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एमपी: बाघों की संख्या में लगातार कमी जारी

इसे महज संयोग ही कहा जाएगा कि जिस दिन दुनिया में बाघों की संख्या बढ़ने की...

नवभारतटाइम्स.कॉम 12 Apr 2016, 10:02 pm
अरुण दीक्षित, भोपाल
नवभारतटाइम्स.कॉम tigers continue dying in madhya pradesh
एमपी: बाघों की संख्या में लगातार कमी जारी


इसे महज संयोग ही कहा जाएगा कि जिस दिन दुनिया में बाघों की संख्या बढ़ने की खबर आई उसी दिन मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से प्रदेश के एकमात्र नीली आंखों वाले बाघ (टी-13) की मौत की खबर आई। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सबसे लोकप्रिय नीली आंखों वाले बाघ की मौत पर वन विभाग के अफसरों की भूमिका पर सवाल उठे हैं। विभाग के अधिकारी बाघ की मौत को स्वाभाविक मौत बता रहे हैं। जबकि मौत के हालात कुछ और कहानी बयां कर रहे हैं।

कुछ साल पहले तक मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा हासिल था। 2011-12 में प्रदेश से यह दर्जा छिना। आंकड़ों के मुताबिक पिछले सवा दो साल में मध्य प्रदेश में 39 बाघों की असमय मौत हो चुकी है। वन विभाग के मुखिया नरेन्द्र कुमार का तर्क है कि हर बाघ के पीछे नहीं लगा जा सकता है। वह यह भी मानते हैं कि उनके विभाग में अमले की कमी है। इस वजह से बाघों का शिकार हो जाता है।

बाघों की सुरक्षा और उनकी देखभाल से जुड़े सवालों पर उनके पास कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है। नरेन्द्र कुमार के मुताबिक मध्य प्रदेश में 2014 की गिनती के मुताबिक 308 बाघ है। उनका यह भी कहना है कि हो सकता है कि यह संख्या रेकॉर्ड से कहीं ज्यादा हो। अगली गिनती 2018 में होनी है।

जहां तक बांधवगढ़ के नीली आंखों वाले बाघ की मौत का सवाल है, वन विभाग उसकी जानकारी देने के बजाय छिपाने की कोशिश में लगा हुआ है। प्रदेश के वनमंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने कहा है कि नीली आंखों वाले बाघ की उम्र ज्यादा हो गई थी। उसका दूसरे बाघ से झगड़ा हुआ था। जिस वजह से वह घायल हो गया था। उसे दवा दी गई थी। लेकिन उसकी मौत हो गयी।

शेजवार ने बताया कि अब हर बाघ की मौत की जांच करवाएंगे। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अफसरों ने भी इसी तरह की कहानी सुनाई है। मौत के बाद फील्ड डायरेक्टर के. रमण ने दावा किया था कि बाघ की गर्दन और आंखों के ऊपर चोट के निशान थे। ऐसा लगता है कि टेरिटरी को लेकर उसका दूसरे बाघ से झगड़ा हुआ होगा। जिस वजह से वह घायल हुआ है।

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