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भय्यूजी महाराज का अंतिम संस्कार, बेटी ने दी मुखाग्नि, नहीं पहुंचा कोई बड़ा नेता

भय्यूजी महाराज का बुधवार को इंदौर में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनकी बड़ी बेटी कुहू ने उन्हें मुखाग्नि दी। उल्लेखनीय बात यह रही कि भय्यूजी के अंतिम संस्कार में मध्यप्रदेश का कोई बड़ा नेता शामिल नही हुआ। भय्यूजी के अंतिम संस्कार में महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में लोग आए। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने अपने ओएसडी को भेजा। शिवसेना के एक सांसद और दो विधायक भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहे।

अरुण दीक्षित | नवभारत टाइम्स 13 Jun 2018, 7:01 pm
भोपाल
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भय्यूजी महाराज के शव को मुखाग्नि देतीं उनकी बड़ी बेटी

भय्यूजी महाराज का बुधवार को इंदौर में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनकी बड़ी बेटी कुहू ने उन्हें मुखाग्नि दी। हालांकि भय्यूजी के अंतिम संस्कार में मध्यप्रदेश का कोई भी बड़ा नेता शामिल नहीं हुआ। भय्यूजी के अंतिम संस्कार में महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में लोग आए। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने अपने ओएसडी को भेजा। शिवसेना के एक सांसद और दो विधायक भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहे।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और इंदौर के बड़े नेता कैलाश विजयवर्गीय अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे। दावा किया जाता है कि भय्यूजी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी करीबी थे, लेकिन अंतिम संस्कार में पीएम भी शामिल नहीं हुए।

उधर, पुलिस अब इस आत्महत्या को भय्यूजी महाराज की पारिवारिक कलह तक ही सीमित रखना चाहती है। शायद यही वजह है कि अब उनके मोबाइल की कॉल डीटेल और अन्य मुद्दों पर पुलिस बात ही नहीं कर रही है।

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कौन थीं वह संदिग्ध महिला?
पुलिस यह भी नहीं बता रही है कि आखिर ऐसी क्या वजह रही कि पुणे जा रहे भय्यू जी महाराज बीच रास्ते से वापस लौट आए? वापस आकर वह एक रेस्तरां में किस महिला से मिले थे? करीब एक घंटे तक वह उसके साथ रहे थे। पुलिस अभी तक यह नहीं बता पा रही है कि आलीशान घर और आश्रम होने के बाद भी भय्यू जी महाराज उस महिला से रेस्तरां में क्यों मिले। रेस्तरां के सीसीटीवी फुटेज में उस महिला की गाड़ी का नंबर भी साफ दिखाई दे रहा है।

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पुलिस मुख्यालय सूत्रों के अनुसार, भय्यूजी महाराज के मोबाइल की प्राथमिक जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं वे उनकी छवि के अनुरूप नही हैं। यही वजह है कि पुलिस अधिकारियों ने मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं को अंतिम संस्कार में न आने की सलाह दी गई। कहा तो यह भी जा रहा है कि अब पुलिस भय्यूजी के मोबाइल डीटेल्स पर ज्यादा ध्यान न देकर आत्महत्या को पारिवारिक कलह तक सीमित रखना चाहती है।

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अरुण दीक्षित

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