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MP News: मां की ममता से हार गया तेंदुआ, खूंखार जानवर के चंगुल से अपने बेटे को बचा लाई आदिवासी महिला

एमपी में सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व (Sanjay Tiger Reserve In Sidhi) के बफर जोन में रविवार शाम तेंदुआ एक आठ साल के बच्चे के लेकर भाग गया, लेकिन मां की हिम्मत के आगे वह पस्त हो गया। बच्चे के मां ने तेंदुए के पीछे दौ़ड़ लगा दी और जंगल में उससे भिड़ गई। वह अपने बेटे को तेंदुए के चंगुल से छुड़ा लाई। तेंदुए के वार से घायल हुए बच्चे का अस्पताल में इलाज चल रहा है, लेकिन उसकी जान को कोई खतरा नहीं है।

Lipi 30 Nov 2021, 6:44 pm

हाइलाइट्स

  • तेंदुए के चंगुल से बेटे को छुड़ा लाई मां
  • सीधी जिले के संगय टाइगर बफर जोन में रविवार का मामला
  • बच्चे को लेकर भगा तेंदुआ, मां ने पीछे दौड़ लगा दी
  • जंगल में तेंदुए के पंजे से मां ने बेटे को छीना
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सीधी
ममता का दूसरा नाम है मां। अपने बच्चों के लिए बड़े से बड़ा जोखिम उठाने से भी मां गुरेज नहीं करती। ऐसा ही एक वाकया मध्य प्रदेश के सीधी जिले से सामने आया है जहां अपने बेटे की जान बचाने के लिए मां खूंखार तेंदुए से भिड़ (Mother Fights With Leopard) गई। मां के दुस्साहस के आगे आखिरकार तेंदुए को हार माननी पड़ी और बच्चे को छोड़कर भागना पड़ा।
सीधी जिले में कुसमी ब्लॉक के संजय टाइगर रिजर्व (Sanjay Tiger Reserve In Sidhi) के बफर जोन में टमसार रेंज के अंतर्गत तीन ओर पहाड़ों से घिरे बाड़ी-झरिया गांव में यह नजारा देखने को मिला। बैगा समाज की आदिवासी मां अपने बेटे की जान को खतरे में देखकर अपनी जान की परवाह किये बगैर जंगली तेंदुए से टकरा गई। घटना में आठ वर्षीय बेटे राहुल के गाल, पीठ और बाईं आंख में गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन मां की हिम्मत ने उसकी जन बचा ली। घटना की जानकारी मिलने पर वन विभाग टमसार की टीम रात में ही घायल बच्चे को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कुसमी लेकर आई जहां उसका इलाज चल रहा है।

पूरा मामला रविवार की शाम करीब 7 बजे का है। ठंड से बचाव के लिए किरण बैगा अपने बच्चों के साथ घर के पास अलाव जलाकर बैठी हुई थी। एक बच्चा उसके गोद में था। बाकी दो अगल-बगल बैठे थे। उसी समय पीछे से अचानक जंगली तेंदुआ आया और उसके आठ वर्षीय बेटे को मुंह में दबाकर (Leopard Attacks 8 Year Old Kid)वहां से भागने लगा।

मां ने देखा तो चीखती-चिल्लाती उसके पीछे दौड़ पड़ी। जंगल में फैले अंधेरे के बीच वह बदहवास तेंदुए के पीछे दौड़ती रही। करीब एक किलोमीटर तक चलने के बाद तेंदुआ एक जगह रुका और बच्चे को पंजों से दबोचकर बैठ गया। मां ने हिम्मत करके उसके पंजे से बच्चे को छुड़ा लिया और शोर मचाने लगी।

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तेंदुआ भी इतनी आसानी से हार मानने वाला नहीं था। उसने बच्चे को छीनने के लिए दोबारा झपट्टा मारा, लेकिन मां ने उसे कसकर अपनी बांहों में लिपटा रखा था। तेंदुए ने झपट्टा मारा तो मां ने उसके उसके पंजे को पकड़कर जोर से धक्का दे दिया। इतने में गांव के लोग भी वहां पहुंच गए और तेंदुआ वहां से जंगल की ओर भाग गया। महिला ने बताया कि इसके बाद वह बेहोश हो गई। जब आंखें खुली तो वह अस्पताल में थी।

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संजय टइगर बफर जोन के सर्किल ऑफिसर असीम भूरिया ने बताया कि तेंदुए के वार से बच्चे की पीठ, गाल और आंख में चोटें आई हैं। उसे रात में ही कुसमी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है। परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने के साथ इलाज का पूरा खर्च भी वन विभाग उठाएगा।

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