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संघ की 'शरण' में ज्योतिरादित्य सिंधिया, बीजेपी के बागी अब होंगे शांत?

ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में शामिल होने के बाद पहली बार नागपुर स्थित संघ मुख्यालय पहुंचे थे। वहां उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत से बात की है। हालांकि दोनों में क्या बात हुई है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।

नवभारतटाइम्स.कॉम 26 Aug 2020, 2:28 pm

हाइलाइट्स

हाइलाइट्स
  • पहली बार नागपुर स्थित संघ मुख्यालय पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया
  • कई तरह के लगाए जा रहे हैं कयास, क्या अवरोधों को दूर गए थे सिंधिया?
  • क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी के साथ-साथ संघ के लोगों को भी साधने में लगे हैं
  • उपचुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा है दांव पर
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भोपाल
ग्वालियर में मेगा शो के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया संघ की शरण में पहुंचे हैं। मंगलवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया नागपुर स्थित संघ मुख्यालय पहुंचे थे। वहां उन्होंने संघ के लोगों से मुलाकात की है। बीजेपी में शामिल होने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया पहली बार संघ दफ्तर पहुंचे थे। उपचुनाव से पहले संघ मुख्यालय जाकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि अब वह बीजेपी और आरएसएस में पूरी तरह से रच-बस गए हैं। क्योंकि ग्वालियर-चंबल में उपचुनाव की जिम्मेदारी बीजेपी ने संघ के करीबी लोगों को ही सौंपा है।

दरअसल, उपचुनाव से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया पार्टी के नेताओं के साथ ही संघ को भी साधने की कोशिश में लगे हैं। क्योंकि उनके साथ आए लोगों के लिए पार्टी अभी कई अवरोध हैं। ग्वालियर-चंबल से लेकर निमाड़ इलाके में तक में इसकी झलक दिखाई दी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों के आने से बीजेपी के कुछ पूर्व नेता अपने करियर को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में सिंधिया के लोगों की राह आसान नहीं है। अपने ग्वालियर दौरे के दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे कुछ हद तक दूर करने की कोशिश की है।

संघ के करीबियों को जिम्मेदारी
ग्वालियर-चंबल में उपचुनाव जिताने की जिम्मेदारी बीजेपी ने अपने पुराने नेताओं को सौंपी है। इनमें कई ऐसे नेता हैं, जो कभी ज्योतिरादित्य सिंधिया के धुर विरोधी रहे हैं। ग्वालियर में पार्टी ने बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा और पूर्व मंत्री जयभान सिंह पवैया पर चुनावी फिजा बदलने की जिम्मेदारी सौंपी है। सूत्र बताते हैं कि इन दोनों नेताओं को संघ के निर्देश पर ग्वालियर क्षेत्र में एक्टिव किया गया है। ताकि बाहर यह संदेश जाए कि कहीं कोई नाराजगी नहीं हैं।

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दोनों नेताओं से बात
ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ग्वालियर दौरे पर सीएम शिवराज सिंह चौहान भी मौजूद थे। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने ग्वालियर में जयभान सिंह पवैया से अलग बात भी की थी। इसके साथ ही ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके पीठ पर हाथ रखे भी नजर आए थे। इन तस्वीरों के जरिए यह मैसेज देने की कोशिश हुई थी कि अब पार्टी के अंदर सब ठीक हैं।

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जयभान के ट्वीट से अलग संदेश
मेल-मिलाप के कुछ घंटे बाद ही जयभान सिंह पवैया ने एक ट्वीट किया। उसे ट्वीट उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया है, लेकिन उन्होंने अपने तेवर स्पष्ट कर दिए हैं। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि उनकी नाराजगी दूर नहीं हुई है। उन्होंने ट्वीट किया था कि सांप की 2 जीभ होती हैं और आदमी की एक, सौभाग्य से हम तो मनुष्य हैं न। राजनीति में वक्त के साथ दोस्त और दुश्मन तो बदल सकते हैं, मगर सैंद्धांतिक मुद्दे मेरे लिए कल थे, वे आज भी हैं। जय श्री राम...।


संघ की शरण में सिंधिया
कयास लगाए जा रहे हैं कि इन्हीं अवरोधों को सुलझाने के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया नागपुर स्थित संघ मुख्यालय पहुंचे थे। कहा जाता है कि बीजेपी की राजनीति में मजबूती के साथ खड़े रहने के लिए संघ में भी पैठ जरूरी है। संघ मुख्यालय से निकलने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि राष्ट्र के किसी भी व्यक्ति को आकर यहां प्रेरणा मिलती है। संकल्प के साथ राष्ट्र के प्रति आगे बढ़ने का एक नई उर्जा यहां प्राप्त होती है।

वहीं, कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर चल रहे विवाद पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि यह उनका अंदरूनी मामला है। उस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं बीजेपी का कार्यकर्ता हूं। वहीं, संघ प्रमुख से मुलाकात पर उन्होंने कहा कि अभी देखिए।


कांग्रेस ने कसा तंज
कांग्रेस नेता और पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के नागपुर दौरे पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि नागपुर जाने वाले लोग बाबा साहब अंबेडकर के स्मारक पर जाते हैं, लेकिन सिंधिया अपनी विचारधार के विपरीत संघ के चरणों में जाकर संघम शरणम् गच्छामि का राग अलाप रहे हैं।

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