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Pulwama Mastermind: एडिडास जैकेट, कश्मीरी प्रेमिका और टूटा मोबाइल...3 चीजों से पुलवामा का मास्टरमाइंड बेनकाब

Pulwama Attack News 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले में पाकिस्तान से चलने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) के आका मसूद अजहर (Masood Azhar) का नाम सामने आया था।

Authored byसुधाकर सिंह | टाइम्स न्यूज नेटवर्क 20 Jun 2021, 3:44 pm

हाइलाइट्स

  • पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड उमर फारूक की दास्तां आई सामने
  • एडिडास जैकेट, कश्मीरी प्रेमिका और मोबाइल से खुला था पूरा राज
  • एनकाउंटर में मारे जाने के बाद इदरीस भाई के रूप में हुई थी पहचान
  • बहावलपुर के लवर ब्वाय के रूप में राहुल पंडिता की किताब में जिक्र

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नीलम राज, श्रीनगर
पुलवामा हमले को छह महीने बीत चुके थे। जम्मू-कश्मीर में नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के हेड राकेश बलवाल को जांच का जिम्मा सौंपा गया था। इन सबके बीच खुफिया एजेंसियों को हमले के मास्टरमाइंड मसूद अजहर के भतीजे उमर फारूक का कोई सुराग नहीं मिल रहा था। यह नहीं साफ हो रहा था कि उमर कश्मीर के अंदर है या फिर हमले के एक महीने बाद हुए एनकाउंटर में मार दिया गया। बताते चलें कि 14 फरवरी 2019 को 40 सीआरपीएफ जवान पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए थे।
पुलवामा पर यूं खुला फारूक का राज
तो एनआईए आखिर कैसे पुलवामा के मास्टरमाइंड तक पहुंची? इसकी दिलचस्प कहानी है। उमर फारूक को दो चीजों से प्यार था- स्पोर्ट्स वियर और एक कश्मीरी युवती। लेखक और पत्रकार राहुल पंडिता की एक तस्वीर ने पुलवामा की साजिश के सच से पर्दा उठाने में अहम भूमिका निभाई। पंडिता ने केस की जांच कर रहे एनआईए और जम्मू-कश्मीर पुलिस के कई अफसरों का इंटरव्यू किया था। पुलवामा अटैक पर उन्होंने एक किताब लिखी है।

एडिडास के कपड़ों में आतंकी की तस्वीर से शक
एनआईए अफसर बलवाल ने पंडिता को इसी दौरान बताया कि मार्च में मारे गए दो आतंकियों की तस्वीर देखते हुए उन्हें महसूस हुआ कि एडिडास के कपड़ों में बच्चे जैसी शक्ल वाला शख्स कोई साधारण आदमी नहीं है। पुलिस ने उन्हें बताया कि तस्वीर में दिख रहा युवक इदरीस भाई है। बलवाल को पुलिस ने यह भी बताया था कि आईफोन और सैमसंग के दो मोबाइल जब्त किए गए हैं। लेकिन दोनों फोन टूटे हुए हैं, इसलिए किसी काम के नहीं हैं।


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फोन में तीन सेल्फी से हिट हुआ 'जैकपॉट'
बलवाल को लगा कि इन फोन से कुछ अहम सुराग मिल सकते हैं। कश्मीर आईजी के विदाई समारोह के मौके पर उन्होंने दोनों मोबाइल को इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) को भेजा जाए। इसके एक हफ्ते बाद बलवाल के फोन की घंटी बजी। यह CERT-In के एक एक्सपर्ट का फोन था। फोन पर आवाज आई, 'सर हमने एक जैकपॉट हिट किया है।' यह वाकई जैकपॉट था। मोबाइल में मौजूद 100 जीबी डेटा में तीन लोगों की सेल्फी थी। इनमें से एक शख्स की बलवाल ने इदरीस भाई के रूप में शिनाख्त की और दूसरा पुलवामा बॉम्बर आदिल डार था। इदरीस भाई के फोन में मौजूद एक और फोटो में एनआईए के जांच अफसरों ने ऐमजॉन का एक पैकेज नोटिस किया। उन्होंने कंसाइनमेंट नंबर को कंपनी के पास भेजा, जिसके बाद पता चला कि इसे वैज-उल-इस्लाम नाम के शख्स ने भेजा था। अपने पांच लेनदेन में उसने एलुमिनियम पाउडर, बैटरी, चार्जर, चाकू और 13 जोड़ी जूते ऑर्डर किए थे।


तो नहीं खुलता पुलवामा साजिश का राज
राहुल पंडिता की किताब में बताया गया है कि मसूद अजहर के भाई और जैश के ऑपरेशनल हेड रऊफ असगर ने उमर को पुलवामा में हमले के बाद अपना फोन नष्ट करने के निर्देश दिए थे। लेकिन ऐसा करने की बजाए उसने एक दूसरे टूटे हुए फोन की तस्वीर अपने चाचा को भेज दी। उसने सोचा कि ऐसा करके निर्देश का पालन हो गया है। पंडिता कहते हैं कि अगर उमर ने यह गलती नहीं की होती तो पुलवामा हमले की साजिश में मसूद अजहर और उसके भाइयों की भूमिका को साबित कर पाना बहुत कठिन होता।

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कश्मीरी प्रेमिका की वजह से नष्ट नहीं किया फोन
लेकिन सवाल यह उठता है कि ऑपरेशनल हेड के निर्देश के बावजूद उमर ने अपना फोन क्यों नष्ट नहीं किया। इसके पीछे वजह थी कश्मीर की 22 साल की युवती इंशा जान। उमर उससे बात करने के लिए इसी फोन का इस्तेमाल करता था। वह अकसर इंशा के घर पर रुकता भी था, क्योंकि उसका पिता जैश समर्थक था। इंशा की तस्वीर भी उसी फोन में थी। एक पिस्टल और असाल्ट राइफल के साथ भी फोन में उसकी तस्वीर थी। इसके साथ ही इंशा को बहावलपुर के लवर ब्वाय (किताब में इसी नाम से जिक्र) के दूसरे रिश्तों के बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता था। फारूक के कई कश्मीरी महिलाओं से संबंध थे, इसमें इंशा की चचेरी बहन भी शामिल थी।


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लव अफेयर से तह तक पहुंच गई एनआईए
हालांकि फोन का डेटा मिलने के बावजूद एनआईए अफसर बलवाल इदरीस भाई और उमर के बीच कनेक्शन नहीं जोड़ पा रहे थे। लेकिन एक बार फिर लव अफेयर की वजह से एनआईए मामले की तह तक पहुंच गई। पिछले साल फरवरी में एनआईए ने शाकिर बशीर को पकड़ा। शकीर ने आतंकियों को शरण दी थी और डार को हमले वाली जगह तक लेकर गया था। पूछताछ के दौरान बलवाल ने महसूस किया कि बशीर इस साजिश में पैसे या दुस्साहस की वजह से नहीं शामिल था। एनआईए हेडक्वॉर्टर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, 'हमारे अफसर ने उसे इदरीस भाई और इंशा जान के साथ वाली तस्वीरें दिखाईं। उसे यह बिल्कुल भरोसा नहीं हुआ कि अपनी पत्नी को छोड़कर दूसरी महिला के साथ उसके संबंध हो सकते हैं।'

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बशीर ने सुलझा दी 'इदरीस भाई' की उलझी पहेली
इस तस्वीर को देखकर बशीर को लगा कि उसके साथ धोखा हुआ। इसके बाद बशीर ने पहेली का हल निकाल दिया। थोड़ी देर बाद उसने बलवाल से कहा, 'आपको कुछ बताना है। इदरीस भाई हकीकत में उमर फारूक है। वह मसूद अजहर का भतीजा है और आईसी-814 प्लेन को हाइजैक करने वाले आतंकियों में से एक का बेटा है। उमर ही वह शख्स है, जिसने पुलवामा हमले का पूरा प्लान बनाया था।' एनआईए को इदरीस भाई को उमर फारूक साबित करने के लिए इसी की जरूरत थी। उमर फारूक ही वह जैश कमांडर था, जिसने पुलवामा हमले की साजिश रची थी।
लेखक के बारे में
सुधाकर सिंह
साहिल के सुकूं से किसे इनकार है लेकिन तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है...लिखने-पढ़ने का शौक पत्रकारिता की दुनिया में खींच लाया। पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ज़िले से ताल्लुक़। पढ़ाई लखनऊ विश्वविद्यालय से और पत्रकारिता में ईटीवी से शुरुआत। सियासत को इतिहास और वर्तमान को अतीत के आईने में देखने की दिलोदिमाग़ में हसरत उठती रहती है। राजनैतिक-ऐतिहासिक शख़्सियतों और घटनाओं पर लिखने की ख़ास चाहत। डिजिटल दुनिया में राजस्थान पत्रिका से सफ़र का आग़ाज़ करने के बाद नवभारत टाइम्स ऑनलाइन में मंज़िल का नया पड़ाव।... और पढ़ें

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