजेपी की युती (गठबंधन)थी। तब भी शिवसेना ने यह पूरा प्रयास किया था कि राणे को बीजेपी में कोई स्थान ना मिले। यह चर्चा काफी समय तक महाराष्ट्र की सियासत में गूंजती रही। हालांकि बाद में शिवसेना और बीजेपी आपसी मतभेद के चलते खुद अलग हो गए। राणे पहले, बीजेपी के सहयोगी नेता बने फिर उनके कोटे से राज्यसभा में सांसद बने। बीजेपी में शामिल होने के बाद राणे ने उद्धव ठाकरे और शिवसेना पर हमले और भी तेज कर दिए। ऐसे में यदि उन्हें मंत्री पद दिया जाता है तो शिवसेना के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा ही होगा।

3) शिवसेना-बीजेपी गठबंधन मुश्किल होगा?
हाल में उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अकेले में आधा घंटे मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र में शिवसेना के सुर बदल गए थे। खुद संजय राउत ने मोदी की तारीफों के पुल बांधे थे। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी जैसा दूसरा कोई चेहरा नहीं है और अगले चुनाव में मोदी ही प्रधानमंत्री होंगे यह भी संजय राउत ने कहा। एक मुलाकात ने राज्य की सियासत में इतना बड़ा परिवर्तन कर दिया। इस मुलाकात के बाद भविष्य में शिवसेना-बीजेपी दोबारा एक साथ आ सकते हैं, इस बात की चर्चा शुरू हो गई है। ऐसे में राणे को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया तो यह गठबंधन काफी मुश्किल हो जाएगा। इसके पीछे बड़ी वजह यह भी है कि शिवसेना के लिए नारायण राणे प्रतिष्ठा का प्रश्न हैं। लिहाजा राणे को मंत्री बनाना मतलब गठबंधन के रास्ते पर कांटे बिछाने जैसा होगा।

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