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MP News : मिट्टी बचाओ अभियान के 79 वें दिन सागर से होकर भोपाल पहुंचेंगे सद्गुरु जग्गी वासुदेव

सदगुरु जग्गी वासुदेव ने मार्च महीने में 100 दिन, 30 हजार किलोमीटर की मोटरसाइकिल यात्रा 'जर्नी टू सेव सॉइल' की शुरुआत की थी। सद्गुरु अपनी मोटरसाइकिल से 26 देशों की यात्रा कर मिट्टी बचाव का संदेश (save soil campaign) दिया है। सद्गुरु 79 वें दिन सागर पहुंचेंगे। यहां से वे भोपाल के लिए रवाना होंगे। सागर में सद्गुरु करीब 1 घंटे ठहरेंगे।

Lipi 7 Jun 2022, 9:47 pm
सागर : 100 दिनों की यात्रा के 79 वें दिन सद्गुरु जग्गी वासुदेव (sadhguru jaggi vasudev) सागर से होकर भोपाल पहुंचेंगे। वे बाइक से 26 देशों की यात्रा कर मिट्टी बचाओ अभियान (save soil campaign) को लेकर वापस भारत लौटे हैं। क्लाइमेट चेंज में भारत की भूमिका की बात करें तो विकसित देशों की तुलना में शून्य ही है। हम एक कृषि प्रधान देश हैं। लेकिन भारत ने विश्व के सामने यह चिंता रखी है कि आने वाले समय में हम बड़े संकट से गुजरने वाले हैं। यह संदेश लेकर सद्गुरु विभिन्न देशों में बाइक से घूमे और अरबों लोगों तक यह संदेश पहुंचाया।
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जानकारी देते हुए हठ योग प्रशिक्षक राम साहू, डॉ नैंसी मौर्य व सनजय चौबे लिधौरा ने बताया कि स्टेट गेस्ट सद्गुरु वासुदेव जामनगर से जयपुर होते हुए दिल्ली पहुंचे थे। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका समर्थन किया और सेव सॉइल को लेकर जागरूक होने का समस्त विश्व से आह्वान कर 5 सूत्रीय मंत्र भी साझा किया। अब वे लखनऊ से भोपाल जा रहे हैं, इसी बीच गुरुवार को वे 12.30 से 1 बजे के बीच सागर पहुंचेंगे। जहां भैंसा स्कूल के पास स्वागत व्यवस्था कर उनके उद्बोधन देंगे।
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बता दें कि ‘मिट्टी बचाओ आंदोलन’ की शुरुआत इसी साल मार्च में सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने की थी। वे सब दौरान बाइक यात्रा पर हैं। जिसका समापन 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कावेरी बेसिन में होगा।
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कहीं भी रुककर देते हैं संदेश
वोलेंटियर्स ने बताया कि इस यात्रा में उनको कोई किसान या जन समूह या कोई भी ऐसा अवसर मिलता है जहां वह अपनी बात रख सकें वहां वह रुक जाते हैं। अपनी यात्रा में सद्गुरु लोगों से मिलकर उन्हें मिट्टी बचाने के लिए भरसक प्रयास कर जागरूक कर रहे हैं। वोलेंटियार डॉ नैंसी मौर्य ने बताया कि चिंता है कि मिट्टी में जब दशमलव पांच प्रतिशत से कम ऑर्गेनिक कंटेंट बचत है। तब वह रेत में तब्दील हो रही होती है। हमारे पास समय बहुत कम है। केवल 60 साल के लिए ही उपार्जन योग्य भूमि बची है। इससे फ़ूड शॉर्टेज पैदा हो जाएगी। ऐसे में लोगों के भोजन तो होता है लेकिन वह उपयोगी नहीं होता कहीं न कहीं अब भी विटामिन डेफिशिएनशी लोगों में देखी जा रही है। साथ ही फ्लड, बायोडायवर्सिटी भी प्रभावित होगी, क्लाइमेट चेंज भी हो जाता है।

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