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लड़कों की तुलना में लड़कियां कई गुना अधिक लापता, किस राज्य से कितने बच्चे गायब, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

राजस्थान में कुल 5,354 बच्चे - 4,468 लड़कियां और 886 लड़के - लापता हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में हर दिन औसतन 12 लड़कियां और दो लड़कों समेत 14 बच्चे लापता हुए। ये आंकड़ें 2020 की तुलना में मध्य प्रदेश में लापता बच्चों के मामलों में लगभग 26 प्रतिशत की वृद्धि और राजस्थान में 41 फीसदी की बढ़ोतरी का संकेत देते हैं।

Edited byपंकज सिंह | भाषा 22 May 2022, 8:19 pm
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में 2021 में हर दिन औसतन 29 बच्चे और राजस्थान में 14 बच्चे लापता हुए हैं। गैर सरकारी संगठन क्राई (Cry Report) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर भारत के चार प्रमुख राज्यों में बच्चों के लापता होने के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। दिल्ली के आठ पुलिस जिलों में 2021 में हर दिन पांच बच्चे लापता हुए हैं। चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राइ) की 'स्टेटस रिपोर्ट ऑन मिसिंग चिल्ड्रन' रिपोर्ट (Status Report On Missing Children) में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के 58 जिलों में प्रतिदिन औसतन आठ बच्चे - छह लड़कियां और दो लड़के-लापता हुए हैं। रिपोर्ट कहती है कि 2021 में मध्य प्रदेश और राजस्थान में लापता लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में पांच गुना अधिक है।
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राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के 2020 के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में लापता बच्चों के 8,751 और राजस्थान में 3,179 मामले दर्ज किए गए। क्राइ के साझेदार सगंठनों की ओर से सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत दायर आवेदनों के जवाब में सरकारों ने बताया कि 2021 में मध्य प्रदेश में बच्चों के गुम होने के 10,648 और राजस्थान में 5,354 मामले दर्ज किए गए हैं।

आरटीआई आवेदनों के माध्यम से एकत्र किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि मध्य प्रदेश में लापता बच्चों की संख्या के मामले में शीर्ष पांच जिलों में इंदौर, भोपाल, धार, जबलपुर और रीवा शामिल हैं। रिपोर्ट कहती है, मध्य प्रदेश से प्रतिदिन औसतन 24 लड़कियां और पांच लड़कों समेत 29 बच्चे लापता हुए हैं।

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उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से 58 में 2021 में कुल 2,998 बच्चे लापता हुए जिनमें - 835 लड़के और 2,163 लड़कियां हैं। राज्य में लापता हुए बच्चों में करीब 88.9 प्रतिशत 12-18 वर्ष के आयु वर्ग के थे। आंकड़ों से पता चलता है कि उत्तर प्रदेश में लापता बच्चों की संख्या के मामले में शीर्ष पांच जिलों में लखनऊ, मुरादाबाद, कानपुर नगर, मेरठ और महाराजगंज शामिल हैं।

रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली के आठ पुलिस जिलों में 2021 में कुल 1641 बच्चे लापता हुए यानी रोज़ाना औसतन पांच बच्चे लापता हुए। दिल्ली में लापता हुए बच्चों में से करीब 85 प्रतिशत बच्चे 12-18 वर्ष की आयु के थे। उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड के अनुसार, दिल्ली में 2021 में सबसे ज्यादा बच्चे उत्तर पूर्वी जिले में गुम हुए है जबकि दक्षिण पूर्व जिले में सबसे कम लापता हुए। 12-18 आयु वर्ग के सबसे अधिक बच्चे उत्तर पूर्वी जिले से लापता हुए हैं। पश्चिम, उत्तर पश्चिम और दक्षिण जिलों का आकंड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।

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उसके मुताबिक, 2020 में 2,222 बच्चों की तस्करी की गई थी और इनमें सबसे ज्यादा संख्या राजस्थान की थी जहां 815 बच्चों की तस्करी की गई थी। उत्तर प्रदेश के केवल 58 जिलों ने आंकड़े उपलब्ध कराए। इसी तरह, दिल्ली में सभी पुलिस जिलों ने आंकड़े मुहैया नहीं कराए। वहीं हरियाणा ने आरटीआई के तहत दायर आवेदनों का जवाब नहीं दिया।

क्राइ (उत्तर) की क्षेत्रीय निदेशक सोहा मोइत्रा ने बताया, मध्य प्रदेश और राजस्थान में 2021 में लापता हुए बच्चों में 83 फीसदी से ज्यादा लड़कियां थीं। मध्य प्रदेश में पिछले साल 8,876 लड़कियों और राजस्थान में 4,468 लड़कियों के लापता होने के मामले दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि पिछले पांच वर्षों से लापता बच्चों में लड़कियों की संख्या अधिक है।
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पंकज सिंह
नवभारत टाइम्स डिजिटल में असिस्टेंट न्यूज एडिटर। पत्रकारिता में आज समाज, ईटीवी भारत, आज तक के बाद अब टाइम्स इंटरनेट के साथ सफर जारी है। पत्रकारिता में 16 साल का अनुभव। राजनीति की खबरों के साथ ही खेल की खबरों में रुचि। लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ सीखने की कोशिश जारी है।... और पढ़ें

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