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कल जो CM बनता, वह BJP में सबसे पीछे बैठा है... सिंधिया पर राहुल के इस ताने का मतलब क्या है

कांग्रेस में रहते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया और राहुल गांधी की जोड़ी की चर्चा खूब होती थी। 11 मार्च 2020 को यह जोड़ी टूट गई थी। उसके बाद राहुल गांधी ने कहा था कि उनके लिए हमारे घर के दरवाजे हमेशा खुले थे। 2 दिन बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी में गए हुए एक साल हो जाएंगे। उससे पहले 8 मार्च को राहुल ने कभी दोस्त रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया पर ताना मारा है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 9 Mar 2021, 10:32 am
ज्योतिरादित्य सिंधिया की गिनती गांधी परिवार के करीबी लोगों में होती थी। राहुल गांधी के अध्यक्ष रहते हुए पार्टी में सिंधिया का बोलबाला था। 2019 के लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल ने संगठन में जिम्मेदारियों से खुद को अलग किया तो ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कांग्रेस की राजनीति में हाशिए पर चले गए। हालत यह हो गई थी कि गृह राज्य एमपी में भी सत्ता और संगठन में उनकी अनदेखी की जाने लगी। उनके करीबी बताते हैं कि सिंधिया ने अपनी बात कांग्रेस आलाकमान के पास रखने की कई बार कोशिश की, लेकिन सुनी नहीं गई। बेआबरू होकर उन्होंने कांग्रेस से अलग होने का फैसला किया और एमपी में कांग्रेस की सरकार गिर गई। साल बार बाद उनके पुराने मित्र राहुल गांधी ने सिंधिया की हालत पर ताना मारा है।
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कल जो CM बनता, वह BJP में सबसे पीछे बैठा है... सिंधिया पर राहुल के इस ताने का मतलब क्या है


मेरे घर में थी सीधी एंट्री

11 मार्च 2020 को ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी की सदस्या ग्रहण की थी। गले में भगवा पट्टा डलते ही उन्होंने पीएम मोदी का खूब गुणगान किया था। उसी दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के जाने के बाद राहुल गांधी की पहली प्रतिक्रिया आई थी। राहुल ने कहा था कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में इकलौते ऐसे शख्स थे, जो कभी भी मेरे घर आ सकते थे। इस बयान के बाद पूरे साल भर राहुल ने कभी सिंधिया का नाम नहीं लिया। वहीं, सिंधिया भी इस दौरान राहुल पर डायरेक्ट हिट करने से बचते रहे।

साल भर बाद मारा ताना

ज्योतिरादित्य सिंधिया जब बीजेपी में अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ आए थे, तब कई कयास लगाए जा रहे थे। चर्चा थी कि उन्हें केंद्र में मंत्री पद भी मिलेगा। सिंधिया को केंद्र में तो कोई जिम्मेदारी नहीं मिली है, लेकिन राज्य में उनके लोगों को खूब भाव मिला है। साथ ही केंद्र और राज्य की सरकारें उनकी हर मांग को पूरी कर रही है। वहीं, राहुल गांधी ने युवा कांग्रेस की बैठक में ज्योतिरादित्य सिंधिया पर ताना मारा है। उन्होंने कहा है कि सिंधिया बीजेपी में 'बैकबेंचर' हैं। आप लोग लिखकर ले लीजिए, वह बीजेपी में कभी मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे। उन्हें यहां वापस आना होगा।

क्या कंफ्यूज हैं राहुल?

दरअसल, राहुल गांधी का यह सिंधिया पर ताना ऐसे वक्त पर आया है, जब उनकी पार्टी खुद ही कलह से जूझ रही है। ऐसे में सवाल यह भी है कि जब एमपी में पूरा नाटक चल रहा था, तब राहुल या प्रियंका गांधी ने राजस्थान की तरह कोई सक्रियता नहीं दिखाई थी। सिंधिया बार-बार कांग्रेस आलाकमान से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे लेकिन उन्हें सोनिया गांधी से मिलने का समय नहीं मिला। एक मुलाकात हुई भी तो सिंधिया की बातों पर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में राहुल गांधी के इस ताने का मायने क्या है। 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान सिंधिया ने एमपी में जी तोड़ मेहनत की थी। मगर कुर्सी कमलनाथ को सौंप दिया गया था।

उसी वक्त से नाराज थे सिंधिया

कमलनाथ को कुर्सी सौंपने के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक तस्वीर शेयर की थी। इस तस्वीर में राहुल गांधी, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया थे। सिंधिया को देख लग रहा था कि वह इस फैसले से खुश नहीं हैं। वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक भी यह स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। एमपी कांग्रेस की सरकार तो बन गई लेकिन गुटबाजी भी चरम पर पहुंच गई। सिंधिया खुद तो सरकार में शामिल नहीं हुए लेकिन अपने लोगों मंत्रिमंडल में शामिल करवाने में कामयाब रहे।

सिंधिया को यूपी किया शिफ्ट

एमपी विधानसभा चुनाव के कुछ महीने बाद ही 2019 के लोकसभा चुनाव थे। कांग्रेस आलाकमान को यह खबर थी कि सिंधिया इस फैसले से खुश नहीं हैं। पार्टी में विरोध को थामने के लिए राहुल गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रियंका गांधी के साथ यूपी भेज दिया। यूपी में सिंधिया तो कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाए, उल्टे एमपी गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट से चुनाव हार गए। चुनाव हारने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ दिन तक सक्रिय राजनीति से दूर रहे। जब वह लौटे तो पावर के लिए संघर्ष करने लगे। उनके समर्थक एमपी में लगातार उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे थे। साथ ही सरकार में दखल भी चाहते थे।

कांग्रेस ने नहीं मानी थी उनकी मांग

वहीं, एमपी कांग्रेस के कुछ बड़े नेता यह कतई नहीं चाहते थे कि सिंधिया के हाथ में संगठन हो। उन्हें लगता था कि संगठन की कमान सिंधिया के हाथ में जाने के बाद सरकार में भी उनका दखल बढ़ जाएगा। सिंधिया के लिए मांग उनके समर्थक मंत्री करते थे। मगर दिल्ली से लेकर भोपाल तक में उनकी मांग सुनी नहीं जा रही थी। उसके बाद सिंधिया ने खुद प्रेशर बनाने के लिए अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर कहा कि हम सड़क पर उतर जाएंगे। साथ ही कर्जमाफी को लेकर भी सवाल उठाया। जवाब में कमलनाथ ने कहा कि उतर जाइए। उसके बाद सिंधिया के तेवर बदल गए।

कांग्रेस की तरफ से नहीं हुई कोई कोशिश

आज राहुल गांधी ज्योतिरादित्य सिंधिया पर ताना मार रहे हैं। मगर में सियासी उठा-पठक के दौरान कथित रूप से कांग्रेस आलाकमान चादर तानकर सोया हुआ था। पार्टी के विधायक जब यहां से गायब हो रहे थे, तभी दिल्ली में बैठे कांग्रेस नेताओं ने सिंधिया और उनके लोगों को रोकने की कोई पहल नहीं की थी। एमपी कांग्रेस के कुछ नेता ही गुरुग्राम और बेंगलुरु का दौरा कर रहे थे। ऐसे में राहुल के ताने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

युवा कैसे करें भरोसा?

एक समय में कांग्रेस के अंदर तिकड़ी का बोलबाला था। इस तिकड़ी में राहुल गांधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट थे। इन जोश और वर्क स्टाइल को देख लगता था कि कांग्रेस की कमान अब युवा हाथों में है। 2018 के आखिर में 3 राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे थे। यह तिकड़ी पूरे दमखम के साथ मैदान में थी। सफलता भी जबरदस्त हाथ लगी थी। जीत मिलने के बाद राजस्थान और एमपी में इन युवा नेताओं को साइड कर पार्टी के वरिष्ठों के हाथ में सत्ता सौंप दिया गया। इसके साथ ही कांग्रेस के युवा ब्रिगेड में फूट की नींव पड़ गई थी। राहुल के ताने पर अब सवाल हैं कि उन्होंने क्यों नहीं इन युवा नेताओं को मौका दिया।

सिंधिया भी नहीं लेते राहुल का नाम

वहीं, बीजेपी में शामिल होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी राहुल गांधी पर कभी सीधा अटैक नहीं करते हैं। वह कांग्रेस पार्टी पर जरूर खुल कर हमला करने लगे हैं। पीएम मोदी पर राहुल ने जब एक बार हमला किया था, तब सिंधिया ने कहा था कि एक तरफ विकास और सुरक्षा वाली सोच है, वहीं दूसरी तरफ यह केवल टिप्पणी करने तक सीमित रहने वाली सोच है। दूसरी तरफ से सिंधिया का मतलब राहुल गांधी से था।

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