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इंदौर के अस्पतालों में क्या है बेड का हाल? एंबुलेंस में हॉस्पिटल के गेट पर दम तोड़ रहे मरीज

कोरोना संक्रमण के बीच इंदौर के तमाम बड़े अस्पतालों में बेड की कमी है। ऐसे में मरीजों का इलाज संभव नहीं हो पा रहा है। हर दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें मरीज अस्पताल के गेटों पर दम तोड़ रहे हैं।

Lipi 19 Apr 2021, 5:56 pm

हाइलाइट्स

हाइलाइट्स
  • कोरोना महामारी के बीच इंदौर के अस्पताल बेड की कमी से जूझ रहे
  • बेड न होने की वजह से अस्पताल में भर्ती नहीं हो पा रहे नए मरीज
  • बेड के इंतजार में अस्पतालों के गेट पर दम तोड़ रहे मरीज
  • इंदौर के ज्यादातर अस्पतालों में है आईसीयू बेड की किल्लत
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इंदौर
अस्पतालों में बेड की कमी इंदौर वासियों को रुला रही है। बेड नहीं मिलने से मरीज और परिजन दर-दर भटकने को मजबूर हैं। कोई अस्पताल-अस्पताल भटक रहा है तो किसी ने भर्ती के इंतजार में दम तोड़ दिया है। इंदौर के 103 कोविड अस्पतालों में आईसीयू के 1274, एचडीयू के 1463, ऑक्सीजन के 2639 और आइसोलेशन के 1499 बेड हैं, लेकिन एक्टिव मरीजों का आंकड़ा 12 हजार के पार होने से बेड आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहे हैं।

इंदौर के छोटे अस्पताल से लेकर बड़े अस्पतालों में भी बेड उपलब्ध नहीं है। इंदौर के सबसे बड़े प्राइवेट अस्पताल अरविंदो में भी बेड उपलब्ध नहीं है। यहां टोटल 1600 बेड है। विशेष जुपिटर अस्पताल में भी यही हाल है, यहां टोटल 70 बेड हैं। आरके अस्पताल में लगभग 40 बेड हैं, यहां भी बेड उपलब्ध नहीं है। 402 बेड वाला सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भी बुरा हाल है, यहां भी बेड उपलब्ध नहीं है।

मरीज ने एंबुलेंस में तोड़ दिया दम
इंदौर के सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण एक मरीज ने एंबुलेंस में ही दम तोड़ दिया। दरअसल, अमित सिंह बघेल निवासी सतना 2 दिन से पीसी मेमोरियल हॉस्पिटल गौरी नगर में टाइफाइड के इलाज हेतु भर्ती हुए थे। परिजनों के मुताबिक अस्पताल में आईसीयू वार्ड की व्यवस्था नहीं होने के कारण अस्पताल ने सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल ले जाने के लिए कहा। परिवार वाले अमित को अस्पताल की एंबुलेंस में लेकर सुबह 11:00 बजे करीब सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल पहुंचे, जहां घंटों के इंतजार के बाद भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया। इसके साथ ही उसका इलाज नहीं किया गया। उसने एंबुलेंस में दम तोड़ दिया।

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परिजनों को नहीं मिल रही जानकरी

यही नहीं अन्य मरीजों के परिजन भी अस्पताल में परेशान होते दिख रहे हैं। किसी को अपने मरीज की कई दिनों से क्या स्थिति है जानकारी तक नहीं है। वहीं, कोरोना के मरीजों को भी रिक्शा में बिठाकर परिजन सरकारी अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन कहीं भी बेड उपलब्ध नहीं मिल पा रहा है।

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कोरोना के वृद्ध मरीज को लेकर रिक्शा में सरकारी अस्पतालों में दर-दर भटक रहे हैं लेकिन उन्हें कहीं बेड नहीं मिल पा रहा है। मीडिया में पब्लिसिटी पाने वाले मंत्री को भी मदद के लिए फोन लगाया गया लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली।

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