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Gujarat news: निगेटिव समय में दो HIV 'पॉजिटिव' कपल की लव स्टोरी

गुजरात का एक कपल ऐसा है जो एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद भी पॉजिटिव रहा। भुवन (26) और निशा (23) (काल्पनिक नाम) ने बहुत कम उम्र में एचआईवी संक्रमण का पता चलने के बाद जीवन में सभी आशाएं खो दी थीं। हालांकि, परिवार और दोस्तों के समर्थन ने उन्हें जीवन की उम्मीद नहीं खोने दी।

टाइम्स न्यूज नेटवर्क 2 Dec 2020, 1:29 pm

हाइलाइट्स

  • कहते हैं हर किसी को आसमान में छाए बादल नजर आते हैं, कम लोग होते हैं जिन्हें घने बादलों के बीच इंद्रधनुष नजर आता है
  • पॉजिटिव शब्द का प्रयोग लोगों के हिम्मत बढ़ाने के लिए इस्तेमाल, लेकिन यह शब्द एचआईवी और कोरोना काल में डरावना बला
  • एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद लोग जीने की उम्मीद खो देते हैं और अपनी जिंदगी को लेकर निगेटिव हो जाते हैं
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नवभारतटाइम्स.कॉम HIV
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सूरत
कहते हैं हर किसी को आसमान में छाए बादल नजर आते हैं, बहुत ही कम लोग होते हैं जिन्हें घने बादलों के बीच इंद्रधनुष नजर आता है। पॉजिटिव शब्द का प्रयोग लोगों के हिम्मत बढ़ाने के लिए किया जाता है। लेकिन यह शब्द एचआईवी और इन दिनों फैले कोरोना वायरस महामारी में लोगों के लिए डरावना लगता है। एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद लोग जीने की उम्मीद खो देते हैं और अपनी जिंदगी को लेकर निगेटिव हो जाते हैं।
गुजरात का एक कपल ऐसा है जो एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद भी पॉजिटिव रहा। भुवन (26) और निशा (23) (काल्पनिक नाम) ने बहुत कम उम्र में एचआईवी संक्रमण का पता चलने के बाद जीवन में सभी आशाएं खो दी थीं। हालांकि, परिवार और दोस्तों के समर्थन ने उन्हें जीवन की उम्मीद नहीं खोने दी।

अनलॉक-5 में की शादी
निशा और भुवन कहते हैं कि हम प्यार और आशा से कुछ भी जीत सकते हैं। अगर हम एचआईवी के साथ खुश रह सकते हैं तो हम कोविड -19 को भी अपने नियंत्रण में ले लेंगे। दोनों का अफेयर ऑनलाइन चला और अनलॉक 5 के दौरान दोनों ने शादी कर ली।

एचआईवी पॉजिटिव होने का पता चलते ही लगा था शॉक
भुवन ने बताया कि उसका एचआईवी पॉजिटिव होना न सिर्फ उसके लिए, बल्कि उसके पूरे परिवार के लिए शॉकिंग था। तब वह कॉलेज में पहुंचा था। 'मैंने हार नहीं मानी और हर हाल में उम्मीद बनाते हुए इस बिमारी से लड़ने की ठानी।' निशा ने बताया कि वह स्कूल में पढ़ती थी। उसके पिता को एचआईवी होने का पता चला, उसके बाद वह भी एचआईवी पॉजिटिव मिली।

माता-पिता के निधन के बाद भी नहीं छोड़ी उम्मीद
निशा ने बताया कि वह बहुत छोटी थी, तभी उसके माता-पिता गुजर गए। 'मैंने उम्मीद नहीं खोई। अपने स्कूल की पढ़ाई पूरी की और कॉलेज से डिग्री भी ली। अब मैं सोशल वर्क करती हूं।' दोनों ने बताया कि उनकी मुलाकात 2019 में ऑनलाइन हुई थी। उन्होंने एचआईवी पॉजिटिव की शादी कराने के लिए एक ब्यूरो खोला है। उन्हें मार्च 2020 में शादी करनी थी लेकिन लॉकडाउन के चलते शादी टल गई थी।

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