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कोरोना से मौत के बाद शशिधर के शव को है अंतिम संस्कार का इंतजार, तीन संक्रमित बेटे की पहले ही हो चुकी है मौत... दो पोते हैं जेल में बंद

कोरोना वायरस कितना खतरनाक है अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जरा सी लापरवाही की तो यह पूरे परिवार को लील जाता जाता है। कोरोना संक्रमित अपने तीन बेटे को अपनी आंखों के सामने दुनिया से जाता देखने वाले शशिधर कापड़ी का निधन भी करुणा की वजह से ही हो गया। हालात ऐसे हो गए कि मुखाग्नि देने वाला तक नहीं बचा।

Lipi 11 May 2021, 11:28 pm

हाइलाइट्स

  • भागलपुर के एक परिवार पर कोरोना का कहर
  • कोरोना से तीन बेटे की मौत के बाद मृत पिता को मुखाग्नि देने वाला तक नहीं
  • मृतक शशिधर कापरी के दो पोते भी जेल में हैं बंद
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भागलपुर
भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में इलाजरत कोरोना संक्रमित शशिधर कापरी की मौत हो गई है। परिजन को आरोप है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण शशिधर कापरी मौत हुई है। परिजनों की मानें तो उन्हें अस्पताल में समुचित ऑक्सिजन नहीं मिल पाया जिससे उनकी मौत हो गई।
बता दें कि शशिधर कापरी का शव अस्पताल परिसर में ही रखा हुआ है। क्योंकि मुखाग्नि देने वाला कोई नहीं है इसलिए शशिधर कापरी का अभी तक अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। इस बारे में परिजन बताते हैं कि घर में एक भी पुरुष सदस्य नहीं बचा है। जिसके कारण अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है। बताया गया कि मृतक शशिधर के तीन बेटों की मौत पहले ही कोरोना संक्रमण की वजह से हो चुकी है। और मृतक के दो पोते जेल में बंद हैं। अब मृतक शशिधर कापरी की पत्नी द्वारा ही मुखाग्नि देने की बातें कही जा रही है।

मृत शशिधर कापरी के तीनों बेटों की कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से पहले ही हो चुकी है मौत
बांका जिले के अमरपुर थाना अंतर्गत बल्ली कित्ता निवासी शशिधर कापरी की 10 मई को मौत हो गई थी। उनके मौत के पहले ही तीनों बेटे की मौत भी कोरोना की वजह से हो चुकी है। बताया गया कि उनका तीनों बेटा भी कोरोना संक्रमित था जिसमें से सबसे पहले छोटे पुत्र प्रवेश कुमार की मौत हुई। इसके बाद बड़ा बेटा निकुंज बिहारी की मौत 30 अप्रैल को हो गया। शशिधर कापरी और उनके परिवार वालों पर कुदरत का कहर यहीं नहीं थमा। 01 मई को जेएलएनएमसीएच में इलाज के दौरान उनके तीसरे बेटे प्रमोद कापरी की भी मौत हो गई। इस दौरान खुद शशिधर कापरी का इलाज भी जेएलएनएमसीएच में चल रहा था। परिजनों की मानें तो सभी की मौत ऑक्सीजन की कमी से ही हुई है। वहीं प्रमोद कापरी के दो बेटे अक्षय उर्फ रामबीर कापरी और छोटू कुमार उर्फ अस्मातम के कंधों पर घर की पूरी जिम्मेवारी आ गया है। परिवार वाले शशिधर कापरी को पोता से ही मुखाग्नि दिलाना चाह रहे हैं। लेकिन दोनों पोता अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ के आरोप में जेल में बंद है।

परिवार वालों ने जेल में बंद दोनों पोता को जमानत दिलाने के लिए मुख्य दंडाधिकारी से लगाई गुहार
शशिधर कापरी की मौत के बाद उसके परिवार का कोई पुरुष सदस्य मौजूद नही है। परिवार वाले चाहते हैं की मुखाग्नि शशिधर कापरी के पोता ही दें। लेकिन दोनों पोता भी मुंगेर जेल के क्वारंटीन सेंटर में है। मृतक के दोनों पोते को इलाज के दौरान अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ करने और डॉक्टरों के साथ बदसलूकी करने के आरोप में बीते 03 मई को जेल भेजा गया था। अब परिवार वालों ने शशिधर कापरी के अंतिम संस्कार के लिए भागलपुर में मुख्य दंडाधिकारी से 11 मई ,2021 (मंगलवार) को दोनों पोता को जमानत देने की गुहार लगाई है। लेकिन उन्हें किसी कारणवश जमानत नहीं मिल सका। परिजनों की मानें तो कोर्ट ने पैरोल पर जमानत देने से इंकार कर दिया है। वहीं इस दौरान परिजनों ने कोर्ट को यह भी बताया कि दोनों आरोपी निर्दोष हैं। अस्पताल प्रशासन ने अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए दोनों को फंसाया है।

मंगलवार की रात में शशिधर कापरी का हो सकता है अंतिम संस्कार
कोर्ट से दोनों पोते को जमानत नहीं मिलने के कारण समाजसेवी महादेव रजक और कुछ अन्य लोगों के सहयोग से मंगलवार को रात में बरारी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार करने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि विद्युत शवदाह गृह में ही शशिधर कापरी का अंतिम संस्कार होगा। और इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। इस बारे में भागलपुर के सांसद प्रतिनिधि डॉ देवज्योति मुखर्जी ने बताया कि वह खुद उनके इलाज की निगरानी कर रहे थे। पिछले 9 मई को उनका ऑक्सीजन लेवल 99 प्रतिशत था, लेकिन बावजूद इसके उन्हें परेशानी हो रही थी।

सांसद प्रतिनिधि की मानें तो इसकी शिकायत उन्होंने कई बार डॉक्टरों से किया लेकिन किसी भी डॉक्टरों ने उन्हें देखने की जहमत नहीं उठाई। इसी क्रम में 10 मई को उनका स्वास्थ्य अचानक खराब हो गया और संध्या में करीब 6 बजे उनकी मौत हो गई। सांसद प्रतिनिधि ने कहा कि शशिधर कापरी के दो बेटों की मौत भी जेएलएनएमसीएच में ही इलाज के दौरान हुई है।

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