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बर्खास्त डीएसपी देविंदर सिंह मामले में एनआईए का शिकंजा, व्यापारी के ठिकानों पर छापा

एनआईए की टीम ने शनिवार को श्रीनगर के नगीन इलाके में व्यापारी के घर और अन्य ठिकानों पर छापे मारे। ये छापेमारी बर्खास्त डीएसपी देविंदर सिंह मामले में मारे गए हैं। इस मामले में एनआईए ने छह जुलाई को पूर्व डीएसपी समेत छह आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था।

Lipi 8 Aug 2020, 7:41 pm

हाइलाइट्स

  • एनआईए ने शनिवार को श्रीनगर में एक व्यापारी के ठिकानों पर मारे छापे
  • कालीन व्यापारी के ठिकानों पर छापेमारी देविंदर सिंह मामले में की गई है
  • घर से काफी सामान बरामद किया गया है, अब उस रिकॉर्ड की जांच होगी
  • तीन आतंकियों के साथ पिछले साल जनवरी में अरेस्ट हुआ था देविंदर सिंह
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गोविंद चौहान, श्रीनगर
एनआईए की टीम ने शनिवार को श्रीनगर के नगीन इलाके में एक कालीन व्यापारी के घर पर छापा मारा। छापे के दौरान घर के अंदर से काफी कागजात को बरामद किया गया है। उसके बाद टीम ने उसके बाकी ठिकानों पर भी छापे मारे। इस मामले में एनआईए आगे की कार्रवाई करने में लगी हुई है ताकि बाकी नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
जानकारी के अनुसार, एनआईए पुलिस के बर्खास्त डीएसपी देविंदर सिंह के मामले की जांच करने में लगी हुई है। छह जुलाई को एनआईए ने इस मामले में डीएसपी समेत छह लोगों के खिलाफ चालान पेश किया था। जिसमें बताया गया कि आतंकियों का पूरा नेटवर्क काम कर रहा है। उसके बाद अब एनआईए ने शनिवार को अचानक नगीन इलाके में रहने वाले कालीन व्यापारी साहिल जारू के घर पर छापा मारा। उसके घर से काफी सामान बरामद किया गया है। अब उस रिकॉर्ड की जांच होगी। इस व्यापारी का नाम जांच के दौरान बाहर आया था।

इस मामले में एनआईए के हाथ और सबूत लगे हैं। उन पर काम किया जा रहा है। अभी तक इस मामले में पकड़े गए आतंकी और देविंदर सिंह कई लोगों के संपर्क में थे। इसलिए उनके रिकॉर्ड की पूरी जांच की जा रही है। जोकि आतंकियों की मदद करने का काम करते थे।

पिछले साल जनवरी में पकड़ा गया था डीएसपी

बता दें कि 11 जनवरी को पुलिस ने डीएसपी देविंदर सिंह को हिजबुल के कमांडर नवीद बाबू, रफी अहमद, इरफान अहमद शफी उर्फ वकील के साथ गिरफ्तार किया था। वह आतंकियों को हथियारों के साथ लेकर जा रहा था। उन्हें कुलगाम जिले के काजीकुंड इलाके से गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद मामले को एनआईए को दे दिया गया था। एनआईए ने जांच करने के बाद चालान पेश किया। जांच के दौरान एनआईए को पता चला कि वकील पाकिस्तान में बैठे कमांडरों के संपर्क में था। इतना ही नहीं उसने दिल्ली में स्थित पाकिस्तानी दूतावास में भी अपने लिंक बनाए हुए थे। वह कश्मीर में आतंकियों का नया नेटवर्क तैयार करने के काम में लगा हुआ था।

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