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राहुल गांधी की वजह से माने नीतीश, उपराष्ट्रपति चुनाव में देंगे विपक्ष का साथ?

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार का समर्थन किए जाने से कांग्रेस और जेडीयू के बीच गहराया विवाद संभवत: राहुल गांधी के हस्तक्षेप की वजह से समाप्त हो गया है। राहुल के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं से नीतीश कुमार के खिलाफ नहीं बोलने का निर्देश दिया है।

भाषा 6 Jul 2017, 10:23 pm
पटना
नवभारतटाइम्स.कॉम Rahul

राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार का समर्थन किए जाने से कांग्रेस और जेडीयू के बीच गहरा विवाद संभवत: राहुल गांधी के हस्तक्षेप की वजह से समाप्त हो गया है। राहुल के बारे में कहा जा रहा है कि उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं से नीतीश कुमार के खिलाफ नहीं बोलने का निर्देश दिया है। जेडीयू ने भी इस दिशा में सकारात्मक रुख अपनाते हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के साथ होने के संकेत दिए हैं।

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विपक्ष ने उपराष्ट्रपति पद के लिए भी अपना उम्मीदवार उतारने की योजना बनाई है। इस दिशा में एक बार फिर से कोशिशें शुरू हो गई हैं। आगामी 11 जुलाई को संसद भवन की लाइब्रेरी बिल्डिंग में एक बार पूरे विपक्ष के जुटने के आसार है। सुबह 11 बजे का समय इस मीटिंग के लिए रखा गया है। सूत्रों के मुताबिक उस दिन कांग्रेस उपाध्यक्ष अलग से नीतीश कुमार से मुलाकात कर सकते हैं। इस बारे में कांग्रेस के सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद का कहना था कि हम लोग 11 जुलाई को इस मुद्दे पर मिल रहे हैं। जहां हम उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी पर चर्चा करेंगे। उल्लेखनीय है कि उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल आगामी 10 अगस्त को खत्म हो रहा है। 5 अगस्त को इस पद को लेकर चुनाव है।

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मीडिया में आई रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नीतीश कुमार का मजबूती से पक्ष लेते हुए अपने पार्टी के नेताओं से जेडीयू प्रमुख की आलोचना करने से दूर रहने का निर्देश दिया है। बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी ने अपने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ दिल्ली में इस सप्ताह के शुरुआती दौर में मुलाकात होने की पुष्टि की पर उन्होंने बैठक के बारे में विस्तृत जानकारी से इंकार किया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राहुल ने बैठक में चौधरी को नीतीश के खिलाफ बयान जारी करने वाले पार्टी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए।

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जिस समय कांग्रेस और जेडीयू में विवाद गहराया था, राहुल देश के बाहर थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने नीतीश कुमार पर 'बिहार की बेटी' मीरा कुमार की हार सुनिश्चित करने के लिए आगामी 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार राम नाथ कोविंद का समर्थन करने का आरोप लगाया था। आजाद ने नीतीश पर प्रत्यक्ष रूप से हमला करते हुए कहा था कि जो एक विचारधारा रखते हैं वह एक निर्णय लेते हैं जबकि जिनकी कई विचारधारा होती है वह अलग-अलग निर्णय लेते हैं।

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आजाद के इस टिप्पणी के बाद प्रदेश के कुछ कांग्रेस नेताओं ने भी जेडीयू प्रमुख पर वार किया था। नीतीश ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा था 'बिहार की बेटी' को हार के लिए क्यों चुना गया। यूपीए सरकार के कार्यकाल में दो बार अवसर आए थे, उस समय क्यों नहीं उन्हें उम्मीदवार बनाया। आजाद की 'एक विचारधारा' वाली टिप्पणी पर नीतीश ने पलटवार करते हुए कहा कि वह किसी के 'पिछलग्गू' नहीं हैं। नीतीश के एनडीए उम्मीदवार राम नाथ कोविंद का उनके व्यक्त्वि को लेकर समर्थन किए जाने पर बिहार की महागठबंधन के घटक दलों कांग्रेस, आरजेडी और जेडीयू के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था।

राजनीतिक जीवन में नीतीश के साथ बेहतर संबंध रखने वाले राहुल के इस हस्तक्षेप के बाद कांग्रेस और जेडीयू में मतभेद संभवत: समाप्त हो गए हैं। इन दोनों दलों के बीच मतभेद समाप्त होने की बात ऐसे समय सामने आई है, जब विपक्षी दलों की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार अपने तीन दिवसीय दौरे पर गुरुवार को बिहार आ रही हैं। मीरा यहां कांग्रेस और आरजेडी के विधायकों और सांसदों से मुलाकात करेंगी पर उनकी नीतीश के साथ मुलाकात तय नहीं है।

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जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने फोन पर कहा कि उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर विचार विमर्श करने के लिए अगर विपक्षी दलों द्वारा उनकी पार्टी को आमंत्रित किया गया तो निश्चित तौर पर हम उसमें भाग लेंगे। त्यागी ने यह भी कहा कि अगर संपर्क किया जाता है तो उनकी पार्टी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार का समर्थन करेगी। यह पूछे जाने पर क्या वह उक्त बैठक में शामिल होंगे, त्यागी ने कहा कि इसबारे में उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और वरिष्ठ नेता शरद यादव निर्णय लेंगे। बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि जेडीयू उपराष्ट्रपति चुनाव में हमलोगों के साथ होगी।

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