ऐपशहर

Positive News: जिस खाकी पर दागते थे गोलियां आज उसी वर्दी को सिलते हैं...'मन के शैतान' को हराकर 'संत' बने नक्सली की कहानी

Jharkhand News: कभी बिना सोचे-समझे नक्सली बन बैठा रामपोदो आज पुलिसकर्मियों (Jharkhand Police) का चहेता है। कुछ साल पहले तक वह कुंदन पाहन दस्ते का सक्रिय सदस्य था और नक्सलियों के लिए कपड़े सिलता था। लेकिन, समय के साथ जैसे ही उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, तो वह मुख्यधारा मे लौट आया।

नवभारतटाइम्स.कॉम 19 Jan 2021, 12:14 pm
रवि सिन्हा, रांची
नवभारतटाइम्स.कॉम interesting story surrendered naxalite jharkhand who stitch police uniform know about him
Positive News: जिस खाकी पर दागते थे गोलियां आज उसी वर्दी को सिलते हैं...'मन के शैतान' को हराकर 'संत' बने नक्सली की कहानी

यह कहानी है हिंसा का रास्ता छोड़ कर शांति का मार्ग चुनने वाले रामपोदो लोहरा की। कुछ साल पहले तक वह घर से दूर रह कर पुलिस (Jharkhand Police) के लिए चुनौती बने थे। उनके हाथ कभी पुलिस जवानों के शरीर पर गोलियां दागने के लिए उठते थे, लेकिन आज सिलाई मशीन पर इनकी उंगुलियां जवानों के बदन को ढंकने के लिए चल रही हैं। ऑपरेशन 'नई दिशाएं' के तहत पुलिस के सामने साल 2013 में हथियार डालने वाले रामपोदो को आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।


कभी नक्सलियों के लिए सिलते थे कपड़े, अब सिलते हैं पुलिस की वर्दी

इसी के मद्देनजर रामपोदो लोहरा को उनके हुनर के अनुसार पुलिस की ओर से रांची में जगह उपलब्ध कराई गई, जहां वे पुलिस जवानों के लिए भी वर्दी और कपड़े की सिलाई करते हैं। पुलिस की वर्दियां सिलने में रामपोदो का कोई सानी नहीं है। हालांकि, सभी को यह जानकर हैरत होती है कि आज जितनी तेजी से इनके हाथ सिलाई मशीन पर चलते हैं ,कभी यही हाथ उससे भी ज्यादा तेजी से गोलियां चलाते थे।

इसे भी पढ़ें:- झारखंड पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 10 साइबर अपराधियों को किया गिरफ्तार

कुंदन पाहन दस्ते का सक्रिय सदस्य था रामपोदो लोहरा

कभी बिना सोचे-समझे नक्सली बन बैठा रामपोदो आज पुलिसकर्मियों का चहेता है। कुछ साल पहले तक वह कुंदन पाहन दस्ते का सक्रिय सदस्य था और नक्सलियों के लिए कपड़े सिलता था। लेकिन, समय के साथ जैसे ही उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, तो वह मुख्यधारा मे लौट आया। अब वह रांची के पुलिसलाइन में पुलिस के जवानों के लिए वर्दी सिल रहा है। रामपोदो को अब अच्छाई और बुराई के बीच का फर्क समझ आ ही गया है। परिवार की अहमियत भी समझ आने लगी है।

मुख्यधारा में लौटने के बाद रामपोदो ने दूसरे नक्सलियों से की ये अपील

खुली हवा मे सांस लेना और समाज में मिलजुल कर रहना रामपोदो को भाने लगा है। वे बताते हैं कि कई बार जंगल में पुलिस ने उनकी सिलाई मशीन को जब्त कर लिया, जबकि कई बार मुठभेड़ में उनकी जान बाल-बाल बची। जिसके बाद मुख्य धारा में वापस लौटने का फैसला लिया और वे अपने परिवार के साथ रह कर आम नागरिक की तरह जीवन व्यतीत कर रहे हैं। वे भटके हुए युवाओं से भी अपील करते हैं कि सभी समाज की मुख्य धारा में लौट आएं। नक्सली दस्ते में रहने के दौरान इधर-उधर भागने के सिवा कुछ नहीं मिलता, परिवार भी पूरी तरह से बर्बाद हो जाता है।

पुलिस अधीक्षक बोले- हुनर की पहचान कर इन्हें सम्मान से जीने का मौका दिया

रांची के ग्रामीण पुलिस अधीक्षक नौशाद का कहना है कि रामपोदो ने पुलिस की 'नई दिशायें' कार्यक्रम का फायदा लेते हुए 2013 में मुख्यधारा में वापसी की थी। इनके हुनर को पहचान कर पुलिस ने इन्हें सम्मान से जीने का एक जरिया दिया। तब से ये जवानों के साथ-साथ पुलिस पदाधिकारियों की वर्दियां बना रहे हैं। रांची के ग्रामीण एसपी नौशाद आलम कहते हैं कि नक्सलियों के बहकावे में आकर जो लोग राह भटक गए थे...धीरे-धीरे वे अब अपने घरों को लौट रहे हैं।

रामपोदो लोहरा को उम्मीद, जल्द भटके हुए युवा मुख्य धारा में आएंगे

रामधारी सिंह दिनकर रचित रश्मिरथी की एक पंक्ति है 'जब नाश मनुष्य का छाता है, विवेक पहले मर जाता है।' अच्छे-भले इंसान को शैतान बनते देर नहीं लगती। लेकिन, अच्छे-बुरे का ज्ञान हो जाने पर डाकू रत्नाकर भी वाल्मीकि और अंगुलीमाल भी संत बन जाता है। रामपोदो भी अब बिलकुल बदल चुका है। उसको उम्मीद है कि जल्द ही भटके हुए युवा जल्द ही हिंसा का रास्ता छोड़ कर समाज की मुख्य धारा में शामिल होंगे।

Video: कभी था खाकी का दुश्मन, आज बन गया वर्दी सिलने वाला दोस्त

अगला लेख

Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग