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शबनम के निकाह में सबसे पहले हुई गणेश पूजा

हिंदू परिवार द्वारा पाली-पोसी गई एक मुस्लिम लड़की की शादी में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली क्योंकि इसमें दोनों ही धर्मों की परंपराओं का मिश्रण देखने को मिला। गुजरात के वेरावल की रहने वाली शबनम शेख की हाल ही में अब्बास से शादी हुई।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 12 Jul 2018, 7:28 am
राजकोट
नवभारतटाइम्स.कॉम gujarat

हिंदू परिवार द्वारा पाली-पोसी गई एक मुस्लिम लड़की की शादी में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली क्योंकि इसमें दोनों ही धर्मों की परंपराओं का मिश्रण देखने को मिला। गुजरात के वेरावल की रहने वाली शबनम शेख की हाल ही में अब्बास से शादी हुई। शादी समारोह की शुरुआत गणेश पूजा से हुई। इसके बाद मौलवी ने उसका निकाह पढ़वाया। निकाह के बाद शबनम को पालने वाले मेरामन जोरा ने उसका विधिवत कन्यादान दिया।

शबनम जब 5 साल की थी तभी उसकी मां की मौत हो गई। उसके पिता कमरुद्दीन शेख ट्रक ड्राइवर थे और उन्हें कुछ भी सूझ नहीं रहा था कि किस तरह बेटी का लालन-पालन करें। कमरुद्दीन ने अपने मित्र जोरा से मदद मांगी, जिसके बाद जोरा परिवार ने शबनम को अपने परिवार का हिस्सा बना लिया। 2012 में जब शबनम 14 साल की थी, तब उसके पिता कमरुद्दीन अचानक शहर से गायब हो गए और कभी नहीं लौटे।

मां की मौत और पिता के लापता होने के बाद जोरा का घर ही शबनम का ठिकाना था जहां उसे अपनी मर्जी के धर्म का पालन करने की आजादी दी गई थी। जोरा के मुताबिक शबनम नियमित तौर पर नमाज पढ़ती है लेकिन हिंदू त्योहारों को भी उसी शिद्दत और उत्साह से मनाती है।

शबनम जब 20 साल की हुई तो जोरा को उसके भविष्य की चिंता सताने लगी। उन्होंने कुछ स्थानीय मुस्लिम नेताओं से संपर्क किया और शबनम की शादी के लिए अब्बास नाम के एक मुस्लिम युवक को चुना। अब्बास जावन्त्री गांव का रहने वाला है और ऑटो रिक्शा चलाता है।

रविवार को जोरा ने शबनम का कन्यादान दिया। एक ऐसे शहर में जहां कुछ सालों से दोनों समुदायों के बीच संघर्ष आम बात हो चुकी हो, वहां शबनम की शादी ने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश की है। जोरा ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'हमने शबनम को अपनी बेटी की तरह पाला। हमने उसे अपने धर्म और अपनी भाषा को चुनने, मानने की हर तरह की आजादी दी।'

शबनम कहती है, 'मैं एक हिंदू परिवार में पली-बढ़ी जहां मुझे खुद के अपने परिवार से ज्यादा लाड़-प्यार मिला। मुझे हर तरह की आजादी मिली। मैं उन्हें अपनी असली मां-बाप समझती हूं।'

जोरा के बेटे गोपाल कहते हैं, 'हमने शबनम को हमेशा अपने परिवार के सदस्य के तौर पर देखा। उसके ससुराल वाले भी हमारे इस प्रस्ताव पर सहमत हुए कि शादी दोनों ही धर्म के हिसाब से होगी।' स्थानीय मुस्लिम नेता हसम मुशागरा कहते हैं, 'यह हिंदू-मुस्लिम एकता की सबसे बड़ी मिसाल है। दोनों धर्मों के लोगों को इससे सीखना चाहिए।'

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