ऐपशहर

जय महाकाल का उद्घोष, रूद्राक्ष की माला...पीएम मोदी के रास्ते पर चलकर उनकी काट ढूंढ रहे राहुल गांधी

मंगलवार को कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी कमोबेश उसी अंदाज में नजर आए जैसा 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिखे थे। मोदी तब महाकाल लोक के लोकार्पण के लोकार्पण के लिए आए थे जबकि राहुल भारत जोड़ो यात्रा के सिलसिले मे उज्जैन में थे। तो क्या राहुल भी मोदी की राह पर चल पड़े हैं। हम कुछ नहीं कहते, आप केवल इन दो तस्वीरों को देख लीजिए।

Authored byआदित्य पूजन | नवभारतटाइम्स.कॉम 30 Nov 2022, 6:00 am

हाइलाइट्स

  • मंगलवार को राहुल गांधी ने किए महाकाल के दर्शन
  • राहुल ने जनसभा को किया संबोधित
  • 11 अक्टूबर को उज्जैन आए थे पीएम मोदी
सारी खबरें हाइलाइट्स में पढ़ने के लिए ऐप डाउनलोड करें
नवभारतटाइम्स.कॉम modi and rahul
उज्जैनः 11 अक्टूबर, 2022, फिर 29 नवंबर, 2022। देश की दो सबसे बड़ी पार्टियों के दो सबसे बड़े नेता। एक ही जगह, लेकिन लक्ष्य अलग-अलग. समानता केवल इतनी कि दोनों एक-दूसरे को मात देने की कोशिश में लगे हैं, लेकिन क्या दोनों ने इसके लिए एक ही तरीका अपनाया है। क्या यह सच है कि हिंदुत्व के रास्ते पर चल रही एक पार्टी को सत्ता से अपदस्थ करने के लिए दूसरी पार्टी ने भी उसी का रास्ता अख्तियार कर लिया है। दोनों की विचारधाराएं बिलकुल अलग हैं, फिर रास्ते एक जैसे कैसे हो सकते हैं। संदेह पैदा होना लाजिमी है, लेकिन तस्वीरें तो यही कहानी कहती हैं।
अब जरा इन तस्वीरों पर गौर कीजिए। पहली तस्वीर 11 अक्टूबर की है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्जैन आए थे और महाकाल लोक का का लोकार्पण किया था। भगवा वस्त्र पहने मोदी ने इसके बाद एक जनसभा को भी संबोधित किया था। दूसरी तस्वीर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की है जो 29 नवंबर को उज्जैन में थे। राहुल ने भी मोदी की तरह पहले भगवान महाकाल का आशीर्वाद लिया, फिर जनसभा को संबोधित किया।

समानताओं की कमी नहीं
पहले दोनों तस्वीरों की समानताओं पर गौर कीजिए। मोदी के गले में रूद्राक्ष की माला है। भगवा वस्त्र पहने मोदी शिव भक्ति में लीन नजर आते हैं। राहुल की तस्वीर भी इससे खास अलग नहीं हगै। गले में रूद्राक्ष की माला पहने राहुल भी मोदी की तरह महाकाल की अराधना में लीन दिखाई पड़ते हैं। धोती पहने राहुल के शरीर पर भी लाल रंग का अंगवस्त्र है जो उन्हें महाकाल मंदिर के पुजारियों ने भेंट किया। तो क्या दोनों एक ही रास्ते पर चल रहे हैं।

इस पर भी नजर डालिए
समानताएं यूहीं खत्म नहीं होतीं। महाकाल के दर्शन के बाद दोनों ने जनसभाओं को संबोधित किया। दोनों ने अपने भाषण की शुरुआत जय महाकाल के उद्घोष से की। दोनों तपस्वी के वेश में नजर आए। सांसारिकता से दूर, लेकिन राजनीतिक उद्देश्य से परिपूर्ण।

रास्ते अलग, लेकिन लक्ष्य एक
इसमें कोई संदेह नहीं कि दोनों एक ही रास्ते पर चल रहे हैं और दोनों का लक्ष्य भी समान है- एक दूसरे को मात देना। फर्क सिर्फ इतना है कि मोदी के हिंदुत्व की काट ढूंढने के लिए राहुल ने तथाकथित सॉफ्ट हिंदुत्व का रास्ता अपनाया है। महाकाल से पहले राहुल भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन भी कर चुके हैं। अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल धर्म से लेकर राजनीति तक- कोई हथियार आजमाने से चूकना नहीं चाहते। अब देखना यह है कि मोदी के हिंदुत्व के मुकाबले उनका सॉफ्ट हिंदुत्व कितना कामयाब रहता है।
लेखक के बारे में
आदित्य पूजन
आदित्य पूजन नवभारत टाइम्स में असिस्टेंट न्यूज एडिटर पर कार्यरत हैं। दैनिक जागरण, दैनिक भारस्कर और जी ग्रुप में काम कर चुके हैं। प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के बाद अब डिजिटल मीडिया में काम कर रहे हैं। राजनीति और खेल जगत की खबरों से काफी लगाव है।... और पढ़ें

अगला लेख

Stateकी ताजा खबरें, ब्रेकिंग न्यूज, अनकही और सच्ची कहानियां, सिर्फ खबरें नहीं उसका विश्लेषण भी। इन सब की जानकारी, सबसे पहले और सबसे सटीक हिंदी में देश के सबसे लोकप्रिय, सबसे भरोसेमंद Hindi Newsडिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नवभारत टाइम्स पर
ट्रेंडिंग