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सूर्य की पहली किरण शिवलिंग पर पड़ते ही शुरू हो जाता है आस्‍था का अग्नि मेला... दहकते अंगारों पर चलते हैं श्रद्धालु

मध्‍य प्रदेश के सागर में एक आस्‍था का अद्भुत मेला आयोजित होता है। यहां सैकड़ों की संख्‍या में श्रृद्धालु अग्नि मेला में पहुंचकर दहकते अंगारों पर चलते हैं। (Dev Khanderao temple agni mela) ये सैकड़ों साल पुरानी परंपरा है। मेला सागर जिले के देवरी के देव खंड़ेराव मंदिर में आयोजित होता है।

Lipi 2 Dec 2022, 12:27 am

हाइलाइट्स

  • सागर के देवरी में शुरू हुआ आस्‍था का अग्नि मेला
  • मन्‍नत पूरी होने पर दहकते अंगारों पर चलते हैं श्रृद्धालु
  • सूर्य की पहली किरण शिवलिंग पर पड़ते ही शुरू होता है अग्नि मेला

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नवभारतटाइम्स.कॉम Sagar
सागर: राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर स्थित सागर जिले की देवरी विधानसभा यानी देवताओं की नगरी। यहां सैकड़ों साल पुरानी परंपरा है, जिसमें श्रृद्धालु दहकते अंगारों पर चलते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार अगहन माह की षष्ठी के दिन श्री देव खंडेराव मंदिर में ठीक बारह बजे सूरज की एक दिव्य किरण मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग पर पड़ती है। इसी के साथ ही आरंभ होता है भट्टियों में दहकते अंगारों पर चलने का सिलसिला। जो भी श्रद्धालु यहां मन्नत मांगते हैं वे अपने हाथ की छाप मंदिर की दीवार पर छोड़ जाते हैं। मनोकामना पूरी होती तब अंगारों पर चलकर भगवान का धन्यवाद किया जाता है।

400 साल पुराना मंदिर, आज भी लगता है अग्नि मेला

देवरी सागर जिले की एक तहसील है जो जिला मुख्यालय से करीब 75 किलोमीटर दूर है। इस ऐतिहासिक महत्व चंदेल शासकों से जुड़ा है। 15 वीं शताब्दी में यहां की गढी अपने आप मे बड़ा महत्व रखती थी जो आज भी शहर की विरासत है। इसे रानी दुर्गावती के 52 गढ़ों में गिना जाता था। कालांतर में अकबर के सेनापति से लड़ते हुए रानी वीर गति को प्राप्त हुईं। लेकिन बुंदेलों और मराठाओं ने यहां दबदबा बनाया। मराठा काल में यहां एक मंदिर का निर्माण हुआ जिसे श्री देव खंडेराव मंदिर के नाम से जाना जाता है। करीब 400 साल पुराना यह मंदिर आज भी अग्नि मेले की परंपरा को निभा रहा है। इस मेले में सागर जिले समेत आसपास के कई जिलों से लोग आते हैं। इस वर्ष 29 नवंबर को मेला शुरू हुआ जो 8 दिसंबर तक चलेगा।

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ऐसे शुरू हुई ये परंपरा

देवरी के शासक राजा यशवंतराव का बेटा एक बार गंभीर बीमार हो गया। कई वैद्यों को दिखाया तमाम उपाय किए, लेकिन कोई फायदा नहीं। तब राजा के पास केवल भगवान की ही शरण में जाना था। कहते हैं कि राजा को देव खंडेराव ने स्वप्न में दर्शन दिए। और कहा कि मंदिर में हल्दी के उल्टे हाथ लगाएं मंदिर परिसर में भट्टियां खुदवाकर दहकते अंगारों पर हल्दी डालकर अग्नि के ऊपर से निकले। राजा ने तय कर लिया और इस चमत्कार को देखने लोगों का हुजूम जुड़ा। मेले का आरंभ हो गया इस मंदिर से कई पीढ़ियों से जुड़े पुजारी नारायण मल्हार वैद्य देव बताते हैं कि अंगारों पर चलने के बाद राजा का बेटा स्वस्थ हो गया ताभ से यह परंपरा जारी है। यहां 10 दिवसीय मेले में हर दिन सैकड़ों लोग अंगारों पर चलते हैं और सम्पूर्ण आयोजन में हजारों श्रद्धालु ऐसा करते हैं कभी किसी को फॉल तक नहीं आया।

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