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गूगल को भी मात देता है रीवा का यशस्वी, 14 महीने की उम्र में बना दिया वर्ल्ड रेकॉर्ड

एमपी के रीवा जिले में रहने वाले यशस्वी मिश्रा की उम्र महज 14 महीने है, लेकिन उसके कारनामे ऐसे हैं कि बड़े-बड़े सूरमा भी पानी मांगने लगें। यह नन्हा बालक दुनिया के 26 देशों के झंडों को न केवल पहचानता है, बल्कि उससे जुड़ी तमाम जानकारियां भी पलक झपकते ही बता सकता है। उसकी अद्भुत प्रतिभा के चलते उसका नाम लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड में दर्ज किया गया है।

guest Hariom-Singh | Lipi 16 Apr 2022, 9:55 pm
हरिओम सिंह, रीवाः मध्य प्रदेश में रीवा जिले के समान क्षेत्र में रहने वाले यशस्वी मिश्रा की उम्र महज 14 महीने है, लेकिन उसके कारनामे ऐसे हैं कि गूगल भी शर्मिंदा हो जाए। इस छोटी उम्र में उसे रीवा का सर्च इंजन कहा जाने लगा है। उसकी मेमोरी पावर ऐसी है कि वह किसी भी चीज को सेकंड्स के अंदर पहचान लेता है और उसके बारे में तमाम जानकारियां दे सकता है। उसकी इस अद्भुत प्रतिभा को लंदन के वर्ल्ड बुक ऑफ रेकॉर्ड में जगह मिली है।
नवभारतटाइम्स.कॉम yashaswi mishra


समान क्षेत्र में रहने वाले 14 माह के एक नन्हे से बच्चे ने वह कारनामा कर दिखाया है जिससे अब उसे रीवा का सर्च इंजन कहा जाने लगा है. 14 माह के बच्चे ने गूगल को पीछे करते हुए अद्भुत मेमोरी पावर बनाई है जिससे वह सेकंडो में चीजों को पहचान लेता है. जिसके लिए नन्हे से बच्चे यशस्वी मिश्रा को लंदन के वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड के खिताब से नवाजा गया है. बताया जा रहा है कि बच्चे ने 6 से 8 माह की उम्र में ही अद्भुत प्रतिभा हासिल कर ली थी तथा 14 माह की उम्र में आते आते लंदन की वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड एजेंसी ने उसकी प्रतिभा को पहचानते हुए उसे खिताब से नवाजा है.

गूगल को तो आप सब जानते ही हैं। गूगल पर एक शब्द लिखते ही उसके बारे में तमाम जानकारियां सामने स्क्रीन पर आ जाती हैं। गूगल सर्च इंजन का यही काम है और उसे इसी हिसाह से तैयार किया गया है। लेकिन कोई 14 महीने का बच्चा ऐसा करे तो आप क्या कहेंगे। सर्च इंजन के नाम से मशहूर नन्हे बच्चे ने लंदन वर्ल्ड बुक ऑफ रेकॉर्ड तक को अपने बारे में सोचने के लिए मजबूर कर दिया। यह नन्हा सा बच्चा और कोई नहीं बल्कि रीवा के समान क्षेत्र में रहने वाला 14 माह का यशस्वी मिश्रा है। यशस्वी ने जन्म के साथ ही अपने शरीर में अद्भुत मेमोरी पावर विकसित कर ली और 14 माह के भीतर ही उसने यह कारनामा करके दिखाया है कि आप उससे देश दुनिया से जुड़ी किसी भी चीज के बारे में पूछ सकते हैं। बस एक बार चंद सेकंड के लिए उसे जानकारी देनी होगी। इसके बाद जब कभी आप उससे सवाल करेंगे झट से जवाब आप के सामने होगा।

संजय मिश्रा के पुत्र यशस्वी मिश्रा ने अपने जन्म के छह माह बाद ही मेमोरी पावर को विकसित कर लिया। किसी भी विषय के बारे में उसे थोड़ी सी जानकारी देने के बाद आप दोबारा उससे पूछेंगे तो आपको फट से उत्तर मिल जाएगा। यशस्वी 26 देशो के राष्ट्र ध्वजों को पहचानता है। यशस्वी को उसके माता-पिता ने अलग-अलग देशों के झंडों के बारे में जानकारी दी थी। चंद सेकेंड के भीतर ही दोबारा पूछने पर उसने झट से प्रत्येक देश के झंडे को पहचान लिया। तब उसके माता-पिता को यह एहसास हुआ कि यशस्वी ने अद्भुत प्रतिभा लेकर जन्म लिया है। जो काम पढ़ाई में महारत हासिल करने वालों के लिए भी शायद मुश्किल होगा, वह काम यशस्वी के लिए बाएं हाथ का खेल है।

यशस्वी के दादा अवनीश मिश्रा पेशे से शिक्षक हैं और वर्तमान में वह रीवा के दुआरी हायर सेकेंडरी स्कूल में कार्यरत हैं। यशस्वी के पिता संजय मिश्रा बिजनेस मैन हैं। 14 महीने के यशस्वी की इस उपलब्धि को देखते हुए उसके दादा,माता और पिता आंगे और नाम रौशन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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