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Niwari News: मृत नवजात को घर ले जा रहे मां-बाप को एंबुलेंस ने सुनसान रास्ते पर छोड़ा, फिर मानव दूत बनकर आया यह पुलिस अधिकारी

एमपी के निवाड़ी जिले में एक प्राइवेट एंबुलेंस के ड्राइवर ने अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी। अपने मृत नवजात को घर लेकर जा रहे मां-बाप को उसने रात के अंधेरे में आधे रास्ते में उतार दिया क्योंकि उनके पास किराये के पूरे पैसे नहीं था। तभी लाचार मां-बाप के लिए पृथ्वीपुर के एसडीओपी मानव दूत बनकर पहुंचे। उन्होंने अपनी गाड़ी से उन्हें घर तक पहुंचाया और मानवता की लाज रख ली।

guest Narendra-Arjariya | Lipi 24 Mar 2022, 10:48 pm
नरेंद्र अरजरिया, निवाड़ीः पिता की गोद में शॉल में लिपटा मृत नवजात, अपने बेटे को खो चुकी मां के कलेजे से निकलती रूदाली चीत्कार, सुनसान रात में वाहन का इंतजार कर रहे तीन लोग, जेब में सिर्फ 1050 रुपये, मृत बच्चे को घर तक ले जाने की चुनौती, प्राइवेट एम्बुलेंस चालक की बेशर्मी और खाकी की दरियादिली। ये दर्दनाक दास्तां सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। यह घटना सुविधाओं के नाम पर चल रही प्राइवेट एम्बुलेंस चालकों की तरफ से इंसानियत के मुंह पर करारा तमाचा है।
नवभारतटाइम्स.कॉम niwari


अपने पेशे को बदनाम करते हुए एक प्राइवेट एम्बुलेंस चालक ने बेशर्मी की सारी हदें पार कर दी। सिर्फ पैसों के लालच में एक महिला और उसके मृत बच्चे को आधी रात में सुनसान रास्ते पर छोड़ दिया। कारण सिर्फ यह था कि उनके पास किराये के पूरे पैसे नहीं थे। अपनी किस्मत को कोसती मां का मानवता से विश्वास उठ जाता, इससे पहले ही मानव दूत बनकर एक पुलिस अधिकारी पहुंचा। उसने मां और बच्चे को सुऱक्षित घर तो पहुंचाया ही, विपत्ति के समय मदद का एक उदाहरण भी पेश कर दिया।

सुनसान रास्ते पर अंधेरे में जब मां अपने लाल का शव गोद में लिए अपनी विवशता पर रो रही थी, तभी पृथ्वीपुर के एसडीओपी वहां पहुंच गए। उन्होंने पीड़ितों को सही सलामत घर पहुंचाया। अपने पेशे की लाज रखते हुए एसडीओपी ने जो नेक काम किया, उससे पीड़ित ही नहीं, पूरी मानवता उनकी ऋणी हो गई।

निवाड़ी जिले के मनेथा निवासी राजाराम कुशवाहा की पत्नी जसोदा बाई ने चार दिन पूर्व एक बच्चे को जन्म दिया था। बच्चे का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण उसका पृथ्वीपुर के अस्पताल में इलाज चल रहा था। अच्छे इलाज के लिए बच्चे को पृथ्वीपुर से झांसी रेफर कर दिया गया। झांसी में बच्चे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया और अस्पताल प्रबंधन ने उसे घर ले जाने के लिए कह दिया। यहां से पीड़ित मां बाप के लिए चुनौती भरा सफर शुरू हो गया।

एक पिता अपनी गोद में शॉल में लिपटे मृत बच्चे को लेकर झांसी से घर जाने के लिए निकला। पिता की जेब में सिर्फ 1050 रुपये थे। मनेथा गांव तक जाने के लिए प्राइवेट एम्बुलेंस चालक ने इससे दोगुने पैसे मांगे थे। आधा किराया होने के कारण एम्बुलेंस चालक ने मां, बाप और मृत बच्चे को आधे रास्ते यानी पृथ्वीपुर में ही उतार दिया और वहां से चला गया।

लाचार पिता अपने मृत बच्चे को पैदल ही मनेथा तक ले जाने के लिए चल रड़ा। साथ चल रही मां के रोने की आवाज रात के अंधेरे में दूर-दूर तक जा रही थी। तभी रात्रि गस्त कर रहे पृथ्वीपुर एसडीओपी संतोष पटेल, अपने चालक कुमार शानू और गन मैन पंकज यादव के साथ पीड़ित मां बाप के पास पहुंचे। उन्होंने पूरा घटनाक्रम जाना। पीड़ित मां बाप के लिए फरिश्ते के रूप में पहुंचे एसडीओपी ने उन्हें सही सलामत उनके घर मनेथा तक पहुंचाया। एम्बुलेंस चालक की हरकत की वजह से उसके लिए रास्ते भर पीड़ित मां बाप के मन से क्या निकला होगा इसका तो पता नहीं, लेकिन एसडीओपी संतोष पटेल के लिए दुआएं जरूर निकली।
लेखक के बारे में
आदित्य पूजन
आदित्य पूजन नवभारत टाइम्स में असिस्टेंट न्यूज एडिटर पर कार्यरत हैं। दैनिक जागरण, दैनिक भारस्कर और जी ग्रुप में काम कर चुके हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के बाद अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। राजनीति और खेल जगत की खबरों से काफी लगाव है।... और पढ़ें

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