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One Leg Dancer Jharkhand: हादसे ने छीने पैर लेकिन हौसला न तोड़ पाया, जानिए झारखंड की 'वन लेग डांसर' रेखा मिश्रा के बारे में

One Leg Dancer Rekha Mishra : कहते हैं कि हादसे सिर्फ शरीर तोड़ सकते हैं हिम्मत नहीं, झारखंड की रेखा मिश्रा के साथ हुए हादसे ने तो उसके पैर ही छीन लिए। लेकिन इस बेटी ने हार नहीं मानी और वो कर दिखाया जिसके बारे में जानकर आज लोग इस बिटिया की तारीफ करते नहीं थक रहे।

Edited byऋषिकेश नारायण सिंह | टाइम्स न्यूज नेटवर्क 25 Jun 2022, 10:21 am
रांची: रेखा मिश्रा तब सिर्फ 12 साल की थी जब एक बेलगाम ऑटो ने उनके सारे सपने तोड़ दिए। 2014 में एक ऑटो रिक्शा ने रेखा को जबरदस्त टक्कर मारी। इस हादसे में रेखा का दायां पैर बुरी तरह से जख्मी हो गया था। डॉक्टरों ने उसके पिता को सारी बात बताई और आखिर में रेखा की जान बचाने के लिए उसका दायां पैर काटना पड़ा। हादसे से पहले रेखा एक डांसर बनना चाहती थी, लेकिन इस दुर्घटना ने उसकी नन्ही सी जिंदगी में तूफान ला दिया। बावजूद इसके रेखा ने अपनी हिम्मत न छोड़ी। आठ साल बाद रेखा को लोग फिर से जानने लगे हैं... गजब के जज्बे वाली वन लेग डांसर के रूप में।
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वन लेग डांसर का जज्बा
रेखा मिश्रा अब 20 साल की है और शीतलपुर में रहती है। रेखा ने बातचीत के दौरान बताया कि वो धनबाद में तीन महीने अस्पताल में रही। इस दौरान बिस्तर पर लेटे हुए भी उसने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। उसने 2016 में शीतलपुर के हाई स्कूल से दसवीं और श्री श्री लक्ष्मी नारायण ट्रस्ट महिला महाविद्यालय (एसएसएलएनटी), धनबाद से 2018 में बारहवीं की। वर्तमान में, वह अपने तीसरे वर्ष में एसएसएलएनटी कॉलेज से बीएससी के फाइनल इयर में है। रेखा के मुताबिक 'दुर्घटना और इलाज के बाद, मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। फिर मैंने न सिर्फ चलने में मेहनत की बल्कि एक पैर से साइकिल चलाना भी सीखा। मैं डांसर बनने के अपने सपने को छोड़ना नहीं चाहती थी। इसलिए, मैंने टीवी या फोन पर देखकर घर पर ही अभ्यास करना शुरू कर दिया।'

मजदूर की बेटी का संघर्ष लाया रंग
अपने संघर्ष के बारे में बात करते हुए, रेखा ने आगे बताया कि 'मेरे पिता एक मजदूर हैं और हमारे पास कभी-कभी खाने केलिए खाना तक नहीं होता है। लेकिन मेरे परिवार ने हमेशा मुझे अपने जुनून का पालन करने और अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए प्रोत्साहित किया। फिर से प्रतियोगिताओं में भाग लेने से पहले मैंने एक पैर से चार साल तक अभ्यास किया। मुझे स्कूल और कॉलेज के कार्यक्रमों में कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा।'

मुझे नाज है अपनी बेटी पर- रेखा के पिता
रेखा के पिता के मुताबिक 'वो दुर्घटना के बाद ये सोचकर सिहर गई थी कि अब वह डांस नहीं कर पाएगी। वो हमेशा रोती थी कि उसके दोस्त उसे फिर कभी नाचने में सक्षम नहीं होने के बारे में चिढ़ाते थे। मैंने उसे एक दिन सिर्फ एक पैर के साथ साइकिल चलाते हुए देखा और हैरान रह गया। फिर, मैंने उससे कहा कि अगर वह एक पैर से साइकिल चला सकती है, तो वो डांस भी कर सकती है।' बस पिता के दिए इस हौसले ने एक बेटी को उम्मीदों के पंख दे दिए।
लेखक के बारे में
ऋषिकेश नारायण सिंह
नवभारत टाइम्स डिजिटल के बिहार-झारखंड प्रभारी। पत्रकारिता में जनमत टीवी, आईबीएन 7, ईटीवी बिहार-झारखंड, न्यूज18 बिहार-झारखंड से होते हुए टाइम्स इंटरनेट तक 17 साल का सफर। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से शुरुआत के बाद अब बिहार कर्मस्थल। देश, विदेश, अपराध और राजनीति की खबरों में गहरी रुचि। डिजिटल पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।... और पढ़ें

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