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बिहार विधानसभा भवन के स्वर्णिम 100 साल: जब MLA राम इकबाल वारसी ने स्पीकर पर उछाला था गमछा

Bihar Vidhan Sabha Bhawan celebrates 100 years: बिहार विधानसभा भवन के 100 साल पूरे होने के सेलिब्रेशन का दौर चल रहा है। कई सदनों में देखा गया है कि विरोध जताने के लिए सदस्य स्पीकर की सीट तक पहुंच जाते हैं, बेल में आकर हंगामा करते हैं। ऐसे लोगों के लिए ऐतिहासिक बिहार विधानसभा भवन में घटी एक घटना का जिक्र यहां किया जा रहा है। जिसे जानकार आप समझ सकते हैं कि अच्छे प्रयास से भी स्पीकर का ध्यान खींचा जा सकता है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 21 Oct 2021, 10:10 am
पटना
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बिहार विधानसभा भवन के 100 साल पूरे होने के सेलिब्रेशन का दौर चल रहा है। पिछले 100 साल में इस भवन ने ना जाने कितनी सरकारों को आते और जाते देखा। इस ऐतिहासिक भवन ने हजारों विधायकों और सैकड़ों मंत्रियों को बनते बिगड़ते देखा है। इस विधानसभा के भवन में जो भी सम्मानित सदस्य आते हैं उनसे यही उम्मीद की जाती है कि वह इसकी गरमी को बनाए रखने और उसे और ऊंचाई पर ले जाने में सहभागी बनें। आज के दौर में अक्सर देश की अलग-अलग विधानसभाओं और संसद में विपक्ष के हंगामे और विरोध के तरीके बदल चुके हैं। कई सदनों में देखा गया है कि विरोध जताने के लिए सदस्य स्पीकर की सीट तक पहुंच जाते हैं, बेल में आकर हंगामा करते हैं। ऐसे लोगों के लिए ऐतिहासिक बिहार विधानसभा भवन में घटी एक घटना का जिक्र यहां किया जा रहा है। जिसे जानकार आप समझ सकते हैं कि अच्छे प्रयास से भी स्पीकर का ध्यान खींचा जा सकता है।

साल 1969 की बात है बिहार विधानसभा की कार्यवाही चल रही थी। पीरो विधानसभा सीट से विधायक राम इकबाल वारसी सदन में अपनी बात रख रहे थे। तभी उन्हें ऐसा लगा कि स्पीकर राम नारायण मंडल उनकी बातों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। तभी राम इकबाल वारसी ने अपने गमछे को लपेटकर गोला की तरह बनाया और उसे अपनी सीट पर बैठे-बैठे ही स्पीकर राम नारायण मंडल की सीट की तरफ उछाल दिया।

इसके बाद स्पीकर रामनारायण मंडल ने कहा कि माननीय सदस्य गमछा क्यों फेंक रहे हैं। इसपर राम इकबाल वारसी ने कहा कि आपका ध्यान मेरी तरफ नहीं है तो क्या करुं। ऐसे में मैं गमछा नहीं तो क्या जूता फेकूं।

यहां यह बात इसलिए कही जा रही है क्योंकि आज के दौर में विधायक और सांसद विरोध जताने के लिए तरह-तरह के काम करते हैं। लेकिन राम इकबाल वारसी ने ना तो सदन के बीच में गए, ना कोई हो-हल्ला किया, ना ही स्पीकर के सीट तक गए। वह अपनी सीट पर जमे रहे और अपनी नाराजगी स्पीकर के प्रति जाहिर भी कर दी।

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