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Odisha News: ओडिशा में 44 लाख रुपये में नीलाम कर दिया सरपंच का पद, जांच के आदेश

ओडिशा के बलांगिर जिले स्थित दूरवर्ती ग्राम पंचायत में कुछ प्रभावाली लोगों के समूह ने सरपंच का पद 44 लाख रुपये में नीलाम कर दिया। पंचायत के सदस्य दावा कर रहे हैं कि यह सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है और इस राशि का इस्तेमाल विकास कार्यों में होगा।

Reported byAvinash Mohanty | Edited byशेफाली श्रीवास्तव | टाइम्स न्यूज नेटवर्क 17 Jan 2022, 11:14 am

हाइलाइट्स

  • ओडिशा में पंचायत चुनाव से पहले सरपंच के पद की बोली लगाने का मामला सामने आया
  • बलइसारदा पंचायत में कुछ प्रभावशाली लोगों ने सरपंच का पद 44 लाख रुपये में नीलाम
  • लोगों ने कहा सर्वसम्मति से लिया गया फैसला, राशि का इस्तेमाल विकास कार्यों में होगा

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बलांगिर
ओडिशा में पंचायत चुनाव से पहले सरपंच के पद की बोली लगाने का मामला सामने आया है। ओडिशा के बलांगिर जिले स्थित दूरवर्ती ग्राम पंचायत में कुछ प्रभावशाली लोगों के समूह ने सरपंच का पद 44 लाख रुपये में नीलाम कर दिया। पंचायत के सदस्य दावा कर रहे हैं कि यह सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है और इस राशि का इस्तेमाल विकास कार्यों में होगा। घटना के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं।
बोली लगाने वालों में 4 लोग शामिल थे जिनमें से एक ने सबसे अधिक 44 लाख रुपये की बोली लगाई और निर्विरोध सरपंच उम्मीदवार चुने गए। जबकि राज्य चुनाव आयोग ने चुनावी खर्चे की अधिकतम सीमा 2 लाख रुपये तय की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस राशि का उपयोग बिलइसारदा गांव स्थित जगन्नाथ मंदिर के विकास कार्य में किया जाएगा।

जगन्नाथ मंदिर समिति को दी जाएगी राशि
बिलइसारदा पंचायत तीन गांवों को मिलाकर बना है- बिलइशारदा, बंदनाकंता और कसुरुपलि। यहां 15 वार्ड हैं और करीब 2000 की आबादी है। आने वाले चुनाव में यहां सरपंच का पद अनारक्षित अधिसूचित किया गया है जबकि समिति सदस्य का एक पद एसटी समुदाय की महिला के लिए आरक्षित है।

बिलइसारदा निवासी दीनाबंधु गडत्या ने बताया, 'तीनों गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों की एक मीटिंग रखी गई थी जिसमें उन्होंने सरपंच के पद की नीलामी का फैसला लिया। यह राशि जगन्नाथ मंदिर समिति फंड को जाएगी।'

'चुनाव में प्रलोभनों को रोकने के लिए लिया फैसला'
पद के लिए सबसे बड़ी बोली लगाने वाले सुशांता चटरिया कहते हैं कि 'चुनाव में रुपये और दूसरे प्रलोभनों को रोकने के लिए पंचायत के वोटरों ने एकमत रूप से नीलामी का फैसला लिया। गांववालों ने इस कदम का स्वागत किया और मुझे सरंपच पद का एकमात्र उम्मीदवार बनाने के लिए समर्थन दिया।' सुशांता पेशे से कॉन्ट्रैक्टर हैं।

वहीं बिलइसारदा गांव के निवासी बीरेंद्र पांडा बताते हैं कि मंदिर कमिटी में पंचायत के ही कुछ प्रभावशाली लोग शामिल होते हैं और वे सभी ग्रामीणों की ओर से फैसला ले लेते हैं। वह कहते हैं, 'वे लोग नागरिकों के वोटिंग अधिकारों का हनन कर रहे हैं। मैं मीटिंग में मौजूद था और मैंने नीलामी के विचार का विरोध किया था। मैंने कहा था कि ऐसा करके हम लोगों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर रहे हैं लेकिन उन्होंने मेरा मजाक उड़ाया।'

18 फरवरी को होंगे पंचायत चुनाव
बलांगिर के जिला कलेक्टर चंचल राणा ने बताया कि मामले की जांच होगी। उन्होंने कहा, 'मैं इस घटना से अवगत नहीं हूं और मैं इसकी निश्चित रूप से जांच कराऊंगा और उचित कार्रवाई की जाएगा।' बिलइसारदा पंचायत में 18 फरवरी को पंचायत चुनाव होने हैं।
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Avinash Mohanty

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