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Chhattisgarh : बिलासपुर नसबंदी कांड के आरोपी बरी, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की जांच में मिली क्‍लीन चिट

छत्‍तसीगढ़ के बिलासपुर में हुए नसबंदी कांड में आरोपियों को स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की जांच में क्‍लीन चिट मिल गई है। (bilaspur sterilization scandal) सभी आरोपी दोषमुक्‍त कर दिया गया है। बता दें कि साल 2014 में बिलासपुर के कानन पेंडारी में नसबंदी के दौरान 13 महिलाओं की मौत हो गई थी। आरोपियों पर कार्रवाई के लिए कांग्रेस ने बिलासपुर से रायपुर तक पद यात्रा भी की थी, अब कांग्रेस के शासनकाल में ही आरोपी बरी हो गए है।

Lipi 15 Sep 2022, 8:24 pm
रायपुर : साल 2014 में हुआ नसबंदी कांड एक बार फिर चर्चा में बन गया है। चर्चा इस बार इसलिए है क्योंकि इस घटनाक्रम में आरोपियों को स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्लीन चिट मिल गई है। कांग्रेस ने जिस नसबंदी कांड को लेकर बिलासपुर से रायपुर तक पदयात्रा की थी, उसी नसबंदी कांड को कांग्रेस की सरकार में आरोपियों को स्वास्थ्य विभाग ने दोषमुक्त करार किया है।
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2014 में हुई थी 13 महिलाओं की मौत
साल 2014 नवंबर के दौरान डॉ रमन सिंह की सरकार में बिलासपुर के कानन पेंडारी में नसबंदी के दौरान 13 महिलाओं की मौत हो गई थी। महिलाओं की मौत के बाद विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने इसका जमकर विरोध किया था। राहुल गांधी बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में पीड़ित पक्षों से मुलाकात करने भी पहुंचे थे। इस दौरान भूपेश बघेल के नेतृत्व में बिलासपुर से रायपुर तक पदयात्रा निकाली गई थी। कांग्रेस ने उस वक्त मौजूदा रमन सरकार पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाया था।

13 घंटे में 83 महिलाओं की नसबंदी
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इस मामले में आरोपियों पर कार्रवाई करने का काम किया गया था। जिसमें स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव ने सहायक औषधि नियंत्रक राजेश क्षत्री और औषधि निरीक्षक धर्मवीर ध्रुव को 2020 में विधानसभा सत्र के दौरान निलंबित करने की घोषणा की थी। वहीं, डॉक्‍टर आरके गुप्ता कि मामले में गिरफ्तारी भी की गई थी। डॉक्‍टर आरके गुप्ता वह शख्स थे, जिन्होंने 13 घंटे में 83 महिलाओं की नसबंदी कर दी थी।

स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की जांच में दोषमुक्‍त

यह पूरा मामला गलत दवाइयों के वितरण को लेकर ज्यादा चर्चा में रहा था जिसमें सिप्रोसिन नामक टैबलेट की बात सामने आई थी। इस पूरे मामले में उस वक्त बिलासपुर के सहायक औषधि नियंत्रक राजेश क्षत्री पर दवाई वितरण कंपनी महावर फार्मा पर कार्रवाई न करने का आरोप लगा था। साल 2020 में स्वास्थ विभाग ने आरोप पत्र जारी करने के बाद इसकी जांच शुरू हुई जांच में स्वास्थ्य विभाग के ने बिलासपुर के सहायक औषधि नियंत्रक को दोषमुक्त करार कर दिया गया।

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दोषियों को बचाने पहले से ही कोर्ट में पेश कर दिए थे साक्ष्‍य- कांग्रेस
इस मामले को लेकर कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने बताया कि जांच में जो साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे जो तथ्य सामने रखे गए थे वह उस वक्त की तत्कालीन सरकार डॉक्टर रमन सिंह की सरकार में प्रस्तुत कर दिए गए थे। उसी आधार पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है। चाहे खराब सुविधा की बात, उपकरण दवाइयों और ऑपरेशन में गड़बड़ी की बात हो, उस वक्त कांग्रेस ने इसका जमकर विरोध किया था। लेकिन उस वक्त वर्तमान सरकार ने दोषियों को बचाने के लिए इस पूरे तत्व को बनाया गया और यह पूरी पटकथा तैयार की गई थी।

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लेन-देन कर बंद कर दिया गया मामला - भाजपा
इस पूरे मामले को लेकर भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि इस मामले पर कांग्रेस पार्टी ने कई बार राजनीति की है यह इनका चरित्र बताता है जिन लोगों की मौत हुई है उनके प्रति आज भी हमारी संवेदना है, लेकिन भूपेश बघेल की सरकार आज भी इस पूरे मामले में आरोपियों को बचाने का काम कर रही है। गौरी शंकर ने कहा कि जितने भी आरोपी है उनसे बड़ा लेनदेन हुआ है। इस मामले में अगर आरोपियों का नार्को टेस्ट कराया जाए तो सारा दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो जाएगा।

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