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यूपी विधानसभा चुनाव 2017: ‘यूपी के लड़कों’ की वजह से असमंजस में प्रियंका

रायबरेली के महराजगंज (बछरावां विधान सभा क्षेत्र) में भले ही प्रियंका गांधी वाड्रा ने पीएम नरेंद्र मोदी को बाहरी बताकर राहुल-अखिलेश को यूपी का नेता बताया हो, लेकिन इन्हीं की वजह से ही प्रियंका ‘असमंजस’ में हैं। उनका यह असमंजस रायबरेली की दो रैलियों में दिखा।

रोहित मिश्रा | नवभारत टाइम्स 18 Feb 2017, 9:53 am
रायबरेली
नवभारतटाइम्स.कॉम priyanka gandhi on cong poll trail in up for first time
यूपी विधानसभा चुनाव 2017: ‘यूपी के लड़कों’ की वजह से असमंजस में प्रियंका

रायबरेली के महराजगंज (बछरावां विधान सभा क्षेत्र) में भले ही प्रियंका गांधी वाड्रा ने पीएम नरेंद्र मोदी को बाहरी बताकर राहुल-अखिलेश को यूपी का नेता बताया हो, लेकिन इन्हीं की वजह से ही प्रियंका ‘असमंजस’ में हैं। उनका यह असमंजस रायबरेली की दो रैलियों में दिखा।

पहली रैली जीआईसी ग्राउंड में हुई। इसमें रायबरेली की छह सीटों में से पांच के कांग्रेस उम्मीदवार मौजूद थे। बावजूद इसके प्रियंका ने उनके लिए कोई भाषण नहीं किया। बछरावां पहुंचीं तो वहां भी उन्होंने केवल पीएम पर हमला किया, प्रत्याशी के लिए कुछ नहीं कहा। बाबा बबुरिहा गांव में प्रियंका गांधी ने पीएम पर कटाक्ष कर कहा कि वे जो कहते हैं पूरा नहीं करते।



नोटबंदी पर प्रियंका ने कहा कि महिलाओं का बहुत नुकसान हुआ है। पीएम मोदी के बयान पर पलटवार करते हुए प्रियंका ने कहा कि यूपी को किसी बाहरी की जरूरत नहीं है। राहुल और अखिलेश ही यूपी का विकास कर सकते है इसलिए इस बार गठबंधन वाली सरकार को वोट करें। रायबरेली में दो विधान सभा सीटों पर कांग्रेस-एसपी दोनों के उम्मीदवार हैं। ऐसे में अगर प्रियंका कांग्रेस के उम्मीदवार के पक्ष में बोलती हैं तो गठबंधन कमजोर होता हे और अगर वह एसपी के उम्मीदवार के पक्ष में बोलती हैं तो कांग्रेस को झटका लगता।

यूपी में चुनाव प्रचार से दूरी बनाने की वजह से प्रियंका को लेकर पहले ही सवाल उठ रहे थे। लेकिन जिस तरह से उन्होंने मौजूदगी के बावजूद जीआईसी मैदान में चुप्पी साधे रखी, उससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा का एक दूसरा दौर शुरू हो गया है। जानकार मानते हैं कि प्रियंका के चुप्पी की सबसे बड़ी वजह जीआईसी की रैली में उन दोनों कांग्रेस उम्मीदवारों की मौजूदगी थी, जहां एसपी के भी प्रत्याशी खड़े हैं।

जीआईसी की सभा में ऊंचाहार सीट से कांग्रेस प्रत्याशी अजयपाल सिंह और सरेनी से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अशोक सिंह भी मौजूद थे। ऐसे में कांग्रेस या गठबंधन की बात करना प्रियंका के लिए बेहद मुश्किल था। लिहाजा उन्होंने कुछ न बोलने का ही रास्ता पकड़ना सही समझा।दूसरी सभा में केवल कांग्रेस का एक ही प्रत्याशी था। बछरावां सीट पर कोई विवाद भी नहीं है। लिहाजा प्रियंका जब बोली भीं तो पीएम पर हमलावर रहीं। उन्होंने प्रत्याशी के पक्ष में कुछ नहीं कहा।



खींचतान की वजह में टिकट ज्यादा बांटना
रायबरेली-अमेठी और दूसरी जगहों पर गठबंधन के बावजूद सीटों में खींचतान की असल वजह दोनों तरफ से ज्यादा टिकट बांटना है। एसपी-कांग्रेस गठबंधन में कांग्रेस को केवल 105 उम्मीदवार उतारने थे, लेकिन तकरीबन 150 टिकट बांटे गए और अब भी करीब 27 सीटों पर विवाद है। वहीं दूसरी तरफ एसपी को 298 उम्मीदवार उतारने थे जबकि 350 से ज्यादा टिकट बांटे गए।

प्रियंका बाहरी की करेंगी बात
गठबंधन की थीम पहले तय हो रही थी, ‘यूपी के लड़के बनाम बाहरी मोदी’। एसपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सहमत न होने की वजह से इसे ‘यूपी को ये साथ पसंद है’ किया गया। लेकिन जिस तरह से प्रियंका ने तीन मिनट के अपने संबोधन में पीएम को बाहरी बताकर हमला किया, उससे साफ है कि प्रियंका बाहरी को टारगेट करेंगी। प्रियंका ने बेटे की बीमारी का जिक्र करते हुए माहौल में कुछ ममता, मार्मिकता डालने की भी कोशिश की। वह बोलीं, मेरा बेटा बीमार है और जब उसे दवाई देने गई मैं तो वह टीवी देख रहा था।

पीएम बोल रहे थे कि यूपी ने मुझे गोद लिया है। लेकिन यूपी को किसी बाहरी को गोद लेने की जरूरत नहीं है। यूपी के दो बेटे हैं राहुल और अखिलेश। दोनों के खून में उत्तर प्रदेश है। वे यहीं पले-बढ़े हैं। प्रियंका ने नोटबंदी से महिलाओं को हुई परेशानी सामने रखी और कहा कि पीएम केवल खोखले वादे करते हैं। उन्होंने जनता से खोखले वादे करने वालों को पहचानने की भी अपील की।

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रोहित मिश्रा

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