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पशु वध प्रतिबंध के नियमों में बाध्य नहीं है अरुणाचल प्रदेश- बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष

अरुणाचल प्रदेश के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष तापीर गाओ ने कहा है कि उनका राज्य, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार द्वारा वध के लिए पशुओं की बिक्री पर प्रतिबंध के नियम के तहत बाध्य नहीं है। उन्होंने कहा पशु वध पर प्रतिबंध ऐसे राज्य में लागू नहीं हो सकता है जहां पशुओं की बलि धार्मिक वजहों से दी जाती है, न कि व्यापार के उद्देश्य से।

टाइम्स ऑफ इंडिया 4 Jun 2017, 11:40 am
गुवाहाटी
नवभारतटाइम्स.कॉम Cattle@123

अरुणाचल प्रदेश के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष तापीर गाओ ने कहा है कि उनका राज्य, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार द्वारा वध के लिए पशुओं की बिक्री पर प्रतिबंध के नियम के तहत बाध्य नहीं है। उन्होंने कहा पशु वध पर प्रतिबंध ऐसे राज्य में लागू नहीं हो सकता है जहां पशुओं की बलि धार्मिक वजहों से दी जाती है, न कि व्यापार के उद्देश्य से।

गाओ ने टीओआई से कहा, 'हम जो कुछ भी उपयोग करते हैं, वह धार्मिक त्योहारों पर ही करते हैं। यह एक यूनिक कम्युनिटी आधारित परंपरा है, जिसे हम लोगों ने पूर्वजों से पीढ़ी दर पीढ़ी विरासत में हासिल किया है। अरुणाचल में एक भी बूचड़खाना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने पशु वध के हमारे पारंपरिक अभ्यास को लेकर कोई निर्देश नहीं दिया है।'

अरुणाचल में गाय नहीं बल्कि इससे मिलती जुलती 'मिथुन' नामक पशु की बलि दी जाती है। इस मिथुन का सेवन पड़ोसी राज्य नागालैंड में भी किया जाता है। वहीं मेघालय तथा मिजोरम में गोमांस को वरीयता दी जाती है।

बीजेपी नेता ने कहा कि विपक्ष के आरोपों के उलट केंद्र सरकार ने अपनी तरफ से जानवरों के वध पर कोई भी निर्देश नहीं दिया है। अगर कांग्रेस की सरकार भी केंद्र में रहती तो वह भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को मानने को बाध्य ही रहती। यह मामला पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने डेयरी फार्मिंग के लिए जानवरों के ट्रांसपोर्ट पर प्रतिबंध नहीं लगाया है।'

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