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गरीबी और बीमारी की मार, जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही दिग्गज महिला तीरंदाज

21 वर्षीय बोरो ने 2015 के केरल नैशनल गेम्स में गोल्ड मेडल पर निशाना साधा था और आज अपनी जिंदगी के लिए लड़ते हुए असहाय नजर आ रही हैं। दुर्लभ स्व प्रतिरक्षित रोग के इलाज के लिए उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 24 Apr 2017, 11:54 am
अनाम अजमल, नई दिल्ली
नवभारतटाइम्स.कॉम hit by disease and poverty top archer is now fighting for life
गरीबी और बीमारी की मार, जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही दिग्गज महिला तीरंदाज

राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज गोहेला बोरो इन दिनों जिंदगी के लिए जंग लड़ रही हैं। 21 वर्षीय बोरो ने 2015 के केरल नैशनल गेम्स में गोल्ड मेडल पर निशाना साधा था और आज अपनी जिंदगी के लिए लड़ते हुए असहाय नजर आ रही हैं। दुर्लभ स्व प्रतिरक्षित रोग के इलाज के लिए उन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है। गोहेला ने महज 12 साल की उम्र में 2008 में अपने करियर की शुरुआत की थी। अब तक वह राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर 77 मेडल जीत चुकी हैं। भले ही उनका करियर शानदार रहा है, लेकिन वह अपने इलाज तक का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। अजीब तरह की बीमारी से जूझ रहीं गोहेला को अब भी उम्मीद है कि एक बार फिर वह निशाना साधने में सक्षम होंगी।

गोहेला ने बताया, 'मैं हर हिन स्पोर्ट्स अथॉरिटी के हॉस्टल में 8 घंटे तक ट्रेनिंग करती थी। लेकिन, 2016 के नैशनल गेम्स की तैयारियों के दौरान मुझे शरीर में बेहद दर्द महसूस होने लगा। यहां तक कि चलने-फिरने में भी मुझे कष्ट होने लगा। मैं बीते 5 महीनों से बिस्तर पर ही हूं।' दुखद यह है कि दिल्ली आने से पहले वह करीब एक साल तक असम के कोकराझार स्थित अपने घर में ही बिना किसी ट्रीटमेंट के पड़ी रहीं। गोहेला बेहद गरीब परिवार से हैं। उनकी मां स्ट्रीट वेंडर हैं, जबकि पिता दिहाड़ी मजदूर के तौर पर रोजी-रोटी कमाते हैं। वे उनके इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ हैं।

गोहेला की बीमारी के बारे में चर्चा तब हुई, जब कुछ ऐक्टिविस्ट्स ने उनके इलाज की फंडिंग के लिए प्रयास शुरू किए। असम सरकार के समक्ष गोहेला के मामले को रखने वाले डिस्कवरी क्लब के जॉइंट सेक्रटरी बिधान सरकार ने कहा, 'फेसबुक के जरिए अप्रैल 2016 में हमें उनके बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद हमने उन्हें गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में ऐडमिट कराया। लेकिन, उन्हें स्पेशल ट्रीटमेंट की जरूरत थी। आखिर में हम उनके लिए फंड जुटाने में कामयार रहे और 8 अप्रैल को एम्स में भर्ती कराने के लिए लाया गया।'

बिधान सरकार कहते हैं कि हमें उम्मीद है कि सरकार उनके इलाज, पुनर्स्थापन और नौकरी के लिए प्रयास करेगी। गोहेला ने बीमारी के दौरान मौजूदा सीएम सर्बानंद सोनोवाल से मदद मांगने के लिए भी कोई संपर्क नहीं किया था। सोनोवाल असम के सीएम बनने से पहले खेल एवं युवाओं मामलों के मंत्री थे।

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