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बिहार : नीतीश की नींद उड़ाने वाला BJP का 'प्लान P', 2024 ही नहीं 2025 के लिए भी मामला हो जाएगा सेट

बिहार में JDU के अलग होने के बाद भारतीय जनता पार्टी वोट प्रतिशत की भरपाई में जुटी है। उनकी नजर राज्य के पसमांदा मुसलमानों के वोट बैंक पर है। बीजेपी को लगता है कि पसमांदा मुसलमान का वोट हासिल होता है तो न सिर्फ 2024 बल्कि 2025 में भी प्रचंड जीत हासिल हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए सामाजिक समीकरण ढूंढने के साथ पसमांदा मुस्लिमों पर फोकस करने की जरूरत पर जोर दिया था।

Edited byसुनील पाण्डेय | नवभारतटाइम्स.कॉम 26 Nov 2022, 7:19 pm

हाइलाइट्स

  • पटना में बीजेपी की ओर से बुलाया गया पसमांदा मुस्लिम सम्मेलन
  • JDU के अलग होने के बाद वोट प्रतिशत की भरपाई में जुटी बीजेपी
  • बिहार बीजेपी की नजर राज्य के पसमांदा मुसलमानों के वोट बैंक पर
  • पीएम मोदी ने पसमांदा मुस्लिमों पर फोकस करने की बात कही थी
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नवभारतटाइम्स.कॉम pasmanda muslims
नील कमल, पटना : हैदराबाद में हुई बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक ( जुलाई 2022) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पसमांदा मुसलमानों की स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की थी। उन्होंने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बीजेपी के कार्यकर्ताओं को पसमांदा समाज के मुसलमानों को पार्टी के साथ जोड़ने का मंत्र दिया था। पीएम नरेंद्र मोदी के इस मंत्र पर अब काम शुरू हो चुका है। उत्तर प्रदेश के बाद बिहार में इसकी कमान विधान परिषद के सदस्य संजय पासवान ने संभाली है।
पटना में पसमांदा मुसलमानों का सम्मेलन
संविधान दिवस के मौके पर बीजेपी के एमएलसी संजय पासवान ने विधान परिषद में पसमांदा मुसलमान सम्मेलन का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में आर्थिक तौर पर पिछड़े दलित आदिवासी और पिछड़े मुसलमानों को जोड़कर एक समूह बनाने पर विचार किया गया। उनके उत्थान के लिए आगे किस तरह से काम करना है, इसकी रणनीति बनाने के लिए आयोजन किया गया था। ऐसा माना जाता है कि चुनाव के दौरान मुसलमानों का वोट किधर जाएगा, ये मतदान के दो दिन पहले तक भी तय नहीं होता। माना ये भी जाता है कि मतदान के ठीक एक दिन पहले मुस्लिम आबादी अपने क्षेत्र में ये देखती है कि कौन उम्मीदवार बीजेपी कैंडिडेट को हरा सकता है, वो उसी पार्टी को वोट दे देते हैं। यानी मुसलमानों का वोट सिर्फ बीजेपी प्रत्याशी को हराने के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' मंत्र के तहत मुसलमानों को भी अपने पक्ष में करने की पुरजोर कोशिश बीजेपी कर रही है।

बिहार में मुस्लिम आबादी का 80% पासमंदा
राजनीतिक गलियारे में ये माना जाता है कि मुसलमान कभी भी भारतीय जनता पार्टी को वोट नहीं दे सकते। हालांकि कुछ पढ़े-लिखे मुसलमानों का वोट बीजेपी को मिलता है। मगर पसमांदा मुसलमान जिन्हें पिछड़ा वर्ग कहा जाता है, वो शुरू से ही बीजेपी से दूर ही रहे हैं। देश में पिछले 8 साल से नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार काम कर रही है। बीजेपी की सरकार बनने के बाद से ही देश के मुसलमान खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं। इसके अलावा ये बात भी सभी जानते हैं कि राष्ट्रीय जनता दल का मुस्लिम-यादव गठजोड़, बीजेपी के शासन के बाद और भी ज्यादा मजबूत हो गया है। लेकिन अब बीजेपी ने मुसलमानों को रिझाने के लिए खासकर पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग पर फोकस किया है। उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने के लिए केंद्र की सरकार ने कई योजनाएं लागू की है। आरजेडी ने 15 साल तक मुसलमानों के दम पर ही बिहार में राज किया था। इसके बाद मुसलमानों का वोट आरजेडी से टूट कर जनता दल यूनाइटेड यानी नीतीश कुमार के पास चला गया।

फॉरवर्ड मुस्लिम कर रहे ओबीसी को मिलने वाले आरक्षण में हकमारी, बीजेपी का लालू-नीतीश पर बड़ा आरोप
पसमांदा मुसलमानों अंसारी तबके का दबदबा
बिहार बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद तुफैल ने बताया कि पसमांदा मुसलमानों में धुनिया, मंसूरी, फकीर, सब्जीफरोश, कबाड़ी, राइन इदरीसी (दर्जी) खानाबदोश, अंसारी, कसाई, कलाल समेत कई जातियां आती हैं। उन्होंने एनबीटी को बताया कि इन जातियों में अंसारी जाति के मुसलमान काफी आगे बढ़ चुके हैं। लेकिन दुख की बात ये है कि पसमांदा मुसलमान के अन्य जातियों को वो आगे बढ़ने नहीं देते। राजनीतिक दलों के नेता भी अंसारी जाति के मुसलमान नेता को अपने साथ लेकर घूमते हैं। पार्टियों को भी ये पता है कि अंसारी जाति का दबदबा बाकी सभी जातियों पर ज्यादा है। लिहाजा राजनीतिक दल भी अंसारी मुसलमानों को ही ज्यादा तवज्जो देते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय योजना के तहत सभी का विकास करने की मुहिम में जुटे हैं। धीरे-धीरे मुसलमानों में भी ये धारणा बनने लगी है कि उनका उत्थान कोई कर सकता है तो वो भारतीय जनता पार्टी है। मुसलमानों को ये भी आभास हो चुका है कि बाकी सभी राजनीतिक दल सिर्फ उनके वोट को हासिल करने के लिए इस्तेमाल करती है।

मुस्लिम वोटरों को रिझाने में बीजेपी भी पीछे नहीं

निकाय चुनाव में अदालत के आदेश पर अति पिछड़ों को आरक्षण देने के लिए बिहार सरकार ने जो सूची बनाई है, उस पर बीजेपी ने सवाल खड़ा किया है। बीजेपी का कहना है कि महागठबंधन सरकार में शामिल नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव ने महज राजनीतिक लाभ और स्वार्थ की वजह से अगड़ी जाति के मुसलमानों को भी अति पिछड़ा वर्ग में शामिल कर आरक्षण देने का काम किया है। ये सीधे तौर पर अति पिछड़े मुसलमानों की हकमारी है। कुछ दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी ने इस मसले को लेकर एक स्मार पत्र भी पिछड़ा और अति पिछड़ा आयोग को सौंप चुकी है। यानी मुसलमानों के विरोधी माने जाने वाली भारतीय जनता पार्टी अब मुसलमानों के हक की लड़ाई के लिए खुलकर मैदान में उतर चुकी है। बीजेपी भले ही ये लड़ाई राजनीतिक फायदे के लिए लड़ रही हो लेकिन ये तय है कि इसका सीधा फायदा पिछड़ा और अति पिछड़ा मुसलमानों को ही होगा।


बीजेपी के पसमांदा मुसलमान सम्मेलन पर बयानबाजी
बीजेपी की ओर से संविधान दिवस के मौके पर पसमांदा मुसलमान सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता रामसागर सिंह का कहना है कि बीजेपी की ओर से कराए गए पसमांदा समाज के मुसलमानों के सम्मेलन से आरजेडी, कांग्रेस और जेडीयू समेत तमाम पार्टियां जो मुसलमानों को सिर्फ वोट बैंक समझती थी। अब उन्हें मुसलमान वोट खिसकने का डर सताने लगा है।
लेखक के बारे में
सुनील पाण्डेय
सुनील पाण्डेय इस समय nbt.in के साथ Principal Digital Content Producer तौर पर जुड़े हुए हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 16 वर्षों का अनुभव है। ETV News, Zee Media, News18 सहित कई संस्थानों में अहम पद पर रहे। ग्राउंड और रिसर्च स्टोरी पर रिपोर्टिंग में माहिर माने जाते हैं। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर खासी पकड़ रखते हैं। TV News के लिए शो बनाने में ​एक्सपर्ट सुनील को डिजिटल माध्यम में दिलचस्पी और सीखने की प्रबल इच्छा इन्हें नवभारत ​टाइम्स डिजिटल तक खींच लाई।... और पढ़ें

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